Read Bijali's story Possessive Bacteria | पजेसिव बैक्टीरिया: उसका गुस्सा थोड़ा शांत सा होने लगा

पजेसिव बैक्टीरिया: उसका गुस्सा थोड़ा शांत सा होने लगा

उसकी आंखों से झर झर आंसू झड़ रहे थे. वह चाहती तो और भी बहुत कुछ कह सकती थी, मगर उसने जैसे ही रोहित की तरफ देखा, उसका गुस्सा थोड़ा शांत सा होने लगा था.

By: | Updated: 25 Oct 2017 03:57 PM
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रोहित का दिल टिया पर आ गया था. लेकिन क्या प्यार का इज़हार बिना बोले किया जा सकता है? बिजली की एक दिलकश कहानी.


पजेसिव बैक्टीरिया


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कॉलेज से आते समय टिया फिर रुक गयी चुस्की के ठेले पर. “ऐ रोहित, सुन न! गोला खाते हुए चलते हैं.” टिया को गोला बहुत पसंद था, काला गोला, खट्टा मीठा गोला. रोहित ने उसे थोड़ा गुस्से से देखा. “नहीं यार, तुम कहो तो कैफे कॉफी डे में कॉफी पिला सकता हूं, मगर ये सड़क पर बिकने वाला गोला! तुम्हें पता है खुली सड़क पर बर्फ में कितनी बैक्टीरिया होती हैं ?” रोहित ने इन्कार से सिर हिलाया.


“ऐ सुनो, तुम हमारे कोई वो नहीं हो जिसकी हम सारी बात मानें और वो भी गोला के बारे में!” टिया ने पैर पटकते हुए कहा. “हां, हम हैं ही कौन तुम्हारे!” रोहित भी ठेले से आगे बढ़ता हुआ बोला.


टिया को बहुत बुरा लगा! उसने अपने कंधे तक बालों को झटका और “हू केयर्स” कहते हुए ठेले की तरफ बढ़ गयी. ठेले पर पहुंच कर जैसे ही उसने काले हरे, खट्टे मीठे गोले बनते हुए देखे, उसे देखते ही रोहित को गुस्सा करने का अफसोस उसके मन से जाता रहा. उसने खूब बड़ा सा गोला बनवाया, उसमें खूब चाशनी वाला रस डलवाया. कॉलेज से थोड़ी दूर पर एक पेड़ के नीचे बेंच पड़ी थी, जहां पर कई लड़के लड़कियां बैठे थे. कोई बस के इंतज़ार में था, तो कोई गोलगप्पे की प्लेट लेकर वहां बैठा था. कॉलेज छूटते ही वहां पर लड़के लड़कियों का जमघट लग जाता था. वह भी अपना गोला लेकर वहीं चली गयी. आराम से बैठकर खाऊंगी. वह मन में सोच रही थी. उस समय रोहित उसके मन में बिलकुल भी नहीं था. “छोड़ो, है ही कौन मेरा? जब देखो हुकुम चलाता रहता है, आखिर क्यों?”


टिया गोला मुंह में लेने जा रही रही थी कि तभी उसकी पीठ पर किसी ने घूंसा मारा. उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया और उसके हाथों से उसका काला गोला गिर गया.


“मना किया था तुम्हें, बोला था न कि बैक्टीरिया होते हैं. खुद खाओगी और बीमार होने पर सबको परेशान करोगी?”


टिया इस हमले के लिए तैयार नहीं थी, वहां पर उसकी क्लास के भी कई थे. अपमान से उसका चेहरा लाल हो गया.


“ऐ मिस्टर रोहित, तुम हो ही कौन मेरे? मेरे भाई हो, पापा हो? जो इस तरह मुझ पर गुस्सा हो रहे हो? आखिर तुमने मुझे सबके सामने इस तरह!”


उसकी आंखों से झर झर आंसू झड़ रहे थे. वह चाहती तो और भी बहुत कुछ कह सकती थी, मगर उसने जैसे ही रोहित की तरफ देखा, उसका गुस्सा थोड़ा शांत सा होने लगा था. रोहित की आंखों में भी आंसू थे, रोहित ने पूछा, “क्या पापा और भाई ही केयर कर सकते हैं? दोस्त या बॉयफ्रेंड नहीं?”


टिया का चेहरा बॉयफ्रेंड शब्द सुनकर अजीब सा होने लगा! वह वहां और नहीं रुक सकी. उसने ऑटो किया और चली आई. उसके कानों में रह रहकर बॉयफ्रेंड शब्द गूंज रहा था. आज उसे ध्यान आ रहा था रोहित का बार बार उसकी केयर करना, उसकी नोटबुक्स का ध्यान रखना, वह कब आ रही है, कब जा रही है, कौन-से नंबर की बस उसके लिए सही होगी, उस रूट पर कौन सी मेट्रो जाती है, उसे कौन सी कोचिंग में जाना है, यह सब रोहित ही तो देखता था.


रोहित उसे लेकर बहुत पज़ेसिव था, वह हमेशा सोचती थी कि आखिर रोहित उसके लिए इतना पज़ेसिव क्यों है? आज उसे पता चला, अगर रोहित को उससे प्यार है तो वह रिया के पीछे क्यों पड़ा रहता है? रिया के साथ बैठता है, रिया के साथ ही कभी कभी लंच करता है. उसके साथ तो कम ही समय बिताता है, बस ध्यान रखता है, एक एक चीज़ पर अधिकार जताता है, वह तो रिया को उसकी गर्लफ्रेंड समझती थी. क्या वाकई रोहित उसे प्यार करता है? ओह! वह कैसे पता करे, टिया बार बार सोच रही थी.


टिया ने घर पहुंच कर भी किसी से सही से बात नहीं की.


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(बिजली की कहानी का यह अंश प्रकाशक जगरनॉट बुक्स की अनुमति से प्रकाशित)

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Web Title: Read Bijali’s story Possessive Bacteria | पजेसिव बैक्टीरिया: उसका गुस्सा थोड़ा शांत सा होने लगा
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