इश्क़ ऑन एयर: एफएम पर उस लड़के की आवाजें सुनकर उस लड़की को उससे मुहब्बत हो गई थी

जो भी हो बस एक ही तो चीज़ है जो मुझे तुमसे जोड़े हुए रखी है...तुम्हारा रोज़ अपने एफएम पर ऑन एयर होना और मेरा तुमसे, तुम्हारे आवाज़ से जुड़ जाना...मुझे बहुत गुस्सा आता है उन लड़कियों पर जो तुम्हें तुम्हारे शो पर फोन करके कहती हैं कि वह तुमसे प्यार करती हैं.

By: | Last Updated: Monday, 17 July 2017 4:06 PM
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एफएम पर उस लड़के की आवाजें सुनकर उस लड़की को उससे मुहब्बत हो गई थी. उसके बारे में उसने क्या क्या सपने नहीं देख लिए. क्या उस लड़के तक पहुंचने की कोशिश रंग लाएगी? 

इश्क़ ऑन एयर

हिमांशु सिंह

ishq on air

रात के ग्यारह बज चुके थे और मैं थी कि सबके सोने का इंतज़ार कर रही थी…मां ने बाहर का ताला बंद किया और सोने चली गयीं…और मैं झट से वही काम काम करने का इंतज़ार करने लगी जो मैं रोज़ किया करती थी…नहीं यह मेरी उम्र की लाखों लड़कियों की तरह किसी लड़के से फोन पर बतियाना नहीं था…उनको तो मोहब्बत में अपनी बात कहने की आजादी होती है…मैं तो वह नहीं कर सकती थी न…तकिS के नीचे छुपा हेडफोन कानों में लगाया और सुनने लगी एफएम…तुम बोल रहे थे…हर रोज़ की तरह…वही कशिश भरी आवाज़…वही लफ़्ज़ों की जादूगरी…वही दिल की स्याही से लिखी हुई बातें…और मेरी जैसी हज़ारों लड़कियों के प्यार का पंचनामा कर रहे थे तुम.

पिछले महीने की एक रात तुम्हें सुन रही थी तो मां ने देख लिया था…उनको लगा कि मैं रात में किसी लड़के से बात करती हूं…गुस्से में उस रात उन्होंने हेड फोन तोड़ दिया था…मैं सोचती रही कि किस तरह अब तुम्हारी आवाज़ सुनूं? कॉलेज से लौटते वक्त नया हेड फोन ले आई…अब सोच लिया कि मां के सोने के बाद ही तुमसे मुलाक़ात होगी हर रात…तुम्हारे एफएम पर…कोई किसी की आवाज़ से इतना प्यार कर सकता है क्या? कि बस पागल हो जाए…कभी देखा नहीं था तुम्हें तो बस मन के अल्बम के फ्रेम में रोज़ तुम्हारी नई तस्वीर सज़ा देती थी…मन करता था कि किसी दिन रेडियो स्टेशन फोन कर तुम्हारा नंबर मांग लूंगी…तुमसे बतियाऊंगी…तुमसे मिलूंगी…फिर बताऊंगी कि मुझे तुमसे और तुम्हारी आवाज़ से इश्क है…अजीब प्रेम है न…न कोई चेहरा है जो चस्पा हो आंखों के दरवाज़े पर, ना पता है कि उम्र क्या है…न जानती हूं कि तुम किसी और से प्रेम भी करते होगे…याकि शादी शुदा होगे…?

जो भी हो बस एक ही तो चीज़ है जो मुझे तुमसे जोड़े हुए रखी है…तुम्हारा रोज़ अपने एफएम पर ऑन एयर होना और मेरा तुमसे, तुम्हारे आवाज़ से जुड़ जाना…मुझे बहुत गुस्सा आता है उन लड़कियों पर जो तुम्हें तुम्हारे शो पर फोन करके कहती हैं कि वह तुमसे प्यार करती हैं…या वह जो एसएमएस करती हैं…उनके मैसेज इग्नोर नहीं किए जा सकते क्या…रोज़ अपने शो में उन्हें पढ़कर सबको सुनाते हो. तुम जानते नहीं हो मेरे दिल पर क्या गुज़रती है…तुम वहां उनके मैसेज पढ़कर मुस्कुराते हो और मैं यहां रुआंसी हो जाती हूं…अजीब लड़कियां हैं न यह जो दुनिया के सामने तुमसे अपने इश्क का इज़हार करती हैं…मैं दावे से कह सकती हूं…इनमें से कोई तुम्हें अपना असली नाम नहीं बताती…मैंने भी सोचा कि तुम्हें एक दिन एसएमएस भेजूंगी और तुम मेरा इज़हार ए इश्क़ दुनिया के सामने पढ़ोगे…पर अपना नाम लिख नहीं सकती और झूठा नाम लिखने से अच्छा है कि बस तुम्हें सुना जाए और इश्क की दरिया में हवाई गोते लगाए जाएं.

इश्क़ में लोग अपने दोस्तों से मदद लेते हैं, मैं पूछूंगी न तो मेरे साथ की सहेलियां हंसेंगी मुझ पर…लड़की बौरा गई है, ऐसे आदमी से प्यार कर बैठी है, जिसे देखा तक नहीं है…बस आवाज़ से पहचानती है…वह भी रात के एक घंटे…बस…उफ्फ कौन बात करे उन पगलियों से…

तुमसे ही बात करना होगा अब…क्लास की एक लड़की ने बताया था कि तुम्हारे रेडियो की वेबसाइट पर सारे आरजे के नंबर दिए गए हैं…कल कॉलेज से लौटकर जब साइबर कैफे में बैठकर तुम्हारा नंबर ढूंढ़ा…तो कोई मोबाइल नंबर नहीं था…बस लैंडलाइन ही था…क्या करती…सोचा कल सुबह मिलाऊंगी…तुम्हारा असली नंबर मांग लूंगी…फिर क्या होगा…बस तुमसे बात करूंगी…तुमसे मिलना होगा…मैं अपने जिगर में समेटी हुई बातों को तुम्हारे सामने कह डालूँगी…और फिर वही सब…जो मैं चाहती थी…होने लगेगा…रोज़ तुम्हारी आवाज़ से उठा करूंगी…

नंबर मिलाया था कि उधर एक लड़की ने फोन उठाया…बाद में पता चला कि यह एक कम्प्यूटराइज्ड कॉल है…वेट करने को बोला जा रहा था…उधर से फिर एक लड़के की आवाज़ आने लगी मैंने कहा कि मुझे लव गुरु का पर्सनल नंबर चाहिए…मैं उनसे मिलना चाहती हूं…

वो ज़ोर से हंसा और कहा, अब यह प्रोग्राम तो रेकॉर्डेड चलता है…जिस आदमी की आवाज़ है वह तो सारे शो रेकॉर्ड कर कब का जा चुका…लंदन…

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(हिमांशु सिंह की किताब नाम ही कॉफी है का यह अंश प्रकाशक जगरनॉट बुक्स की अनुमति से प्रकाशित)

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