प्रेम में ऑनलाइन फ्रॉड: फ्रेंडशिप जरूर स्वीकार करें पर अलर्ट रह कर

प्रेम में ऑनलाइन फ्रॉड: फ्रेंडशिप जरूर स्वीकार करें पर अलर्ट रह कर

‘वर्चुअल प्रेम’ का सीधा सा तात्पर्य है काल्पनिक प्यार यानी युवकयुवती आमनेसामने न बैठ कर इंटरनेट के माध्यम से प्रेम के तारों को जोड़ते हैं. यहां पहचान के नाम पर पेश करने वाले की एक ऑनलाइन प्रोफाइल होती है जिस की सत्यनिष्ठा की कोई गारंटी नहीं होती.

By: | Updated: 20 Sep 2017 03:58 PM

पहले दोस्ती, फिर प्रेम और उस के बाद धोखाधड़ी के मामले काफी देखने में आते हैं. जरूरत है सतर्क रहने की ताकि प्रेम में धोखे से बचा जा सके. अगर आप भी प्यार में हैं तो आपको क्या सावधानियां बरतनी चाहिए, जानिए इस किताब में.  


प्रेम में ऑनलाइन फ्रॉड


मुक्ता


mukta articals

नेशनल क्राइम ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार सोशल मीडिया के जरिए की गई दोस्ती और प्रेम ज्यादातर मामलों में फेक आइडेंटिटी का इस्तेमाल होता है जिस कारण प्रेम करने वाली युवतियां ऑनलाइन ज्यादा फरेब का शिकार होती हैं.


आज देश में 10 करोड़ से ऊपर की आबादी इंटरनेट के विभिन्न माध्यमों जैसे व्हाट्सऐप, गूगल, ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन, फेसबुक आदि का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही है. सरकारी और निजी भागीदारी ने इंटरनेट की पहुंच को जनजन तक पहुंचा दिया है, पर इस का सब से बड़ा खमियाजा उन युवक-युवतियों को भुगतना पड़ रहा है जो बिना सोचे समझे इंटरनेट से प्रेम की पेंगें बढ़ाते हैं.


वर्चुअल फ्रेंडशिप इंटरनेट की दुनिया के लिए कोई नया शब्द नहीं. एक बड़ा युवावर्ग काल्पनिक दुनिया के अंजामों से बेपरवा लगातार इस की दलदल में धंसता जा रहा है. ऑनलाइन प्रेम के नाम पर धोखे की हजारों घटनाएं आए दिन घट रही हैं, जिन में अधिकतर मामलों में शोषण, ब्लैकमेलिंग या उगाही के शिकार हुए लोग तब जागते हैं जब उन का सबकुछ लुट चुका होता है.


ऐसे में जरूरी है कि हम सतर्क व सचेत रहें. फ्रेंडशिप जरूर स्वीकार करें पर अलर्ट रह कर.


क्या है वर्चुअल प्रेम


 ‘वर्चुअल प्रेम’ का सीधा सा तात्पर्य है काल्पनिक प्यार यानी युवकयुवती आमने सामने न बैठ कर इंटरनेट के माध्यम से प्रेम के तारों को जोड़ते हैं. यहां पहचान के नाम पर पेश करने वाले की एक ऑनलाइन प्रोफाइल होती है जिस की सत्यनिष्ठा की कोई गारंटी नहीं होती. प्रोफाइल फेक भी हो सकती है. दूर बैठे, उंगलियों की हरकतों पर की गई इस दोस्ती में कोई वास्तविकता नहीं होती. ज्यादातर मामलों में छद्म तसवीर व फेक प्रोफाइल व फेक इनफॉर्मेशन को आधार बनाया जाता है.


फ्रॉड के इन रास्तों से बचें


अकसर ऑनलाइन माध्यमों जैसे फेसबुक, ट्विटर आदि के जरिए फेक आइडेंटिटी के साथ फ्रेंड रिक्वैस्ट भेजी जाती है, जिसे युवतियां आंख मूंद कर स्वीकार कर लेती हैं जो बिलकुल  उचित नहीं. बिना किसी की आइडेंटिटी जाने उस की रिक्वैस्ट ऐक्सैप्ट करना मुसीबत को न्योता देना है.


सिर्फ फेसबुक ही क्यों लिंक्डइन, इंस्टाग्राम, मैसेंजर, ट्विटर जैसी अति सक्रिय ऐप्लिकेशंस को हम अनजाने में अपने एकांत का साथी बना तो लेते हैं, लेकिन तब अनजाने में हम बहुत बड़ी मुसीबत मोल ले रहे होते हैं.


प्रेम के नाम पर चैटिंग तक तो ठीक है पर बात तब बिगड़ती है जब हम एक कदम आगे बढ़ कर डेटिंग, मीटिंग, लाइव सेक्सुअल ऐक्सपोजर, कामुकता आदानप्रदान और एक दूसरे की फाइनेंशियल सपोर्ट तक आ पहुंचते हैं. यहीं से मुसीबत अपना रास्ता बना लेती है.


चैटिंग, डेटिंग, मीटिंग सब करें पर जब तक आप अच्छी तरह से अपने साथी को जान न लें, उस की प्रोफाइल की छानबीन न कर लें तब तक ऐसा करना खतरनाक हो सकता है.


जरा बच के, राह है मुश्किल


प्रेम की राह चलते धोखा खाने वालों में से आप भी एक न हों, इस के लिए कदम जरा सोचसमझ कर बढ़ाएं. प्रेम से गुरेज नहीं, पर ब्लाइंडफेथ को दरकिनार करें तभी होगी सच्ची दोस्ती की भरमार. निम्न बातों का ध्यान जरूर रखें :


-       नो कमिटमैंट, नो ट्रस्ट.


-       जस्ट फ्रेंडशिप डोंट बी ऐक्सेसिम.


-       सौदेबाजी से बच कर मित्रता करें.


-       नो फाइंनडिंग, नो डेटिंग.


-       गोपनीय सूचनाएं मसलन, घर का पता, टेलीफोन नंबर, अर्निंग सोर्स, पेरैंटस की जॉब, आदि गोपनीय ही रखें.


-       लाइव वीडियो शेयर न करें.


-       लाइव सेक्सुअल एक्सपोजर से बचें.


-       अनजान लोगों के साथ दोस्ती करने से पहले सौ बार सोचें, प्रोफाइल की पूरी डिटेल का पता लगाएं.


-       अकेले में डेटिंग से बचें.


-       अपने परिवार में उन दोस्तों के बारे में जरूर बताएं.


क्या करें जब हों साइबर क्राइम का शिकार


युवक युवतियां गाहेबगाहे ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार होते हैं. ऐसे में कभी धमकी तो कभी शोषण, ऐक्सटौरशन, मनीफ्रॉड और ब्लैकमेलिंग आदि की घटनाएं सामने आती हैं. ऐसी घटनाओं को साइबर क्राइम की श्रेणी में रखा जाता है.


इन से संबंधित शिकायत या मुकदमे के लिए विभिन्न थानों के अंतर्गत एक अलग ‘साइबर क्राइम प्रकोष्ठ का गठन किया गया है जहां तुरंत ही इन की शिकायत दर्ज करा, संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है.


फेसबुक पर अभद्र टिप्पणी से ले कर फोन पर आने वाले हौक कॉल, ब्लैंक कॉल या टीजिंग फोन कॉल या फिर आप के बैंक खातों आदि से अननोन डेबिट या ट्रांजैक्शन आदि से जुड़े मामलों की तत्काल शिकायत अपने इलाके के थाने में इस प्रकोष्ठ के अंदर की जा सकती है.


साइबर कानून के संज्ञान में आने से शिकायतकर्ता को एक अचूक हथियार मिल गया है. वह अपने साथ हो रहे किसी भी प्रकार के फ्रॉड की सूचना यहां दे सकता है. इसलिए चुप न बैठें, आक्रोश दिखाएं. ऑनलाइन प्रेम के जाल में न फंसे. इस के लिए मुस्तैद रहें, अपनी आंखें खोल कर रखें.


ऐसे मामलों में सटें नहीं और सामने वाले को अपनी किसी भी कमजोरी का फायदा उठाने का अवसर न दें.


ऑनलाइन दोस्ती, चैटिंग आदि से कोई गुरेज नहीं यह वक्त की मांग है, पर सूझबूझ और भरपूर समझदारी के साथ. जगे रहें और दूसरों को हमलावर होने का मौका न दें.


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(मुक्ता की कहानी का यह अंश प्रकाशक जगरनॉट बुक्स की अनुमति से प्रकाशित)

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