अनारकली: मैं ज़रूर इससे बदला लूंगा चाहे कुछ भी हो जाये | Read Saadat Hasan Manto's story Anarkali

अनारकली: मैं ज़रूर इससे बदला लूंगा चाहे कुछ भी हो जाये

सीमा का लहजा और ज़्यादा ख़ुश्क हो गया, “औरतों को मर्द के सहारे की ज़रूरत होगी मगर फ़िलहाल मुझे ऐसी कोई ज़रूरत महसूस नहीं होती. आप की पेशकश का शुक्रिया में अदा कर चुकी हूँ इस से ज़्यादा आप और क्या चाहते हैं?”

By: | Updated: 11 Dec 2017 04:00 PM
Read Saadat Hasan Manto’s story Anarkali

अनारकली


सआदत हसन मंटो


anarkali


नाम उस का सलीम था मगर उस के यार दोस्त उसे शहज़ादा सलीम कहते थे. ग़ालिबन इस लिए कि उस के ख़द-ओ-ख़ाल मुग़लई थे ख़ूबसूरत था. चाल ढाल से राऊनत टपकती थी. उस का बाप पीडब्ल्यू डी के दफ़्तर में मुलाज़िम था. तनख़्वाह ज़्यादा से ज़्यादा सौ रुपय होगी मगर बड़े ठाट से रहता ज़ाहिर है कि रिश्वत खाता था यही वजह है कि सलीम अच्छे से अच्छा कपड़ा पहनता जेब ख़र्च भी उस को काफ़ी मिलता इसलिए कि वो अपने वालदैन का इकलौता लड़का था.


जब कॉलिज में था तो कई लड़कियां उस पर जान छड़कतीं थीं मगर वो बे-एतिनाई बर्तता, आख़िर उस की आंख एक शोख़-ओ-शुंग लड़की जिस का नाम सीमा था, लड़ गई. सलीम ने उस से राह-ओ-रस्म पैदा करना चाहा. उसे यक़ीन था कि वो उस की इलतिफ़ात हासिल कर लेगा नहीं वो तो यहां तक समझता था कि सीमा उस के क़दमों पर गिर पड़ेगी और उस की ममनून-ओ-मुतशक़्क़िर होगी कि उस ने मुहब्बत की निगाहों से उसे देखा.


एक दिन कॉलिज में सलीम ने सीमा से पहली बार मुख़ातब हो कर कहा “आप किताबों का इतना बोझ उठाए हुई हैं लाईए मुझे दे दीजीए मेरा ताँगा बाहर मौजूद है आप को और इस बोझ को आप के घर तक पहुंचा दूँगा.”


सीमा ने अपनी भारी भरकम किताबें बग़ल में दाबते हुए बड़े ख़ुश्क लहजे में जवाब दिया “आप की मदद की मुझे कोई ज़रूरत नहीं बहरहाल शुक्रिया अदा किए देती हूँ.”


शहज़ादा सलीम को अपनी ज़िंदगी का सब से बड़ा सदमा पहुंचा चंद लम्हात के लिए वो अपनी ख़िफ़्फ़त मिटाता रहा. इस के बाद उस ने सीमा से कहा, “औरत को मर्द के सहारे की ज़रूरत होती है मुझे हैरत है कि आप ने मेरी पेशकश को क्यों ठुकरा दिया?”


सीमा का लहजा और ज़्यादा ख़ुश्क हो गया, “औरतों को मर्द के सहारे की ज़रूरत होगी मगर फ़िलहाल मुझे ऐसी कोई ज़रूरत महसूस नहीं होती. आप की पेशकश का शुक्रिया में अदा कर चुकी हूँ इस से ज़्यादा आप और क्या चाहते हैं?”


ये कह कर सीमा चली गई. शहज़ादा सलीम जो अनारकली के ख़्वाब देख रहा था आँखें झपकता रह गया. उस ने बहुत बुरी तरह शिकस्त खाई थी इस से क़ब्ल उस की ज़िंदगी में कई लड़कियां आ चुकी थीं जो उस के अब्रू के इशारे पर चलती थीं. मगर ये सीमा क्या समझती है अपने आप को “इस में कोई शक नहीं कि ख़ूबसूरत है. जितनी लड़कियां मैंने अब तक देखी हैं इन में सब से ज़्यादा हसीन है मगर मुझे ठुकरा देना ये बहुत बड़ी ज़्यादती है मैं ज़रूर इस से बदला लूंगा चाहे कुछ भी हो जाये.”


शहज़ादा सलीम ने उस से बदला लेने की कई स्कीमें बनाईं मगर बार-आवर साबित न हुईं. उस ने यहां तक सोचा कि उस की नाक काट डाले. ये वो जुर्म कर बैठता मगर उसे सीमा के चेहरे पर ये नाक बहुत पसंद थी. कोई बड़े से बड़ा मुसव्विर भी ऐसी नाक का तसव्वुर नहीं कर सकता था.


सलीम तो अपने इरादों में कामयाब न हुआ. मगर तक़दीर ने उस की मदद की उस की वालिदा ने उस के लिए रिश्ता ढूँडना शुरू किया. निगाह-ए-इंतिख़ाब आख़िर सीमा पर पड़ी जो उस की सहेली की सहेली की लड़की थी.


बात पक्की हो गई, मगर सलीम ने इनकार कर दिया. इस पर उस के वालदैन बहुत नाराज़ हुए. घर में दस बारह रोज़ तक हंगामा मचा रहा सलीम के वालिद ज़रा सख़्त तबीयत के थे, उन्हों ने उस से कहा, “देखो तुम्हें हमारा फ़ैसला क़बूल करना होगा.”


सलीम ने जवाब में ये कहा, “आप का फ़ैसला कोई हाईकोर्ट का फ़ैसला नहीं फिर मैंने क्या जुर्म किया है जिस का आप फ़ैसला सुना रहे हैं.” उस के वालिदैन को ये सुन कर तैश आ गया, “तुम्हारा जुर्म कि तुम ना-ख़ल्फ़ हो अपने वालिदैन का कहना नहीं मानते. उदूल-हुक्मी करते हो, मैं तुम्हें आक़ कर दूंगा.”


सलीम का जोश ठंडा हो गया. “लेकिन अब्बा जान, मेरी शादी मर्ज़ी के मुताबिक़ होनी चाहिए.”


“बताओ, तुम्हारी मर्ज़ी क्या है?”


“अगर आप ठंडे दिल से सुनें तो मैं अर्ज़ करूं.”


“मेरा दिल काफ़ी ठंडा है. तुम्हें जो कुछ कहना है फ़ौरन कह डालो मैं ज़्यादा देर इंतिज़ार नहीं कर सकता.”


सलीम ने रुक के कहा “मुझे मुझे एक लड़की से मुहब्बत है”


उस का बाप गर्जा “किस लड़की से?”


सलीम थोड़ी देर हिचकिचाया “एक लड़की है.”


“कौन है वो? क्या नाम है उस का?”


“सीमा मेरे साथ कॉलिज में पढ़ती थी.”


“मियां इफ़्तिख़ार उद्दीन की लड़की?”


“जी हाँ उस का नाम सीमा इफ़्तिख़ार है मेरा ख़्याल है वही है.”


उस के वालिद बे-तहाशा हँसने लगे, “ख़्याल के बच्चे तुम्हारी शादी उसी लड़की से क़रार पाई है क्या वो तुम्हें पसंद करती है?”


सलीम बौखला सा गया ये सिलसिला कैसे होगया उस की समझ में नहीं आता था कहीं उस का बाप झूट तो नहीं बोल रहा था. सलीम से जो सवाल किया गया था. उस का जवाब उस के वालिद को नहीं मिला था, चुनांचे उन्हों ने कड़क के पूछा “सलीम मुझे बताओ क्या सीमा तुम्हें पसंद करती है?”


सलीम ने कहा “जी नहीं”


“तुम ने ये कैसे जाना?”


“उस से उस से एक बार मैंने मुख़्तसर अल्फ़ाज़ में मुहब्बत का इज़हार किया लेकिन उस ने मुझे ”


“तुम्हें दर-ख़ूर एतिना ना समझा.”


“जी हाँ बड़ी बे-रुख़ी बरती.”


सलीम के वालिद ने अपने गंजे सर को थोड़ी देर के लिए खुजलाया और कहा “तो फिर ये रिश्ता नहीं होना चाहिए. मैं तुम्हारी माँ से कहता हूँ कि वो लड़की वालों से कह दे के लड़का रज़ामंद नहीं.”


पूरी किताब फ्री में जगरनॉट ऐप पर पढ़ें. ऐप डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें.


(सआदत हसन मंटो की कहानी का यह अंश प्रकाशक जगरनॉट बुक्स की अनुमति से प्रकाशित)

फटाफट ख़बरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर और डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App
Web Title: Read Saadat Hasan Manto’s story Anarkali
Read all latest Juggernaut News headlines in Hindi. Also don’t miss today’s Hindi News.

First Published:
Next Story मूर्ति: किस्मत इतनी बेरहम कैसे हो गयी?