प्लेटफॉर्म, पेड़ और पानी: क्या वो एक खुशहाल जिंदगी हासिल कर पाया?

उसके दिल में बिलकुल विश्वास था कि हत्या तो पति ने की है. कैसे बोले? कैसे बताए? उसके अंगों की आभा उड़ गई और एक हत्यारे के साथ रहने-सोने की इच्छा मर गई.

By: | Last Updated: Saturday, 12 August 2017 3:57 PM
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उसने अपनी पत्नी के प्रेमी को मार डालना चाहा था. वह जान लेने में तो कामयाब रहा, लेकिन क्या वो एक खुशहाल जिंदगी हासिल कर पाया? जिस अतीत से वह भागना चाहा था, क्या वह सैकड़ों मील दूर एक दूसरे देश में भी उसका पीछा करता हुआ चला आएगा?

प्लेटफॉर्म पेड़ और पानी

स्वदेश दीपक

Platform Ped Aur Pani

जहाँ पगडडियाँ सड़क से मिलती हैं, वहाँ रुक गया. कुत्ते के काँपते कानों के पीछे. कुत्ता अगले आदेश के लिए लगातार उसकी ओर देखता. उसके–बैठो कहने पर कुत्ता एक कसे हुए स्प्रिंग में बदला, बैठा, ज़मीन पंजों से खोदनी शुरू कर दी. उसे पता चल गया कि मुखिया सब्र की आखिरी सीमा तक पहुँच गया.

उसने कुत्ते की पीठ पर हाथ फेरा और अपने घर की तरफ़ दौड़ लगा दी, जहाँ सुनहले बालों वाला प्रेत आता है, जिसने बेटी के चेहरे से इंद्रधनुष और पत्नी के पर्स से वसंत चुरा लिया.

घर से थोड़ी दूर पेड़ के पीछे ओट ली. न वह उत्तेजित, न भयभीत, क्योंकि अंदर बैठे अहेरी ने बता दिया कि आखेट थोड़ी देर में आएगा. फिर प्रतीक्षा उसके स्वभाव का स्थायी भाव है. रसोई का पिछला दरवाज़ा हिला, जो मकान के बाहर खुलता है.

सन्नाटे में छोटी आवाज़ भी विस्फोट बन जाती है. उसकी सारी इंद्रियाँ आँखों में केंद्रित हो गईं. सुनहले बालों वाला प्रेत दरवाज़े में खड़ा. चाँद ने बादल- किनारे से झांका, उसके चेहरे पर तृप्त उल्लास के रंग इतनी दूरी से दिख गए. कंधे पर दो परिचित हाथ दिखे, उसने छुए और नशीले कदमों से बाहर आ गया. दुबला-पतला. क्षण भर के लिए हैरान हुआ कि उसके लोहे से शरीर की तुलना में इस लड़के से पत्नी को कौन-सी तृप्ति मिलती है जो…. फिर अंदर बैठे अहेरी ने सावधान किया–वध का क्षण आ गया. तुम सोच रहे हो दूसरी बातें. आखेट पर सारी ताकतें केंद्रित करो. वध से पहले आत्मा से द्वंद्व में विजय प्राप्त करनी होती है. सड़क के पास खड़े पड़ों के पीछे-तेज़ चाल से अपने कुत्तों की तरफ़ बढ़ा. आखेट की रात उसके पैर बेआवाज़ हो जाते हैं.

मुखिया कुत्ते ने उसका आना सूँघ लिया. पता है हत्या का क्षण आ गया. ज़मीन कुरेदनी बंद की. लड़का रुका, जेब से प्लास्टिक की थैली निकाली, चुटकी भर कुछ खाया और झील से पानी पीने के लिए नीचे बैठा, उसी क्षण उसने मुखिया को आदेश दिया–किल्ल. मार डालो. मुखिया ने आज तक बहुत जानवर मारे हैं. पता है दो टाँगों वाला जानवर नहीं होता.

कहीं मालिक का आदेश गलत…. लहू की प्यास आदेश से जुड़ी और उसने लंबी छलाँग लगा दी. अँधेरे में लड़के ने कुछ उछलते देखा, पेड़ों के बीच भागा और हवा में फलाँगते कई और साए उसका रास्ता रोक खड़े हो गए. लड़के ने लंबी चीख मारी, पेड़ों पर बैठे परिंदों ने होने वाला हत्याकांड देखा. आर्तनाद किया, मुखिया कुत्ते ने उसकी छाती पर अगले पैर रखे, नुकीले दाँतों में उसकी श्वासनली पकड़ी, मुँह बंद किया, लड़के के साथ ज़मीन पर लुढ़क गया, अब कोई चीख निकलने का सवाल ही नहीं, क्योंकि उसकी श्वासनली कट चुकी है और ज़मीन पर गिरने के क्षण में वह मर चुका है. बाकी कुत्ते उसे घेर कर खड़े हो गए.

मुखिया ने मुँह खोला, गले में गहरा सुराख था. मारने के बाद मालिक की आज्ञा में रुका. इसे घर ले जाना है क्या? आदेश मिला खा जाओ? मुखिया ने भरे पेट की गुर्राहट की और बाकी कुत्तों को भी को ज़ोर की भूख लग गई. वे उस लड़के के अंग-अंग चबाना शुरू हो गए. हड्डियाँ कड़कने की आवाज़ें उभरीं ज़रूर लेकिन अँधेरे में चीखते परिंदों के शोर में दब गईं.

वह उस जगह गया जहाँ बैठ लड़के ने पानी पीया था. प्लास्टिक की थैली पड़ी थी. उसने चुटकी भर सफेद पाउडर खाया, झील का पानी पीया. यह जीवन की सबसे बड़ी भूल थी, क्योंकि उसी क्षण वह आखेट में बदल गया.

कुत्तों की तृप्त गुर्राहटें सुनीं, आपने पास बुलाया. कुत्ते उसके पास बैठे और जीभों से खून सने पंजे चाटने लगे. कुत्ते बहुत सफाई पसंद होते हैं. उसने आज्ञा दी घर जाओ. मुखिया ने उसकी जाँघ से थूथन रगड़ा, प्यार भरा धन्यवाद. घर की तरफ़ दौड़ने लगा, बाकी कुत्ते पीछे-पीछे. लड़के की खोपड़ी उठाई. कपड़ों में लपेटा और होटल के कमरे की तरफ़ दौड़ने लगा. रास्ते में बड़े गंदे नाले में खोपड़ी फेंक दी. पाइप के सहारे कमरे में पहुंचा. लेटने के बावजूद वह तैर रहा था, एक अंधेरी और तलहीन गुफा की तरफ़. अंतिम दृश्य आँखों में उगा–वायलिन बजाती बेटी.

अब उसका दुःस्वप्न टुकड़ों में बँट गया. वह दो दिन कमरे से बाहर ही नहीं निकला, फिर भी स्थान-स्थान पर यात्रा को जाता रहा, क्योंकि उसके पास था सफेद पाउडर! घर लौटा तो बेटी बाँह के झूले में झूली, चेहरे पर चिरपरिचित इंद्रधनुष. सुनहरे बालों वाले प्रेत का फोटो दिखा अता-पता पूछती पुलिस. वायलिन गुरु को बेटी ने बुलाने के लिए कहा. अब पत्नी उसे देखते ही किसी घिरे हुए जानवर सी दुबक जाती. उसके दिल में बिलकुल विश्वास था कि हत्या तो पति ने की है. कैसे बोले? कैसे बताए? उसके अंगों की आभा उड़ गई और एक हत्यारे के साथ रहने-सोने की इच्छा मर गई.

एक दिन उसकी लाश झील के पानी में मिली. वह अपनी माँ को अपने घर ले आया, बेटी उसके हवाले की और सफेद पाउडर उसे अपने घर से, अपने देश से बाहर ले आया. हो सकता है सात बरस बीत गए. किसी नशई ने इस देश का नाम बताया, जहाँ के परमात्मा शांति देते हैं, मुक्ति देंगे, जहाँ के वासी सबको सहज स्वीकार करते हैं. उनके पास अपने भगवान हैं जिनकी दया और कृपा में है एक अटूट और मूर्ख विश्वास.

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(स्वदेश दीपक की किताब बगूगोशे का यह अंश प्रकाशक जगरनॉट बुक्स की अनुमति से प्रकाशित)

 

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