सफलता का तोता: आपको एक जादुई तोते के बारे में बताऊंगा | Read Vivek Bhan Singh Jhala's story Safalta ka tota

सफलता का तोता: आपको एक जादुई तोते के बारे में बताऊंगा

वे बोले - "भाई ये तोते की बात कहां से आ गई बीच में, तुम्हारा ये घुमा फिरा के बात करना मुझे कभी हजम नहीं हुआ. खैर चलो कुछ खा पी लें, फिर स्टेज पर भी चलें. फिर दोनों परिवार इस शादी वाले मेले में चरने निकल पड़े जिसे अंग्रेजी में "बुफ़े" कहते हैं, और मेरे एक गांव के बुजुर्ग इसे कहते हैं "गिद्ध भोज".

By: | Updated: 14 Feb 2018 04:04 PM
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सफलता का तोता


विवेकभान सिंह झाला


safalta ka tota


जगजीवन बाबू "सेठ जी" अपने शहर "बाजनपुर" के जाने माने धनाढ्य सेठ थे, उनकी रईसी के चर्चे आस पास के पांच शहरों तक मशहूर थे. अपनी इकलौती बेटी की शादी में उन्होंने पूरे शहर को दावत दी, और दावत ऐसी कि किसी मेले में इतने स्टॉल नहीं होते खाने पीने के जितने उनकी शादी के समारोह में थे. एक तरफ पूरी चौपाटी - पाव भाजी, पानी पूरी, चाट, भेलपुरी और बर्फ गोले. एक तरफ पंजाबी ढाबा - छोले कुलचे, सरसों साग, पनीर टिक्के और लस्सी. एक तरफ साउथ इंडियन - मैसूर डोसा, उत्तपम, मेन्दुवड़ा, इडली और सांभर. एक तरफ बंगाली मिठाइयां तो एक तरफ दूध जलेबी वाला. एक तरफ गुजराती कड़ी ढोकला तो एक तरफ राजस्थानी दाल बाटी चूरमा. एक तरफ रबड़ी फलूदा तो एक तरफ फ्रूट चाट. एक तरफ गुड़िया के बाल वाला खड़ा था तो एक तरफ चना ज़ोर गरम.


ये सब स्टॉल पार करने के बाद चालू होता मुख्य भोजन वाला काउंटर, जहां सब्जी में मोहनगट्टे, पालक पनीर, मेथी मलाई, जल फ़्रेज़ी, आलू शिमला मिर्च और तीन तरह की दाल, पुलाव, दहीबड़े, तवा सब्जी, लच्छा परांठा, नान, तवा रोटी साथ में दस तरह के आचार, पापड़, सलाद, मीठे में काजू कतली, गुलाब जामुन, बादाम हलवा, पिस्ता चक्की, रसमलाई. खाने के बाद केरी पानी छाछ और मट्ठा और फिर वहां से दाएं हाथ मुड़ते ही आइसक्रीम का काउंटर - छह तरह की - अंजीर, सीताफल, काजुद्राक्ष, बटरस्कॉच, वैनिला और कसाटा.


और अंत में पान का स्टॉल - मीठा पान, आइस पान, धुएं वाला पान. बाकी और भी कई तरह की चीज़ें थीं लेकिन कोई भी पूरा न देख पाया. इतनी भीड़ थी कि लोगों के बच्चे हाथ से छूट के बिछड़ गए, कोई पानी लेने गया तो उसे वापस उसी जगह आने का रास्ता ही नहीं मिला. डीजे वाले बाबू से अनाउंसमेंट करा के ढूंढ़ना पड़ा लोगों को. अनाउंसमेंट ऐसे हो रहे थे - "गोपाल जी वर्मा साहब, आपका परिवार आइसक्रीम काउंटर के पास खड़ा है, आप जहां कहीं भी हों कृपया तुरंत पहुंचें."


उसी शाही शादी में "सेठ जी" की कंपनी में कार्यरत दो मेनैजर भी सपरिवार पहुंचे हुए थे. बृजकिशोर जी और मनोहर जी, दोनों बराबर के ओहदे पर थे और अच्छे दोस्त भी थे. मनोहर जी के हाथ में एक सस्ता 125 रुपए का फूलों का बेतरतीब सा गुच्छा था जिसे "बुके" कहा जाता है. मनोहर जी ने बृजकिशोर जी से पूछा, "तुम क्या लिफाफा दोगे?" बृज जी ने कोट की जेब से एक छोटी डब्बी निकाली जो सुंदर सी गिफ्ट पैक की हुई थी और बोले - "दूल्हा दुल्हन के लिए घड़ी का सेट लिया है. "


मनोहर जी हंसने लगे और बोले - "भाभीजी आपके साहब का भी जवाब नहीं, सूरज को चिराग दिखा रहे हैं? अरे भला सेठ जी को क्या कमी है, वो तो हमारे अन्नदाता हैं, उन्हें तोहफा देना मेरी नज़र में उचित नहीं. और उनकी बेटी जंवाई क्या इतनी सस्ती चीज़ें पहनेंगे भी, उनका तो इत्र भी विलायत से आता है. "


बृजकिशोर जी मुस्कराकर बोले - "कभी फुरसत में मिलना मनोहर जी आपको एक जादुई तोते के बारे में बताऊंगा. मुझे किसी बहुत सिद्ध पुरुष ने दिया था. और बोला था जब तक ये तोता तेरे पास है, तू जिंदगी में हमेशा निर्विघ्न आगे बढ़ता रहेगा."


मनोहर जी के कुछ समझ नहीं आया, सवाल क्या पूछा और जवाब क्या मिला. वे बोले - "भाई ये तोते की बात कहां से आ गई बीच में, तुम्हारा ये घुमा फिरा के बात करना मुझे कभी हजम नहीं हुआ. खैर चलो कुछ खा पी लें, फिर स्टेज पर भी चलें. फिर दोनों परिवार इस शादी वाले मेले में चरने निकल पड़े जिसे अंग्रेजी में "बुफ़े" कहते हैं, और मेरे एक गांव के बुजुर्ग इसे कहते हैं "गिद्ध भोज".


खा पीकर दोनों परिवार स्टेज पे गए, मनोहर जी ने दूल्हा दुल्हन को गुलदस्ता दिया और सेठजी को बधाई दी, बृज जी ने भी तोहफा दिया, और सेठ जी को शादी की बधाई दे कर बोले, "साहब पूरे शहर में बस एक ही चर्चा है, कि राजा महाराजाओं की शाही शादी भी इस शादी के आगे फ़ीकी है," सुन कर सेठजी के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आ गई, और उनका एक सोने का दांत बाहर चमकने लगा.


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(विवेकभान सिंह झाला की किताब का यह अंश प्रकाशक जगरनॉट बुक्स की अनुमति से प्रकाशित)

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