क्या आप भी गोरा होने के लिए इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं!

By: अनुराधा जैन, एबीपी न्यूज़ | Last Updated: Tuesday, 18 April 2017 2:52 PM
क्या आप भी गोरा होने के लिए इन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं!

नई दिल्लीः गोरेपन की क्रीम को लेकर काफी समय से बहस चल रही है. बॉलीवुड अभिनेता अभय देओल ने तो सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात कह दी. लेकिन इस पर एक बड़ी बहस छिड़ गई है. पर क्या आप जानना नहीं चाहेंगे इस समय बाजार में गोरेपन के लिए क्या–क्या  तरकीबें मौजूद हैं और उनके क्या क्या नुकसान हो सकते हैं. हमारी आज की विशेष रिपोर्ट इसी पर बेस्ड है.

फेयरनेस प्रोडक्ट–
बाजार में आज के समय में गोरा करने वाली क्रीम से लेकर ब्लीच, पाउडर, जेल और सीरम जैसी तमाम चीजें मौजूद हैं. लेकिन इनमें हाई कैमिकल्स होते हैं जो ना सिर्फ स्किन का नैचुरल लुक खत्म कर देते हैं बल्कि स्किन को डैमेज भी करते हैं. कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. महेश मंगल ने एबीपी न्यूज़ को बताया कि इन क्रीम्स को लंबे समय तक लगाने से स्किन पर रेडनेस आ जाती है. स्किन बहुत सेंसेटिव हो जाती है. कई मामलों में स्किन लूज भी लगती हैं.

डॉ. महेश आगे कहते हैं कि ब्लीचिंग क्रीम लगाने से स्किन तुरंत फेयर हो जाती है. दूसरी होती हैं मेलेनिन क्रीम. मार्केट में ये दो तरह के प्रोडक्ट ही होते हैं जिनको लगाने से इंस्टेंट फेयरनेस आती है. इनको जब तक आप लगाते रहेंगे तब तक आप फेयर लगेंगे. जब आप इन्हें  लगाना बंद करेंगे तो आप फिर पहले जैसे हो जाएंगे.

फेयरनेस ट्रीटमेंट-
फेयरनेस ट्रीटमेंट एक स्किन ट्रीटमेंट है जो ना सिर्फ स्किन टोन बूस्ट करता है बल्कि स्किन की ओवरऑल क्वालिटी भी बूस्ट करता है. इतना ही नहीं, टैनिंग को रिमूव कर तुरंत ग्लो पाने वाले भी कई तरह के फेयरनेस ट्रीटमेंट मौजूद हैं. इन टीट्रमेंट में एक-दो सप्ताह से लेकर 2-2 महीने तक लग जाते हैं. जो लोग परमानेंट फेयरनेस चाहते हैं उन्हें इस ट्रीटमेंट में दो-दो साल तक लग जाते हैं. स्किन को गोरा करने के लिए कई तरह के लेजर ट्रीटमेंट भी मौजूद हैं. वहीं इजेक्शंस के जरिए भी फेयरनेस लाई जाती है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट-
डॉ. महेश मंगल का कहना है कि लेजर ट्रीटमेंट फेयरनेस को नहीं बल्कि स्किन टोन को बूस्ट करता है. उनका कहना है कि हर तरह के ट्रीटमेंट का साइड इफेक्ट होता है क्योंकि सभी में कैमिकल्स का खूब इस्तेमाल होता है.
ये हमेशा खतरा बना रहता है कि बॉडी कब किस चीज के लिए रिएक्ट कर जाए. हां, ये कह सकते हैं कि इन ट्रीटमेंट और फेयरनेस क्रीम्स का कोई मेजर साइड इफेक्ट नहीं है.

ब्यूटी ट्रीटमेंट-
गोरा होने के लिए लोग ब्लीच, फेशियल, स्क्रबिंग, फेसपैक, मसाज और इसी तरह के कई ब्यूटी ट्रीटमेंट लेते हैं. बोटोक्स ट्रीटमेंट भी लोग स्किन टोन के लिए लेते हैं. कुछ लोग इन ट्रीटमेंट्स को रेगुलर बेसिस पर लेते हैं तो कुछ महीने में एकाध बार.

फेयरनेस पिल्स-
कम ही लोगों को पता होगा कि गोरा होने के लिए लोग पिल्स का भी इस्तेमाल करते हैं. ये पिल्स स्किन टाइप और कलर के हिसाब से एक से तीने महीने से लेकर एक साल तक खाई जाती हैं. इनके बॉडी में कई तरह के साइड इफेक्ट्स भी देखने को मिलते हैं.

कुछ अन्य साइड इफेक्ट्स-
इचिंग- फेयरनेस क्रीम्स के इस्तेमाल से स्किन पर इचिंग होनी शुरू हो जाती है. अगर आपको किसी भी क्रीम से स्किन पर इचिंग हो रही है तो तुरंत ठंडे पानी से त्वचा को धोएं.

एलर्जी- कई बार कैमिकल यूज होने के कारण फेयरनेस क्रीम्स से एलर्जी हो जाती है. इसमें स्किन पर रेडनेस, स्किन इरिटेशन और इचिंग होने लगती है. जब भी कोई क्रीम यूज करें ध्यान रहे कि वो एलर्जी रहित हो.

स्किन कैंसर- लंबे समय तक फेयरनेस क्रीम्स के इस्तेमाल से स्किन कैंसर भी हो सकता है. ऐसे में सिर्फ हाई क्वालिटी की क्रीम्स का ही इस्तेमाल करें. क्रीम्स में मौजूद कई तरह के कैमिकल्स से कैंसर होने की पूरी आशंका रहती है.

डार्क स्किन- अगर आप अपने लिए सही क्रीम का चुनाव नहीं कर पा रहे हैं तो आपकी स्किन ड्राई हो सकती है. कोई भी क्रीम खरीदने से पहले अपनी स्किन टाइप जान लें.

पिंपल्स – अगर आपकी क्रीम बहुत ज्यादा ऑयली है तो स्किन पोर्स बंद हो सकते हैं और पिंपल्स हो सकते हैं. इससे ना सिर्फ स्किन पर दाग-धब्बे हो सकते हैं.

फोटो सेंसिटिविटी‍- लंबे समय तक फेयरनेस क्रीम लगाने से स्किन सनलाइट में काफी सेंसिटिव हो सकती है. ऐसे में सन बर्न हो सकता है. पिगमेंटेशन और छाल पड़ सकते हैं.

याद रखें किसी भी चीज की अति आपकी स्किन को नुकसान पहुंचा सकती है.

First Published: Tuesday, 18 April 2017 2:31 PM

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