नौ से पांच की नौकरी के दिन पुराने, अब नए तरीकों का जमाना

By: | Last Updated: Friday, 6 October 2017 9:05 AM
Millennials Shouldn’t Depend on a 9-to-5 Job

नयी दिल्ली: एक समय था जब लोगों का सपना नौ से पांच की बढ़िया नौकरी हो तो जिंदगी की गुजर-बसर आराम से हो जाए. लेकिन समय बदला, नौकरी की इच्छा करने वालों का रुझान बदला और बाजार बदला जिसके चलते नौ से पांच की यह नौकरी करने का अंदाज भी बदल गया.

क्या कहती है रिसर्च-
अब लोग और कंपनियों दोनों ने ही काम करने-करवाने के नए तरीके इजाद कर लिये हैं. इनमें पार्ट-टाइम, फ्रीलांस, कॉन्ट्रैक्ट पर, अस्थायी तौर पर और स्वतंत्र कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने की ओर रुझान बढ़ रहा है. शोध संस्थान मैनपावर ग्रुप की एक रिसर्च ‘नेक्स्ट जेन वर्क’ में यह बात सामने आई है.

97% लोग पसंद करते हैं नए तरीके का काम-
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और मैक्सिको जैसे उभरते बाजारों में फ्रीलांस, कॉन्ट्रैक्ट और अस्थायी कर्मचारी के तौर पर काम करने को लेकर स्वीकार्यता बढ़ी है और करीब 97% लोग इसी प्रकार के काम करते हैं. यह अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों की तुलना में कहीं अधिक है.

हालांकि रिपोर्ट में जर्मनी, नीदरलैंड और जापान को नयी पीढ़ी के कामकाजी तरीकों (नेक्सट जेन वर्क) का सबसे प्रतिरोधी देश बताया गया है.

रिसर्च के नतीजे-
इस रिसर्च में 12 देशों के 9,500 लोग शामिल हुए. इनके अनुसार नयी पीढ़ी नौ से पांच की नौकरी के मुकाबले बैलेंस्ड और लचीलेपन वाली नौकरी को ज्यादा पसंद करती है.

भारत का वर्क कल्चर-
भारत में इस सर्वे के लिए 785 लोगों के नमूने का उपयोग किया गया. इसमें 85% से ज्यादा लोगों ने नयी पीढ़ी के कामकाजी तरीकों को अपनी पसंद बताया.

मैनपावर ग्रुप के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोनास प्राइसिंग ने कहा कि पिछले 10 से 15 सालों में नौकरी के अवसरों में वृद्धि भी गैर-पारंपरिक तरीके के रोजगारों में हुई है.

नोट: ये रिसर्च के दावे पर हैं. ABP न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें.

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Web Title: Millennials Shouldn’t Depend on a 9-to-5 Job
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