क्या महज स्टिंग के जरिए चलेगी आम आदमी पार्टी की सरकार?

By: | Last Updated: Thursday, 9 January 2014 6:12 AM

दिल्ली की केजरीवाल सरकार का नया पैंतरा बाज़ार में आया है. चुनाव प्रचार के वक्त घोषणा पत्र में केजरीवाल ने एलान किया था कि सरकार बनाने के दो दिन के अंदर ही एंटी करप्शन हेल्पलाइन की शुरुआत की जाएगी. हेल्पलाइन की शुरुआत तो हुई लेकिन एंटी करप्शन हेल्पलाइन की नहीं बल्कि स्टिंग हेल्प लाइन की.

 

दिल्ली में सरकार बनाने की घोषणा करने के बाद एक व्यक्ति केजरीवाल के दरबार में शिकायत लेकर पहुंचा था. उसके बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र के लिए उससे घूस मांगी जा रही थी. केजरीवाल ने उसको एक अनोखी सलाह दी, कहा कि घूस मांगने वाले अधिकारी से सेटिंग कर लो, कह दो कि मैं घूस दे दूंगा. फिर हमें बता देना, हम स्टिंग करके उसे रंगे हाथ पकड़ लेंगे.

 

किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि सरकार बनाने के बाद भ्रष्टाचार से निपटने के लिए केजरीवाल स्टिंग हेल्पलाइन ही खोल डालेंगे. अगर आप भ्रष्टाचार के शिकार हैं तो आपके लिए एक हेल्पलाईन है जो आपको स्टिंग करना सिखाएगी और आपको स्टिंग करके सबूत सरकार को सौंपना होगा, तब कार्रवाई होने की कुछ गुंजाइश है. लेकिन खास बात ये कि ये हेल्पलाइन आपकी शिकायत दर्ज नहीं करेगी और उस पर अपनी तरफ से तब तक कोई कार्रवाई नहीं करेगी जब तक आप स्टिंग करके सबूत नहीं सौंप देते.

 

ये तो कुछ ऐसा ही है कि राजा के पास कोई कातिल को पकड़ने की फरियाद लेकर पहुंचे और राजा उसे बंदूक देकर कहे कि खुद पकड़े लाओ कातिल को, मैं इंसाफ कर दूंगा.

 

खुद केजरीवाल का ये कहना है कि इस स्टिंग से आपसी सांठ गांठ से होने वाला भ्रष्टाचार तो नहीं रुक सकता, लेकिन लोगों के छोटे छोटे काम करने के लिए होने वाली जबरन वसूली रोकी जा सकेगी.

 

भ्रष्टाचार के बड़े मामलों में ज्यादातर तो आपसी सांठ गांठ से ही होते हैं. कोल ब्लॉक आवंटन घोटाला, कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला, 2जी घोटाला, किसी में भी न घूस लेने वाले ने शिकायत की, न देने वाले ने. फिर कैसे भ्रष्टाचार रोकेंगे केजरीवाल?

 

क्या स्टिंग ऑपरेशन से चलेगी सरकार

 

जब केजरीवाल कहते हैं कि हमारे पर विज़न नहीं है पर हमारी इंटेंशन सही है. सवाल ये है कि बिना विज़न ही उन्होंने दिल्ली की जनता के सारे दुख तकलीफें दूर कर देने के वादे कैसे कर दिए. “भ्रष्टाचार से निपटना है तो स्टिंग कीजिए” की सीख देकर केजरीवाल सरकार चलाने की सारी जिम्मेदारी खुद जनता के कंधों पर तो नहीं डाल रहे? देश के तमाम चैनल और खोजी पत्रकारिता की अलग अलग संस्थाएं स्टिंग ऑपरेशन करती रही है. मीडिया संस्थान बेहतर जानते हैं कि विश्वसनीय स्टिंग करने के लिए उन्हें क्या क्या करना पड़ता है. 10 कोशिशों में 1 किसी तरह कामयाब होती है. इसके लिए भी बहुत अनुभव की जरूरत होती है. इसलिए मेरे कुछ सवाल हैं.

 

 

क्या केजरीवाल चाहते हैं कि एक काम न होने से परेशान जनता क्या अपना सारा काम धंधा छोड़कर स्टिंग करने में ही लग जाए.

 

खोजी पत्रकारों को भी स्टिंग करते वक्त कई बार सुरक्षा खतरों से जूझना पड़ता है. कई बार उनके साथ मारपीट तक हो जाती है. जनता अगर खुद स्टिंग करेगी तो पकड़े जाने पर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?

 

दिल्ली का हर व्यक्ति अगर एक खोजी पत्रकार बन जाएगा, तो उनके द्वारा किए गए स्टिंग की विश्वसनीयता कैसे स्थापित होगी? कौन सा स्टिंग सही है, कौन सा गलत ये कैसे साबित होगा?

 

स्टिंग के ज़रिए किसी अधिकारी को ब्लैकमेल किया जाएगा या स्टिंग को गलत तरीके से गैर कानूनी काम कराने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा तो कौन जिम्मेदारी लेगा?

 

सबसे बड़ा सवाल ये कि अगर दिल्ली की जनता को ही सब करना है तो सरकार और पूरे तंत्र की जरूरत क्या है जिसको चलाने के लिए जनता टैक्स देती है.

 

अराजकता की नहीं व्यवस्था की जरूरत

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक ऐसी कारगर व्यवस्था तैयार करने की कोशिश करनी चाहिए जो भ्रष्टाचार से लड़ने में सक्षम हो और भ्रष्टाचार के पीड़ित लोगों की मदद करने में कारगर. चुनाव अभियान में उन्होंने वादा भी व्यवस्था परिवर्तन का किया था .

 

अगर हेल्पलाइन को कारगर बनाना है तो उस पर आने वाली शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई हो, प्राथमिक जांच कर निश्चित समय में एफआईआर दर्ज की जाए, जिस अधिकारी पर आरोप है उसे निलंबित किया जाए और मुकदमा चलाकर दंडित किया जाए. केजरीवाल अगर सिर्फ दिल्ली के लोगों की शिकायतों का ही अगर निपटारा नहीं कर पाए तो सोचिए उनके सपनों के जनलोकपाल का क्या होगा जिसके पास रोज़ देश भर से करोड़ों शिकायतें आएंगी. कैसे उनका निपटारा होगा?

 

सत्ता का विकेंद्रीकरण ठीक है, आम लोगों के हाथों में ताकत जरूर होनी चाहिए लेकिन एक व्यवस्था के तहत.

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Web Title: क्या महज स्टिंग के जरिए चलेगी आम आदमी पार्टी की सरकार?
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