...जब मिंयादाद ने तोड़ा था भारत का दिल

...जब मिंयादाद ने तोड़ा था भारत का दिल

By: | Updated: 18 Apr 2014 08:34 AM

नई दिल्लीः भारतीय क्रिकेट इतिहास और क्रिकेट प्रेमियों के लिए आज का दिन किसी भयवाह सपने से कम नहीं था. आज ही के दिन चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान ने भारत को हराया था. वैसे हार-जीत तो लगी रहती है लेकिन इस एक हार ने भारतीय टीम के साथ-साथ लाखों-करोड़ों फैंस को कई दिनों तक सपनों में सताया था.

 

ख्याल आज भी आता है तो लोग पाकिस्तान के बल्लेबाज जावेद मियांदाद को कोसने लगते हैं.

 

क्या था खास

भारत और पाकिस्तान के बीच आज के ही दिन 1986 में शारजाह के मैदान पर ऑस्ट्रेल-एशिया कप का फाइनल खेला गया था जिसमें आखिरी गेंद पर भारत को हार मिली थी.

 

इस मैच में पाकिस्तान कहीं से भी मैच जीतने की स्थिती में नहीं था. टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हूए भारत ने सुनील गावस्कर के 92 और श्रीकांत के 75 रनों की पारी की बदौलत 7 विकेट के नुकसान पर 245 रन बनाए.

 

लक्ष्य के जवाब में पाकिस्तान की टीम लगातार अंतराल पर विकेट गंवाती रही. अंतिम 10 ओवर में पाकिस्तान को जीतने के लिए 90 रन चाहिए थे. वहीं आखिरी ओवर में पाकिस्तान को 11 रनों की दरकार थी. इस एक ओवर ने भारत और पाकिस्तान क्रिकेट की सूरत ही बदल कर रख डाली. अंतिम ओवर लेकर आए चेतन शर्मा. शर्मा ने 50वें ओवर की पहली गेंद पर जुलकरनैन को क्लीन बोल्ड कर दिया.

 

11वें नंबर पर आए तौसिफ अहमद ने सिंगल लेकर जावेद मियांदाद को स्ट्राइक दी. आखिरी बॉल पर पाकिस्तान को जीत के लिए चाहिए थे चार रन. सभी गेंदबाजों ने शर्मा को टिप्स दिए, लेकिन चेतन शर्मा ने गेंद फुल टॉस फेंकी और उस फुल टॉस गेंद को मियांदाद ने सीमा रेखा के बाहर भेज दिया.

 

मैच के साथ ही पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेल-एशिया कप भी जीत लिया. इस जीत के बाद मियांदाद पाकिस्तान के लिए नेशनल हीरो बन गए. इस हार ने टीम इंडिया के मनोबल को ऐसा तोड़ा कि अगले एक दशक तक पाकिस्तान को हराने के लिए टीम इंडिया को संघर्ष करना पड़ता था.

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