जारी रहेगा ओलंपिक संघ पर प्रतिबंध

जारी रहेगा ओलंपिक संघ पर प्रतिबंध

By: | Updated: 05 Sep 2013 09:20 PM


नई
दिल्ली:
अंतर्राष्ट्रीय
ओलम्पिक समिति (आईओसी) ने
भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) के
खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए
उसका अनुरोध अस्वीकार कर
दिया तथा आईओए पर लगे
प्रतिबंध को जारी रखा है.

आईओए
ने आईओसी से आरोपित
अधिकारियों का कार्यकाल
जारी रखने और कार्यालय
संचालन में हिस्सा लेने की
इजाजत दिए जाने का अनुरोध
किया था, जिसे आईओसी ने ठुकरा
दिया.

इतना ही नहीं आईओसी
ने कहा है कि आईओए जब तक आईओसी
के सुझाए संशोधनों को
स्वीकार नहीं कर लेता तब तक
उस पर लगा प्रतिबंध नहीं
हटाया जाएगा.

आईओसी के इस
निर्णय के बाद देशभर में इसे
लेकर काफी हो-हल्ला मचा हुआ
है. खेल मंत्री जितेंद्र सिंह
सहित खेल से जुड़ी अनेक
हस्तियों ने भी आईओए को आईओसी
के सुझाए संशोधनों को
स्वीकार कर लेने की बात कही
है.

खेल मंत्री ने एक
समाचार चैनल से कहा, "आईओसी को
कुछ निश्चित प्रावधानों पर
आपत्ति है. मुख्य मुद्दा
नैतिकता एवं बेहतर प्रशासन
का है. अत: मुझे आशा है कि
बेहतर समझ प्रदर्शित की
जाएगी और आईओए, आईओसी के सभी
सुझावों को स्वीकार कर लेगा."

जितेंद्र
सिंह ने आगे कहा, "मुझे नहीं
लगता कि इन संशोधनों को
स्वीकार करने में किसी तरह की
परेशानी है, क्योंकि ये
ओलम्पिक घोषणापत्र का ही
हिस्सा हैं. आईओसी कोई नई बात
नहीं कह रहा."

मान्यताप्राप्त
आईओए के अध्यक्ष विजय कुमार
मल्होत्रा ने आईओए पर लगा
प्रतिबंध जारी रहने पर अफसोस
व्यक्त किया और आईओसी के इस
फैसले को भारतीय खेल के लिए
हानिकारक बताया.

मल्होत्रा
ने एक वक्तव्य में कहा, "आईओसी
द्वारा प्रतिबंध जारी रखने
का फैसला निश्चित ही भारतीय
खेल के लिए बाधक एवं देश की
प्रतिष्ठा को हानि पहुंचाने
वाला है."

मल्होत्रा ने
निलंबित आईओए के सभी
शेयरधारकों से इस समस्या से
निबटने के लिए एकजुट होने का
आग्रह किया.

उन्होंने आगे
कहा, "अगर यह नियम सभी देशों के
लिए है, तो निश्चय ही हमें भी
इसका पालन करना होगा."

ओलम्पिक
पदक विजेता एथलीट सुशील
कुमार ने भी कहा है कि आईओए को
आईओसी के सभी नियम एवं शर्तो
को मान लेना चाहिए.

सुशील
कुमार ने कहा कि भारतीय
खिलाड़ियों की भलाई के लिए
भारतीय खेल संघों एवं आईएओ की
प्रशासनिक गतिविधियों से
आरोपित अधिकारियों को दूर
रखना चाहिए.

ओलम्पिक-2008
में कांस्य पदक तथा
ओलम्पिक-2012 में रजत पदक जीतने
वाले सुशील कुमार ने सवालिया
लहजे में कहा, "अगर पूरी
दुनिया आईओसी के नियमों को
मानती है, तो हम क्यों नहीं?
आरोपित अधिकारियों को खेल
प्रशासन से दूर रखने में आखिर
नुकसान क्या है?"

सुशील ने
आगे कहा, "हम जहां भी खेलने
जाते हैं, हम भारत का ही
प्रतिनिधित्व करते हैं. यह
हमारे लिए गर्व की बात है.
तिरंगे का हमारे लिए बहुत
बड़ा महत्व है. लेकिन वर्तमान
परिस्थितियों में हम तिरंगे
के तले नहीं खेल सकते, और न ही
पदक जीतने पर हमारे देश का
राष्ट्रगान ही बजाया जाएगा."

आईओसी
के कार्यमंडल की बुधवार को
ब्यूनस आयर्स में हुई बैठक
में लिए गए निर्णय के अनुसार,
आईओए आरोपित अधिकारियों को
हटाने के लिए अपने संविधान
में जब तक संशोधन नहीं करता
है तब तक उस पर लगा प्रतिबंध
नहीं हटाया जा सकता.

आईओसी
के कार्यमंडल की बुधवार को
ब्यूनस आयर्स में हुई बैठक के
बाद आईओसी ने वक्तव्य जारी कर
कहा, "आईओसी के कार्यमंडल को
मिली रिपोर्ट के अनुसार, आईओए
की महासभा ने आईओसी द्वारा
आईओए के संविधान में सुझाए गए
अधिकांश संशोधनों को मंजूरी
दे दी है, लेकिन एक विशेष
संशोधन को स्वीकार नहीं किया
गया है."

वक्तव्य में आगे
कहा गया है, "सदस्यों की
योग्यता वाला यह प्रावधान
ओलम्पिक संघों में बेहतर
प्रशासन स्थापित करने के लिए
बेहद अहम है, तथा निलंबित
आईओए को अगले चुनाव से पहले
पूरी तरह स्वीकार किया जाना
जरूरी है."

आईओए ने हाल ही
में विशेष आमसभा बुलाकर
आईओसी के उस सुझाव को मानने
से इनकार कर दिया था, जिसमें
आईओसी ने आरोपित अधिकारियों
को आईओए में किसी पद पर बने
रहने पर रोक लगाने की बात कही
है. आईओए ने इसके बदले सुझाव
दिया है कि सिर्फ दोषी
व्यक्तियों को आईओए के
प्रशासन से दूर रखा जाए.

इस
मुद्दे पर गतिरोध खत्म करने
के लिए आईओसी जल्द ही आईओए को
नोटिस भेज सकती है.




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