''टीम इंडिया के लिए खेलते वक्त सोचता था की ये मेरा लास्ट चांस हैं'

By: | Last Updated: Saturday, 8 March 2014 3:55 PM
”टीम इंडिया के लिए खेलते वक्त सोचता था की ये मेरा लास्ट चांस हैं’

नई दिल्ली: भारतीय बल्लेबाज सुरेश रैना हमेशा ही भारतीय टीम का एक अभिन्न हिस्सा रहे है. अपने बैट ,बॉल के जरिए सुरेश ने हमेशा ही टीम इंडिया का साथ दिया है. ABP News को दिए एक इंटरव्यू में सुरेश रैना ने अपने आलोचनाओं, जो गलतियां उन्होनें की  और किस तरह गांगुली ने उनकी मदद की एक बेहतर बल्लेबाज बनने में इन सब के बारे में बात की.

 

# सवाल- आपने पिछले एक महीने में इंटरनेशनल क्रिकेट से क्या सीखा.

मैंने लंबे समय तक पिच पर टिक कर खेलने की तरफ काम किया हैं. मैनें महसूस किया कि मुझे सोचसमझ कर रन बनाने की जरूरत है. मैंने अपने पुराने वीडियो देखे और उन्हे देख कर मेरा आत्मविश्वास काफी बढा इन वीडियो से मुझे मेरी गलतियों का पता चला. वर्चुअली क्रिकेट खेलते हुए मुझे 7-8 साल हो गये. मैने कभी ब्रेक नही लिया और अब मुझे मेरी इच्छा के बिना ब्रेक दिया गया है. एक क्रिकेटर के तौर पर मै कभी नही चाहुंगा की मुझे ड्रॉप किया जाए. लेकिन फिर भी मैं इस टाइम को फैमिली के साथ बिता रहा हूं. अपनी मां के साथ समय बिता रहा हूं और खुद को टीम इंडिया में वापसी के लिए भी तैयार कर रहा हूं मैं विजय हजारे ट्राफी खेला और ट्वेंटी 20 विश्व कप से पहले कुछ अच्छा अभ्यास मिला.मैं अब रनों का भूखा हूं और मुझे पूरी उम्मीद है कि मै आने वाले टी20 का हिस्सा बनूंगा.

 

# सवाल- बाये हाथ के बल्लेबाज आप और सौरभ गांगूली दोनो ही को ही शॉर्ट बॉल फेस करने में दिक्कत होती है. सौरभ गांगुली को भी टीम से निकाला गया पर उन्होंने टीम में  शानदार वापसी की. आपकी और सौरभ की कहानी काफी मिलती-जुलती है तो क्या आपने कभी गांगुली को अप्रोच किया?

जब आप अपने करियर में नीचे आते हो तो आपको एहसास होता है कि कौन आपकी मदद के लिए तैयार है, कौन आपका अच्छा दोस्त है, और कौन आपको गाइड कर सकता है. सौरभ ऐसे ही इंसान है. मैने उनसे मदद मांगी और वो भी मेरी मदद के लिए उत्साहित दिखे. उन्होने मुझे बताया की मुझे अपने फुटवर्क पर काम करने की जरुरत है.सौरभ एक बहुत अच्छे कोच है साथ ही उन्होने मेरा मनोबल बहुत बढ़ाया है. हमारा बैटिंग स्टाइल भी काफी मिलता जुलता है और हमने शॉर्टबॉल, फुटवर्क और मेरे कमबैक पर चर्चा की. दादा ने मुझे खुद पुर विश्वास करना सिखाया  और उन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देना सिखाया जिसे मैं नज़रअंदाज  कर दिया करता था.

 

# सवाल- आपकी बैटिंग में कहां पर गलत हुई?

मैने जो भी न्यूज चैनल देखा और पेपर पढ़ा सभी ने मेरे खराब फॉर्म की ही चर्चा की थी. सभी जगह ये ही बहस थी कि मैनें पिछले 25 वन-डे मैचों में एक भी अर्धशतक नही बनाया और मेरा एवरेज कितना रहा किसी निश्चित फॉर्मेट में. ऐसे लगता है कि ये लोगों नंबर और सेटैटिस्टिक की भावना से ग्रस्त हैं पर ये बात किसी भी क्रिकेटर के लिए बहुत ही दुख की होती. जब आप किसी प्लेयर की परफॉमेंस को सिर्फ आकड़ों में आंकते है. मैनें बहुत से कठिन मैचों में भी 35 रन देकर अहम भूमिका निभाई. ये बहुत मुश्किल होता है जब आप लक्ष्य का पीछा हाई प्रेशर गेम में करते हैं. केवल धोनी और माइक हसी ही ऐसे खिलाड़ी है जिनका गिरते क्रम में भी एवरेज अच्छा रहा है.

 

# सवाल-नॉन स्टॉप क्रिकेट खेलते हुए, ज्यादा रन बनाने का दबाव आप पर पड़ा?

पहले मैं फिल्ड में ये सोचकर जाता था कि मुझे बेहतर करना है. ये मेरा बल्लेबाजी का अंतिम मौका है, ये मेरे लिए रन बनाने का अंतिम मौका है और ये धारणा मुझे नर्वस बना देती थी और मैं अकसर गलतियां कर बैठता था.

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