'टेस्ट को बचाना है तो ज्यादा टेस्ट खेलना होगा'

By: | Last Updated: Saturday, 15 March 2014 8:34 AM

मुंबई: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे जयादा टेस्ट मैच खेलने वाले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने टेस्ट मैच को बचाने के लिए ज्यादा टेस्ट खेलने की सलाह दी है. सचिन ने आईसीसी को सुझाव दिया कि अगर पारंपरिक प्रारूप को बचाये रखना है तो उसे ज्यादा से ज्यादा टेस्ट मैच आयोजित करना चाहिए.

 

उन्होंने साथ ही टेस्ट मैचों में मिल रहे परिणाम को लेकर ट्वेंटी20 को श्रेय देते हुए कहा कि पांच दिवसीय मैच इसकी वजह से ही इन दिनों परिणाम देने वाले हो गये हैं.

 

तेंदुलकर को कल यहां पीढ़ी के क्रिकेटर चुना गया था, उन्होंने पुरस्कार कार्यक्रम में ईएसपीएनक्रिकइंफो से कहा, ‘‘आईसीसी को इसका ध्यान रखना चाहिए और अगर वे चाहते हैं कि टेस्ट क्रिकेट बना रहे तो उन्हें ज्यादा से ज्यादा टेस्ट मैच आयोजित करने चाहिए. मैं अब भी मानता हूं कि टेस्ट क्रिकेट सही हाथों में है, खिलाड़ी अविश्वसनीय क्रिकेट खेल रहे हैं. ’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप पूरी दुनिया में देखो तो ज्यादातर टेस्ट मैच में परिणाम मिल रहे हैं और बहुत कम ही टेस्ट मैच ऐसे होते हैं जो अब ड्रा हो रहे हैं और यह टी20 के शुरू होने से ही हुआ है. यह एक दूसरे के पूरक हो रहे हैं. ’’ तेंदुलकर ने कहा कि क्रिकेट शुरू करने वाले खिलाड़ियों के लिये टी20 आदर्श प्रारूप है लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि उन पर टेस्ट क्रिकेट थोपना नहीं चाहिए.

 

उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लेग क्रिकेट खेलें तो इसके लिये टी20 आदर्श प्रारूप है. इसके बाद धीरे धीरे उन्हें वनडे क्रिकेट और टेस्ट क्रिकेट की ओर बढ़ना चाहिए.

 

तेंदुलकर ने कहा, ‘‘आप किसी को भी टेस्ट क्रिकेट पंसद करने के लिये बाध्य नहीं कर सकते या किसी को टेस्ट क्रिकेट के प्रति जुनूनी बनने के लिये बाध्य नहीं कर सकते. यह अंदर से ही होता है. अगर किसी के साथ ऐसा नहीं होता है तो आपको उसे बाध्य नहीं करना चाहिए, उसे वनडे या टी20 क्रिकेट खेलने के लिये छोड़ देना चाहिए. जो खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट के प्रति जुनूनी हैं, उन्हें टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहिए. ’’ लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि एक खिलाड़ी के लिये टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित करने से ज्यादा चुनौतीपूर्ण कुछ भी नहीं है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक विकेट झटकाने और रन जुटाने की बात है तो टेस्ट क्रिकेट ही अंतिम चुनौती है. यह ऐसा प्रारूप होता है जिसमें गेंदबाज आपको आउट करने के लिये लगातार कोशिश करते रहते हैं. ’’ तेंदुलकर ने कहा, ‘‘टेस्ट में आपको रणनीति और इसके कार्यान्वयन की जरूरत होती है. यह टी20 क्रिकेट की तरह नहीं होता. आप तीन गेंद खेलकर नायक की तरह पवेलियन नहीं लोट सकते. ऐसा किसी अन्य प्रारूप में नहीं होता. ’’ उनका मानना है कि नये नियमों के साथ टी20 क्रिकेट ने वनडे प्रारूप को भी प्रभावित किया है.

 

तेंदुलकर ने कहा, ‘‘पहले 260 रन का स्कोर वनडे में काफी अच्छा हुआ करता था. 1992 विश्व कप में या 1996 विश्व कप में, ज्यादा स्कोर नहीं बने थे. अब आप लगातार 300 से ज्यादा रन का स्कोर देखते रहते हो. यही बदलाव है जो नियमों में बदलाव और टी20 क्रिकेट की वजह से हुआ है. ’’ उन्होंने कहा, ‘‘बल्लेबाज ज्यादा जोखिम उठाने के लिये तैयार रहते हैं. बल्लेबाज अब नये तरह के शाट खेल रहे हैं और गेंदबाज अपनी गेंदबाजी में ज्यादा वैरिएशन ला रहे हैं. ’’ तेंदुलकर ने कहा, ‘‘90 के दशक में मुझे नहीं लगता किसी गेंदबाज ने धीमी बाउंसर फेंकी होगी, जैसी शान पोलाक अपने करियर के अंतिम चरण में फेंकते थे. अब टी20 में यह नियमित वैरिएशन हो गयी है. ’’

Sports News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: ‘टेस्ट को बचाना है तो ज्यादा टेस्ट खेलना होगा’
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017