तेंदुलकर को टीम से विश्व कप 2015 में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद

By: | Last Updated: Friday, 14 March 2014 1:50 PM

मुंबई: पिछले साल संन्यास लेने वाले सचिन तेंदुलकर का मानना है कि हाल में खराब प्रदर्शन करने वाली भारतीय टीम अगले साल होने वाले विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन करके अपने खिताब का बचाव कर सकती है और वह चाहते हैं कि प्रशंसक दिल से टीम का समर्थन करें.

 

इस दिग्गज क्रिकेटर ने यहां कहा, ‘‘मुझे यह कहने में कोई झिझक नहीं कि हमारे पास प्रतिभाशाली टीम है और टीम में कुछ विशिष्ट खिलाड़ी हैं. मैं जानता हूं कि वे अनुकूल परिणाम नहीं दे पाये या लोगों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरे लेकिन समय बदल सकता है. ’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘यह समय है जबकि टीम को समर्थन की जरूरत है. जब आप जीत रहे होते हो तो आप की मनोस्थिति अच्छी होती है लेकिन जब आप नहीं जीत रहे होते हो लेकिन जानते हो कि आपको एक अरब लोगों का समर्थन हासिल है तो फिर मनोदशा बदलने में देर नहीं लगती. इस समय इसकी जरूरत है.’’

 

विश्व कप अगले साल फरवरी मार्च में आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में खेला जाएगा. तेंदुलकर ने अपनी आकृति, नाम और हस्ताक्षर वाले चांदी के विशेष सिक्कों को जारी करने के अवसर पर कहा, ‘‘मुझे अपनी टीम पर पूरा विश्वास है. मुझे पूरा विश्वास है हमारा अच्छा समय आएगा. ’’ भारतीय टीम ने हालांकि दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड से एकदिवसीय श्रृंखला गंवायी और एशिया कप में वह फाइनल के लिये क्वालीफाई करने में नाकाम रही.

 

महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में 2011 की विश्व चैंपियन टीम का हिस्सा रहे तेंदुलकर ने याद किया कि 2003 के विश्व कप से पहले भी भारतीय टीम जूझ रही थी लेकिन आखिर में दक्षिण अफ्रीका में खेले गये टूर्नामेंट में उप विजेता रही.

 

तेंदुलकर ने कहा कि जब वह टीम के सीनियर खिलाड़ी बन गये थे तब उनका युवा साथियों के साथ अच्छा रिश्ता था. उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन्हें मजाक में कहता था कि आप लोगों को मुझे गुडमार्निंग सर कहना चाहिए. हमारे बहुत अच्छे रिश्ते थे. वे सभी मुझे बड़ा भाई जैसा मानते थे. यह कभी एकतरफा रिश्ता नहीं रहा. मैं उनसे कहता था कि वे मेरे साथ भी मजाक कर सकते हैं. मैं उनकी टांग खींचता था और उन्हें मेरी मजाक उड़ाने की आजादी थी. मैंने सभी युवा खिलाड़ियों के साथ खेलने का पूरा लुत्फ उठाया. ’’

 

शतकों का शतक बनाने वाले तेंदुलकर ने स्वीकार किया लंबे इंतजार और हर तरफ से दबाव बनने के कारण आखिरी शतक काफी मुश्किल रहा. उन्होंने कहा, ‘‘पहले शतक के लिये कोई अपेक्षा नहीं थी और लोगों ने मेरी बल्लेबाजी का लुत्फ उठाया था. यहां तक कि मैं भी नहीं जानता था कि इसके बाद मैं 99 शतक और लगाउंगा. जब मैंने 100वां शतक लगाया तो निश्चित तौर पर इसमें कुछ समय लगा. ’’

 

तेंदुलकर ने कहा, ‘‘कई बार मैं शतक के करीब पहुंचा तथा यह जानते हुए भी कि मैं 99 शतक लगा चुका हूं, कई लेख लिखे गये कि मुझे ये करना चाहिए, मुझे वो करना चाहिए. इसलिए दोनों शतक ही महत्वपूर्ण थे. सौवां शतक लगाने का दबाव सौ गुना ज्यादा था. ’’

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