द. अफ्रीका के हाथों 3-1 से हारी भारतीय महिला हॉकी टीम

द. अफ्रीका के हाथों 3-1 से हारी भारतीय महिला हॉकी टीम

By: | Updated: 25 Feb 2012 11:40 AM


नई
दिल्ली:
साल 1980 के बाद पहली
बार ओलम्पिक खेलने का भारतीय
महिला टीम का सपना फिलहाल
अधूरा रह गया है.




दक्षिण अफ्रीका ने शनिवार को
नेशनल स्टेडियम में खेले गए
खिताबी मुकाबले में भारत को 3-1
से हराकर न सिर्फ 'हीरो
एफआईएच रोड टू लंदन
टूर्नामेंट' का खिताब जीता,
बल्कि लंदन ओलम्पिक में
हिस्सा लेने का अधिकार भी
हासिल किया.

भारतीय टीम ने
'करो या मरो' के मैच में इटली
को हराकर फाइनल में जगह बनाकर
ओलम्पिक खेलने की उम्मीद
जगाई थी, लेकिन खिताबी जीत
उसके लिए टेढ़ी खीर लग रही थी
क्योंकि दक्षिण अफ्रीकी टीम
इस खिताब के लिए और भी
कृतसंकल्प नजर आ रही थी.

इसी
का नतीजा था कि दक्षिण
अफ्रीकी टीम ने तीसरे मिनट
में ही शेली रसेल के गोल के
माध्यम से 1-0 की बढ़त बना ली.
कमजोर खेल और तालमेल की कमी
के चलते भारतीय टीम की हर
कोशिश नाकाम हो रही थी.

दक्षिण
अफ्रीकी रक्षापंक्ति ने
सटीक रणनीति के तहत हर मौके
पर 25 मीटर की दूरी पर ही
भारतीय प्रयास को नाकाम कर
दिया. 10वें मिनट में भारत को
पहला पेनाल्टी कॉर्नर मिला,
जिसका वह फायदा नहीं उठा सकी.

इसके
बाद 29वें मिनट में हासिल
पेनाल्टी कॉर्नर पर कोएत्जी
ने गोल करके अपनी टीम को 2-0 से
आगे कर दिया.

मध्यांतर तक
यही स्कोर रहा. 43वें मिनट में
अनुराधा देवी को गोल करने का
एक अच्छा मौका मिला, लेकिन वह
आमने-सामने के मुकाबले में
दक्षिण अफ्रीकी गोलकीपर
मेरिटी रिक्स को छका नहीं
सकीं.

53वें मिनट में
भारतीय डिफेंडरों की गलती के
कारण दक्षिण अफ्रीका ने एक और
गोल कर दिया. इसके बाद मानो
भारतीय अग्रिमपंक्ति की
नींद खुली. 56वें मिनट में
हासिल पेनाल्टी कार्नर पर
भारत की जसप्रीत कौर ने गोल
कर स्कोर 3-1 किया, लेकिन तब तक
मजबूती के साथ अपने गोलपोस्ट
की रक्षा कर रही दक्षिण
अफ्रीकी टीम को हराने का मौका
भारत के साथ से निकल चुका था.

भारत
ने 1980 में पहली और आखिरी बार
ओलम्पिक में हिस्सा लिया था.
मॉस्को ओलम्पिक से कई देशों
के बहिष्कार के बाद भारत को
ओलम्पिक में हिस्सा लेने के
लिए बुलाया गया था. उससे पहले
या उसके बाद टीम ने कभी
ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई
नहीं किया.

दक्षिण
अफ्रीकी टीम सिडनी ओलम्पिक
(2000) से लगातार क्वालीफाई कर
रही है. वह एथेंस ओलम्पिक (2004)
और बीजिंग ओलम्पिक (2008) में भी
खेलने में सफल रही. यह अलग बात
है कि बीजिंग में वह 12 टीमों
की तालिका में 11वें स्थान पर
रही थी.




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