ब्लॉग: जान पर भारी ठुमकों का समाजवाद!

By: | Last Updated: Thursday, 9 January 2014 1:59 PM
ब्लॉग: जान पर भारी ठुमकों का समाजवाद!

देश के किसी भी हिस्से में जाकर पूछ लीजिए… शायद ही कोई ऐसा मिले जो सैफई का नाम ना जानता हो. अब सैफई सिर्फ इटावा का एक गांव नहीं है सैफई तो वो जगह है जहां माधुरी दीक्षित और सलमान खान जैसे अभिनेता नाच दिखाने जाते हैं.. जनता का मनोरंजन करने जाते हैं… उन्हें पैसे मिले और वो नाचने गए इसमें कौन सी बड़ी बात है.. बात तो उत्तरप्रदेश की सरकार में है जिसने मुलायम सिंह यादव के पैतृक गांव में बड़े-बड़े सितारों के ठुमके लगवा दिए.

 

यही तो है समाजवादी पार्टी का समाजवाद…जिसने सैफई गांव में चार्टर्ड प्लेन से सितारों को बुलवा लिया. तो क्या हुआ सारा समाजवाद सैफई में ही सिमट कर रह गया है तो क्या हुआ कि सैफई प्रेम के लिए सरकार करोड़ों रुपए बहा रही है तो क्या हुआ कि सैफई में चल रही मौज के आगे अखिलेश सरकार को ठंड से मरते हुए बच्चे भी दिखाई नहीं दे रहे.

 

अखिलेश यादव माधुरी के घाघरे पर इस कदर फिदा हैं कि हाड़ कंपा देने वाली सर्दी में तंबू में रह रहे लोगों की तकलीफ नहीं दिखाई दे रही. मुजफ्फरनगर के हजारों दंगा पीड़ित इस ठंड में भी तंबू में रहने पर मजबूर हैं.. दर्जनों बच्चों की मौत हो चुकी है लेकिन उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार अपने पूरे परिवार और राजनीतिक कुनबे के साथ ठुमके देखने में व्यस्त रही. 

 

वैसे तो समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव किसी भी मुद्दे पर.. देश की संसद से लेकर सड़क तक समाजवाद और लोहिया के आदर्शों का हवाला देना नहीं भूलते.. लेकिन लगता है कि 14 दिन तक चलने वाले सैफई महोत्सव के दौरान वो समाजवाद के आदर्शों की पोटली बनाकर लखनऊ में ही छोड़ आए थे और समय-समय पर वो सुविधा और जरूरत के मुताबिक पोटली को खोलकर आदर्शों का चोला ओढ़ लेते हैं. समाजवादी पार्टी की सरकार बनाने से पहले तो अखिलेश यादव गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं पूछ रहे थे.. जमीन से जुड़े नेता होने की छवि पेश कर रहे थे लेकिन अब हर दिन मौत से लड़ते लोग भी दिखाई नहीं दे रहे. मानो उत्तरप्रदेश अंधेर नगरी बन गई है और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चौपट राजा का किरदार निभा रहे हैं.

 

सैफई महोत्सव की कहानी भी सुन लीजिए. मुलायम सिंह यादव अपने दिवंगत भतीजे रनवीर सिंह की याद में हर साल सैफई महोत्सव का आयोजन करवाते हैं… मुलायम सिंह यादव से एक सवाल है कि दिवंगत भतीजे की याद में सलमान और माधुरी के डांस की बजाय अगर वो उत्तर प्रदेश में ठंड से मर रहे लोगों के लिए कुछ करते तो आलोचना की जगह दुआएं मिलती. सैफई महोसत्व पर 16 करोड़ के खर्च की खबरें सामने आ रही हैं.. ये 16 करोड़ किसके हैं… जनता के. लेकिन जनता को दरकिनार करके इन पैसों से फाइव स्टार स्टेज तैयार किया गया. एक आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक सैफई महोत्सव की तैयारियों के लिए अखिलेश यादव ने 51 बार इलाके का दौरा किया था. अब आप ही अंदाजा लगाइए कि सैफई के समारोह को लेकर अखिलेश कितने संजीदा रहे होंगे कि उत्तर प्रदेश के तमाम कामों से 51 बार वक्त निकालकर सैफई आए होंगे. 

 

लोहिया होते तो मुलायम सिंह यादव का ऐसा समाजवाद देखकर उनकी आंखों से आंसू निकल आते. इतना ही नहीं स्टडी टूअर के नाम पर उत्तर प्रदेश सरकार के आठ मंत्री सत्रह दिनों के विदेश दौरे पर गए हैं.. ये मंत्री तुर्की, नीदरलैंड, ब्रिटेन, ग्रीस और अरब में संसदीय प्रणाली सीखने गए हैं.. इनमें सबसे बड़ा नाम है उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री आजम खान का. जिनके कंधों पर मुजफ्फरनगर की जिम्मेदारी डाली गई है. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी जाना था लेकिन वो शायद माधुरी का नाच देखने के लिए रुक गये. 

 

हर तरफ से समाजवादी पार्टी की आलोचना हो रही है लेकिन क्या फर्क पड़ता है.. वो कहते हैं ना अपना काम बनता तो भाड़ में जाए जनता.. यही हाल अखिलेश सरकार का है.

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