भारत में कई ऐसे कोच हैं जो विदेशी कोचों से बेहतर हैं: वेंकटेश

By: | Last Updated: Monday, 14 April 2014 1:27 PM
भारत में कई ऐसे कोच हैं जो विदेशी कोचों से बेहतर हैं: वेंकटेश

मुंबई: पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद ने इंडियन प्रीमियर लीग में और अधिक भारतीय कोच रखने की वकालत करते हुए कहा कि भारतीय किसी से कम नहीं हैं.

 

आठ आईपीएल टीमों में से सिर्फ एक किंग्स इलेवन पंजाब के पास संजय बांगड़ के रूप में भारतीय कोच है.

 

प्रसाद ने कहा, ‘यह इंडियन प्रीमियर लीग है. विदेशी कोचों, विदेशी खिलाड़ियों का मिश्रण होना अच्छा है क्योंकि निश्चित तौर पर खेल की आपकी समझ में सुधार होगा लेकिन ऐसा नही है कि सभी विदेशी जानकार हैं.’

 

उत्तर प्रदेश को सैयद मुश्ताक अली ट्वेंटी20 टूर्नामेंट में फाइनल में पहुंचाने वाले इस 44 वर्षीय कोच ने कहा, ‘कृपा करके ऐसा मत समझिए. मुझे लगता है कि यह ऐसी चीज है जिसे लोगों को समझने की जरूरत है.’

 

भारत की ओर से 33 टेस्ट और 161 वनडे खेलने वाले प्रसाद ने कहा, ‘मैंने कई ऐसे खिलाड़ी देखे हैं जो विदेशी खिलाड़ियों से बेहतर हैं. भारत में कई सारे ऐसे कोच हैं जो आईपीएल ढांचे में शामिल विदेशी कोचों से बेहतर हैं.’

 

अतीत में रायल चैलेंजर्स बेंगलूर और चेन्नई सुपरकिंग्स के साथ गेंदबाजी कोच के रूप में जुड़े रहे प्रसाद इस साल किसी आईपीएल फ्रेंचाइजी का हिस्सा नहीं हैं और उन्होंने इसे निराशाजनक करार दिया.

 

उन्होंने कहा, ‘यह इस तरह से निराशाजनक है कि मुझे लगता है कि प्रत्येक फ्रेंचाइजी को अपने टीम प्रबंधन में भारतीय कोचों को रखने की जरूरत है. इसका सीधा साथ कारण यह है कि सिर्फ चार विदेशी खिलाड़ी अंतिम एकादश में खेल सकते हैं और बाकी सात खिलाड़ी भारतीय हैं.’

 

प्रसाद ने कहा कि आईपीएल टीम को कोचिंग देना बड़ी चुनौती है क्योंकि सब कुछ नतीजा देने पर निर्भर करता है.

 

उन्होंने कहा, ‘यह काफी शानदार चुनौती है क्योंकि यहां सिर्फ आपकी उपलब्धियों और आपने टीम को नतीजा दिया उसे देखा जाता है. यह मायने नहीं रखता कि आप टीम को क्या योगदान दे रहे हो. असल में यह दुखद है.’

 

प्रसाद ने कहा, ‘फ्रेंचाइजी मालिकों या अन्य लोगों को सिर्फ नतीजों को नहीं देखना चाहिए. उन्हें खिलाड़ियों के विकास पर भी ध्यान देना चाहिए. प्रबंधन से जुड़े लोग या कोचिंग स्टाफ ऐसा कर रहा है या नहीं, यह भी काफी महत्वपूर्ण है. लेकिन अधिकतर फ्रेंचाइजियों के साथ ऐसा नहीं है. मैं ऐसा कह सकता हूं क्योंकि वे सिर्फ नतीजे देखती हैं.’

 

सवाल है कि क्या आईपीएल में भारतीयों की अनदेखी हो रही है.

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