मेरा मुकाबला अश्विन से नहीं खुद से है: हरभजन

By: | Last Updated: Thursday, 6 March 2014 9:40 AM

नई दिल्ली: पिछले एक साल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहने वाले भारत के ऑफ स्पिन हरभजन सिंह का मुकाबला किसी दूसरे गेंदबाज से नहीं सिर्फ खुद से है. हरभजन की जगह टीम के स्थाई गेंदबाज बनने वाले रविचंद्रन अश्विन का हाल के दिनों में विदेशों में प्रदर्शन खराब रहा है ऐसे में भज्जी की राष्ट्रीय टीम में वापसी की संभावना बढ़ गयी है. लेकिन इस अनुभवी ऑफ स्पिनर ने कहा कि भारतीय टीम में जगह के लिये उनका तमिलनाडु के इस स्पिनर के साथ मुकाबला नहीं है.

 

अपनी वापसी पर हरभजन ने कहा, ‘‘पिछले कई वर्षों से मेरा केवल एक से प्रतिस्पर्धा है और वह स्वयं मैं हूं. मुझे कभी किसी से (अश्विन) प्रतिस्पर्धा पसंद नहीं रही और ऐसा वर्षों से चला आ रहा है. अंतरराष्ट्रीय खेलों में आपको अकेले आगे बढ़ना होता है. आपको खुद से मुकाबला करके क्रिकेटर के रूप में विकसित होना पड़ता है. ’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘दो, तीन या चार लोगों से प्रतिस्पर्धा का कोई मतलब नहीं बनता. अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश करो और आकलन का काम दूसरों पर छोड़ दो. इसके अलावा मैं वर्तमान टीम के भारतीय खिलाड़ियों के बारे में एक शब्द भी नहीं कहना चाहता हूं. ’’

 

अश्विन दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड दौर में बेअसर रहे थे उनके प्रदर्शन पर पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह और नरेंद्र हिरवानी ने काफी आलोचना की थी. यहां तक कि पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने हरभजन को टीम में वापस बुलाने के लिये कहा था.

 

हरभजन पिछले एक साल से भारतीय टीम से बाहर हैं. उनसे जब पूछा गया कि क्या उन्होंने अपने लिये कोई समयसीमा तय की, इस स्पिनर ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि उम्र नहीं बल्कि प्रेरणा महत्वपूर्ण है. उम्र केवल संख्या है. यदि कोई 45 साल में अच्छा प्रदर्शन कर सकता है तो फिर उसे शीर्ष स्तर की क्रिकेट खेलने से कौन रोकेगा. ’

 

क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में लगभग 700 अंतरराष्ट्रीय विकेट लेने वाले हरभजन अभी घरेलू क्रिकेट में खेल रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘ 100 से अधिक (101) टेस्ट और 200 से अधिक (229) वनडे खेलने के बाद घरेलू क्रिकेट में खेलना मुश्किल होता है. लेकिन विपरीत परिस्थितियां किसी के जज्बे की परीक्षा होती हैं. या तो आप चुनौतियों का सामना करो या फिर हट जाओ. और मैं उन लोगों में नहीं हूं जो चुनौतियों से भागता हैं. ’’

 

 हरभजन ने कहा, ‘‘मैं अकेला व्यक्ति नहीं हूं जिसे ऐसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है. खिलाड़ियों के ऐसे ढेरों उदाहरण हैं जिन्होंने कभी हार नहीं मानी. मुझे इस स्थिति से केवल व्यक्ति निकाल सकता है और वह स्वयं मैं हूं. मैं कड़ी मेहनत कर रहा हूं और परिणाम भी हासिल कर रहा हूं. इससे संबंधित लोग (चयनकर्ता) हैं जिन्हें यह फैसला करना है कि मुझे कब राष्ट्रीय टीम में वापस लिया जा सकता है.’’

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