मेरा सपना है कि प्रत्येक भारतीय स्कूल में शतरंज खेला जाए: आनंद

By: | Last Updated: Sunday, 24 November 2013 3:09 AM
मेरा सपना है कि प्रत्येक भारतीय स्कूल में शतरंज खेला जाए: आनंद

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<b>न्यूयार्क:
</b>भारत के महान शतरंज खिलाड़ी
विश्वनाथन आनंद ने कहा कि
उनका सपना है कि यह खेल देश के
प्रत्येक स्कूल में खेला
जाये. हाल में नार्वे के
मैग्नस कार्लसन ने उनसे
विश्व चैम्पियन का खिताब छीन
लिया था.<br /><br />पांच बार के
विश्व चैम्पियन आनंद ने कहा,
‘‘मेरा सपना है कि शतरंज भारत
में प्रत्येक स्कूल में खेला
जाये. ’’ आनंद ने
‘रिइमैजिनिंग इंडिया:
अनलॉकिंग द पोटेशंल आफ
एशियाज नेक्स्ट सुपरपावर’
नाम की किताब के लिये एक
निबंध लिखा है जिसे वैश्विक
कंस्लटेंट फर्म मैकिन्से ने
संपादित किया है.<br /><br />शतरंज
में रूस के दबदबे की जानकारी
देते हुए आनंद ने कहा कि रूस
के लोग इस बात के लिये मशहूर
हैं कि वे दुल्हन के शादी के
साजो सामान में ‘चेसबोर्ड’
देते हैं ताकि सुनिश्चित
किया जा सके कि बच्चे खेल के
नियम जान जायें.<br /><br />उन्होंने
कहा, ‘‘सोवियत के लोगों के
लिये शतरंज उनके डीएनए में
था. समय और प्रयास से हम
भारतीय भी बच्चे को बचपन से
शतरंज के नियमों से रूबरू
करवा सकते हैं ताकि वे खेल की
बारिकियों को समझ सके. ’’
आनंद को पिछले हफ्ते कार्लसन
ने मात दी थी, जिन्होंेने
चेन्नई में 10 बाजियों के बाद
विश्व शतरंज चैम्पियन खिताब
हासिल किया था. कार्लसन ने
तीन गेम में जीत दर्ज की थी
जबकि बाकी सात ड्रा खेली थी
जिससे उन्होंने 6.5 . 3.5 अंक से
जीत हासिल की.<br /><br />आनंद ने
निबंध में लिखा कि वह अपने
खेल में अपनी ‘भारतीय पहचान’
शामिल करते हैं. उन्होंने
कहा, ‘‘मुझे अकसर स्वभाविक या
अंर्तज्ञानी खिलाड़ी कहा
जाता है. मैं इस बात से थोड़ा
सहमत हूं. ’’ आनंद ने 1980 के दशक
में अंत में मास्को के अपने
पहले दौरे को याद करते हुए
कहा कि वह इस बात से भयभीत थे
कि उन्हें लगता था कि उन्हें
‘हर कैब ड्राइवर शतरंज में
मात’ दे सकता था.<br /><br />उन्होंने
कहा, ‘‘ऐसे ही माहौल में भारत
ने रूसी शतरंज स्कूल आयोजित
किया था. मुझे ‘काफीहाउस’
खिलाड़ी के नाम से पुकारा
जाता था. ’’ आनंद ने कहा,
‘‘पिछले कुछ वषरें में रूस का
दबदबा कमजोर हुआ है और अब चीन,
नार्वे, अर्मेनिया और
इस्राइल से भी अच्छे खिलाड़ी
निकलने शुरू हो गये हैं. ’’
उन्होंने कहा कि पहला भारतीय
विश्व चैम्पियन बनने से
उन्हें इस उपलब्धि का आभास
हुआ. उन्होंने कहा, ‘‘जब
मैंने शुरू किया था, भारतीयों
की शतरंज में इतनी दिलचस्पी
नहीं थी. कोई भी इसके बारे में
बात नहीं करता था. अब भारत में
हर दिन नयी शतरंज अकादमियां
खुलती हैं. इस खेल का अब काफी
विस्तार हो रहा है. ’’ <br />
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