मेरे संन्यास को लेकर इतनी जल्दबाज़ी क्यों: सचिन

By: | Last Updated: Tuesday, 3 September 2013 9:18 PM

मुंबई: मास्टर
ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर के
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से
संन्यास की अफवाहें ज़ोरों
पर हैं, लेकिन क्रिकेट के
भगवान ने खुद एक टीवी चैनल पर
साफ किया है कि उन्हें
रिटायरमेंट को लेकर
जल्दबाज़ी नहीं है.

सचिन ने कहा,”मैं नहीं समझता
कि इस पड़ाव पर हमें ऐसा करने
की जरूरत है. इतनी जल्दबाज़ी
क्यों.”

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह
अगले मैच की तैयारी कर रहे
हैं तो सचिन ने कहा, “मैं अपने
मैच से पहले कुछ तैयारी करता
हूं… लेकिन ज़िंदगी में
मानसिक तैयारी की जरूरत
पड़ती है.”

तेंडुलकर के नाम टेस्ट और
वनडे क्रिकेट में अनेक
कीर्तिनाम हैं. वे 198 टेस्ट
मैच खेल चुके हैं और बस टेस्ट
मैचों का दोहरा शतक लगाने से
दो कदम पीछे हैं. लेकिन अपने
करियर में वह इस मील के पत्थर
के जुड़ने के लेकर बहुत
उत्साहित नहीं हैं.

सचिन इस पर कहते हैं, “मैं एक
बार में एक ही कदम उठाता हूं
और फिर पूरे करियर में इस
करता रहता हूं. मेरी नज़र
200वां टेस्ट पर नहीं है. मैं
सोचता हूं कि कब मैं वहां
रहूंगा.”

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा एक
फार्मूला रहा है, काफी आगे के
बारे में मत सोचो. मैं अपने
करियर में इसी तरह चला हूं.’’ 

तेंडुलकर ने 24 साल के अपने
अंतरराष्ट्रीय करियर के
दौरान विश्व क्रिकेट में
सर्वाधिक 51 शतक की मदद से 53 . 86
की औसत से सर्वाधिक 15837 टेस्ट
रन बनाए.

इस स्टार बल्लेबाज ने पिछले
साल एकदिवसीय क्रिकेट से
संन्यास की घोषणा की थी.
उन्होंने 463 मैचों में 49 शतक की
मदद से 44 . 83 की औसत के साथ
सर्वाधिक 18426 रन बनाए.

खेल के सर्वकालिक महान
बल्लेबाजों में शामिल
तेंडुलकर को उनके लाखों
प्रशंसकों ने ‘क्रिकेट के
भगवान’ की उपमा दी लेकिन
मुंबई के इस दिग्गज बल्लेबाज
ने कहा कि वह सिर्फ एक
क्रिकेटर हैं जो गलतियां
करता है जबकि भगवान ऐसा नहीं
करते. तेंडुलकर ने कहा, ‘‘मैं
भगवान नहीं हूं. मैं सिर्फ
क्रिकेट खेलता हूं. उपर वाले
की दुआ है, अब तक जो भी मेरे
जीवन में आया उसका शुक्रिया.
हम सभी गलतियां करते हैं. अगर
मैं गलतियां नहीं करता तो कभी
आउट ही नहीं होता. मैं सिर्फ
अपना खेल खेलता हूं. ’’
तेंडुलकर को 1999 में मुश्किल
दौर से गुजरना पड़ा जब उनके
पिता रमेश तेंडुलकर का अचानक
निधन हो गया. यह बल्लेबाज उस
समय इंग्लैंड में विश्व कप
में खेल रहा था.

तेंडुलकर ने कहा, ‘‘मुझे मेरे
पिता की कमी खलती है. मैंने 1999
में अपने पिता को गंवा दिया.
अब काफी समय बीत चुका है. इसके
बाद काफी चीजें हो चुकी हैं
और मुझे उनकी कमी खलती है.’’

ग़ौरतलब है कि ऐसा माना जा
रहा है कि बीसीसीआई सचिन
तेंडुलकर को घरेलू
प्रशंसकों के सामने 200वां
टेस्ट मैच खेलने का मौका देकर
उनकी शानदार विदाई चाहती है.
बीसीसीआइ की वर्किग कमेटी ने
वेस्टइंडीज टीम से दो टेस्ट
और पांच एकदिवसीय मैच खेलने
के लिए आमंत्रित करने का
फैसला लिया, लेकिन सचिन के इस
ताज़ा बयान से ऐसा लगता है कि
उनपर संन्यास लेने का दबाव
बनाया जा रहा है.

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Web Title: मेरे संन्यास को लेकर इतनी जल्दबाज़ी क्यों: सचिन
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