सियासत में मचे गुंडागर्दी पर विजय विद्रोही की त्वरित टिप्पणी... चांदनी चौक की लड़ाई

By: | Last Updated: Thursday, 6 March 2014 9:45 AM
सियासत में मचे गुंडागर्दी पर विजय विद्रोही की त्वरित टिप्पणी… चांदनी चौक की लड़ाई

ब्रेख्त की एक लंबी कविता है. इसमें बताया गया है कि आने वाली पीढ़ियां आखिर हमसे क्या सवाल पूछेंगी.

 

वो यह नहीं पूछेंगे

बालक ने पत्थर नदी पर कब फेंका ,

वो यह पूछेंगे किस देश ने परमाणु बम पहले फेंका .

वो यह नहीं पूछेंगे

औरतें खुशबू बन कमरे में कब आईं

वो यह पूछेंगे

किस महाशक्ति ने शुरु की लड़ाई …………….

( आखिर में कवि कहता है )

वो यह नहीं पूछेंगे कि

वो समय कैसा था .

वो यह पूछेंगे

उस समय का कवि चुप क्य़ों था .

 

यह कविता दिल्ली में आम आदमी पार्टी और बीजेपी के कार्यकर्ताओं के बीच की लड़ाई के संदंर्भ में इस्तेमाल की जा सकती है . गुजरात में आप के नेता अरविंद केजरीवाल के काफिले को पुलिस की तरफ से रोकने पर जो बवाल हुआ उसकी गूंज दिल्ली में सुनाई भी दी और दिखाई भी दी . आप के कार्यकर्ता बीजेपी दफ्तर जा धमके . नारेबाजी , प्रदर्शन और बयानबाजी के बाद बारी आई पत्थरों की. दोनों तरफ से जम कर पत्थर चले, कुर्सियां उछलीं, सरिए चले. इस बीच पुलिस ने पानी की बौछार का इस्तेमाल किया . सवाल बहुत से हैं जो पूछे जा रहे हैं . जब चुनाव की आचार संहिता लग चुकी थी तो आप ने बिना चुनाव आयोग को सूचित किए बीजेपी दफ्तर के आगे प्रदर्शन कैसे किया . दिल्ली पुलिस अब तक तो आप के मिजाज और उग्र राजनीति के तरीके को जान चुकी है तो उसने एहतियातन आप के लोगों के पहले ही क्यों नहीं रोका , बैरिकेडिंग पहले क्यों नहीं की. आप ने जबरन दफ्तर के अंदर घुसने की कोशिश क्यों की . बीजेपी ने पत्थरबाजी और सरिएबाजी क्यों की .

 

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि किस ने पहला पत्थर उछाला . बड़ा सवाल है कि जब पत्थर उछाले जा रहे थे . जब पोस्टर फाड़े जा रहे थे , जब कुर्सियां उछल रही थीं तब वहां मौजूद दोनों दलों के नेता क्या कर रहे थे . क्या वो नेता बयानबाजी में वयस्त थे …क्या वो खुद पत्थरबाजी के लिए उकसा रहे थे …क्या वो टीवी वालों को बाइट देने में वयस्त थे ….या वो उस समय अपने अपने कार्यकर्ताओं को समझाने में लगे थे . हम सबने देखा कि किस तरह पत्थरबाजी के दौरान आप के नेता और विधायक अरविंद केजरीवाल के साथ गुजरात में मोदी के इशारे पर नाइंसाफी की बात कर रहे थे . यह साफ साफ अपने लोगों को उकसाने का ही काम था . नारे भी ऐसे ही थे . मोदी हमसे डरता है , पुलिस को आगे रखता है . उधर बीजेपी दफ्तर के अंदर से भी नारे बाजी हो रही थी , केजरीवाल को चोर बताने की तख्तियां लटकाई जा रही थीं . वहां पहुंचे एक नेता भी आप को लोगों को माओवादी बता रहे थे . उन नेताजी ने स्वीकारा भी कि वो खुद गेट खोलकर लाठी लेकर निकले थे . अब लाठी चलाई या नहीं यह पता नहीं है .

 

एक दूसरे दृश्य की कल्पना कीजिए . नारेबाजी है , पत्थरबाजी है . इस बीच आप के बीच में से एक नेता सामने आता है .अपने कार्यकर्ताओं से चुप रहने को कहता है . उन्हें शांतिपूर्वक ढंग से बैठ जाने को कहता है . उधर बीजेपी के अंदर एक नेता अपने लोगों से कमरों में जाने को कहता है . नारेबाजी थम जाती है . पत्थरबाजी रुक जाती है . दिल्ली पुलिस के जवान दोनों तरफ खड़े नजर आते हैं . ऐसा हो भी सकता था . लेकिन ऐसा हुआ नहीं . क्य़ों …….

 

कहा तो यह भी जा रहा है कि बीजेपी दफ्तर के बाहर जो कुछ हुआ वो और कुछ नहीं , चांदनी चौक सीट की लड़ाई थी . एक तरफ आप के घोषित उम्मीदवार आशुतोष थे तो दूसरी तरफ बीजेपी से नलिन कोहली थे जो चांदनी चौक से टिकट मांग रहे हैं . अगर ऐसा ही है तो दोनों नेताओं से यही हाथ जोड़ कर प्रार्थना है कि अपनी एक लोकसभा सीट के लिए पूरे देश में माहौल खराब करने की कोशिश मत कीजिए . पता चला है कि आप के उम्मीदवार ने कहीं दावा किया है कि अब तो वो चांदना चौक से एक लाख वोट के अंतर से जीतेंगे . पता चला है कि बीजेपी से टिकट मांगने वाले के एक समर्थक का कहना है कि अब तो टिकट पक्की ही समझो .

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Web Title: सियासत में मचे गुंडागर्दी पर विजय विद्रोही की त्वरित टिप्पणी… चांदनी चौक की लड़ाई
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