शर्मसार हुआ ब्राजीली फुटबाल का 100 साल का इतिहास

By: | Last Updated: Thursday, 10 July 2014 3:38 AM
_Brazilian _media _brands _it _as _shame _on _a _hundred _years _history _of _Brazilian _football

नई दिल्ली: जर्मनी के हाथों फीफा विश्व कप के पहले सेमीफाइनल में मंगलवार को मिली 1-7 की शर्मनाक हार के बाद ब्राजील के कोच लुइस फिलिप स्कोलारी और कार्यकारी डेविड लुइज ने देशवासियों से माफी मांगी है. यहां एक बड़ा सवाल यह उठता है कि इतनी शर्मनाक हार के बाद स्कोलारी और लुइज की माफी स्वीकार योग्य है? शायद नहीं.

 

इसका कारण यह है कि ब्राजील को हमेशा से फुटबाल में एक महाशक्ति के रूप में देखा गया है और यही कारण है कि इतनी बड़ी हार को स्वीकार करने की स्थिति में न तो देशवासी हैं और न ही मीडिया. यहां तक की ब्राजील से बाहर इस टीम के प्रशंसक भी इस हार को एक सदमे की तरह देख रहे हैं.

 

स्कोलारी ने मैच के बाद कहा कि नेमार की गैरमौजूदगी के कारण उनकी टीम हारी. यह बड़ा हास्यास्पद बयान है. यह अपना गिरेबान बचाने वाली बात है. अगर नेमार होते तो ब्राजील की टीम गोल करती और हो सकता है कि यह अंतर 3-7, 4-7 या फिर 5-7 हो सकता था लेकिन नेमार गोल बचाने का काम तो नहीं करते.

 

ब्राजीली टीम की रक्षापंक्ति को हमेशा से सशक्त माना जाता है लेकिन जर्मनी के खिलाफ पहले हाफ में जिस तरह का खेल दिखा, उससे तो यही लगा कि ब्राजील सही मायने में सेमीफाइनल में पहुंचने का हकदार था ही नहीं. और अगर वह यहां तक पहुंचा तो इसके लिए पूरा श्रेय नेमार को मिलना चाहिए, जिन्होंने टीम में जीत का जज्बा बनाए रखा था.

 

तो क्या ब्राजील जैसी सशक्त टीम किसी एक खिलाड़ी के बूते विश्व कप जीतने चली थी. कोच ने मैच से पहले कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि नेमार का स्थान लेने वाला खिलाड़ी और बाकी के सभी खिलाड़ी अपने इस चहेते साथी को जीत का तोहफा देना चाहेंगे और इसके लिए वे प्रेरणादायी खेल दिखाएंगे.

 

मैदान में जो हुआ, वह किसी से छिपा नहीं है. ब्राजील को विश्व कप इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी हार मिली. स्कोलारी मैदान के बाहर अपनी टीम को बेबसी से गोल पर गोल खाते देखते रहे और मैदान के अंदर लुइज अपनी चमत्कारिक रक्षाशक्ति को भूलकर निरीह दिखे.

 

दूसरी ओर, जर्मन टीम ने पहले हाफ में इस तरह से गोल किए, मानो वह किसी सेकेंड डिवीजन टीम के खिलाफ खेल रही हो. जर्मनी के बारे में कोई खुलकर बात नहीं कर रहा था. उसकी शक्तियों और कमियों का आकलन नहीं किया जा रहा था. इसके पीछे शायद यही कारण है कि यह टीम किसी भी परिस्थिति में विपक्षी टीम पर भारी पड़ सकती है.

 

भारी पड़ना तो ठीक है लेकिन ब्राजील जैसी सशक्त टीम के खिलाफ इतना भारी पड़ेगी, यह फुटबाल के पंडितों ने भी नहीं सोचा होगा. हर कोई हैरान है. सात गोल करके जर्मनी ने जिस अंदाज में फाइनल में प्रवेश किया है, उसके बाद तो अब उसका चैम्पियन बनना तय नजर आ रहा है.

 

ब्राजील के पूर्व डिफेंडर जुनिन्हो ने तो यहां तक कह दिया कि जर्मनी ने उनकी टीम को फुटबाल खेलने का तरीका बता दिया. जुनिन्हो ने कहा, “ब्राजीली फुटबाल में सबकुछ अच्छा नहीं चल रहा है. हम एक खिलाड़ी पर आश्रित थे. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. कुछ तो गड़बड़ है. हां, मैं इस बात को लेकर खुश हूं कि सेमीफाइनल मुकाबले में फुटबाल की जीत हुई और इतना दबाव होने के बावजूद खिलाड़ियों ने खेल भावना का दामन नहीं छोड़ा. “

 

इससे पहले पांच बार विश्व कप जीत चुके ब्राजील की मीडिया ने इस हार को इस देश के 100 साल के फुटबाल इतिहास की सबसे शर्मनाक घटना करार दिया. बेलो होरीजोंटे के स्टेडियम में शुरुआती पांच गोल पड़ने के बाद का नजारा किसी राष्ट्रीय आपदा से कम नहीं था. ब्राजील का हर प्रशंसक फफक-फफक कर रो रहा था. यही कारण है कि ‘ग्लोबोस्पोर्ट डॉट कॉम’ ने इस घटना को ‘शर्मनाक से भी शर्मनाक’ करार दिया.

Sports News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: _Brazilian _media _brands _it _as _shame _on _a _hundred _years _history _of _Brazilian _football
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: ?????? ??????? FIFA WORLD CUP 2014
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017