वनडे में धोनी पर होंगी सभी की नजरें, ओपनिंग जोड़ी पर बनती दिखी बात

By: | Last Updated: Saturday, 17 January 2015 12:07 PM
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मेलबर्न: पहले केवल फील्डिंग ड्रिल में हिस्सा लेने के बाद टीम इंडिया ने आज यहां नेट सेशन में जमकर पसीना बहाया और अपने ऑस्ट्रेलियाई दौरे के वनडे सीरीज के लिए कड़ी तैयारी की.

 

भारतीय टीम 18 जनवरी को ट्राई लीरीज के अपने पहले मैच में मेजबान ऑस्ट्रेलिया से भिड़ेगा और यहां एक बार फिर नजरें महेंद्र सिंह धोनी पर होंगी जिन्होंने पिछले महीने इसी मैदान पर टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेकर सबको हैरान कर दिया था.

 

धोनी संन्यास के बाद भी टीम के साथ रहे और यात्रा की. वह सिडनी में नेट पर भी अभ्यास करते दिखे लेकिन उन्होंने संन्यास के अपने हैरानी भरे फैसले के बारे में कोई बात नहीं की.

 

विकेटकीपिंग और खेल के तीनों प्रारूपों में टीम की अगुआई का धोनी के शरीर पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था और आराम की उनकी इच्छा को समझा जा सकता है. लेकिन उन्होंने जिस तरह संन्यास लिया वह हैरानी भरा रहा.

 

हालांकि धोनी के अपने संन्यास पर बाहरी लोगों से अधिक बात नहीं करने से अजीब सी स्थिति पैदा हुई. टीम की नयी वनडे जर्सी के लांच के दौरान भी समारोह के प्रस्तोता ने उनके टेस्ट संन्यास के बारे में बात नहीं की और कार्यक्रम के दौरान मौजूद पत्रकारों को भी कोई सवाल पूछने की इजाजत नहीं थी.

 

धोनी ने सिर्फ इतना कहा, ‘‘मैंने आराम किया.’’ धोनी ने हालांकि ट्रेनिंग में कोई कोताही नहीं बरती. उन्होंने शुरूआत में कोच डंकन फ्लेचर के साथ ट्रेनिंग देखी और फिर बल्लेबाजों को सीम गेंदबाजी कराई. वह जिस दिन से एडिलेड आए हैं उस दिन से ऐसे ही अभ्यास कर रहे हैं.

 

धोनी ने इसके बाद स्पिनरों और तेज गेंदबाजों के खिलाफ बल्लेबाजी का अभयास किया. उन्होंने बड़े शॉट खेले और शॉर्ट पिच गेंदों को खेलने का अभ्यास किया. ट्रेनिंग के दौरान भारतीय टीम प्रबंधन की रणनीति में भी बदलाव के संकेत मिले जब कोच फ्लेचर ने सुरेश रैना, अजिंक्य रहाणे और ईशांत शर्मा को कैच का अभ्यास कराया और इन्होंने स्लिप में खड़े होने की तरह अभ्यास किया.

 

ईशांत ने कुछ अच्छे कैच लपके और यहां तक कि गोता लगाते हुए भी कुछ कैच पकड़े जिससे फ्लेचर को खुशी हुई होगी. यह तेज गेंदबाज काफी अच्छा फील्डर नहीं है और वह अगर स्लिप में खड़ा होता है तो बेहतर फील्डरों को आउटफील्ड में लगाया जा सकता है.

 

अब यह देखना होगा कि क्या धोनी मैच में भी इन्हीं स्लिप क्षेत्ररक्षकों के साथ उतरते हैं या नहीं.

 

दूसरी तरफ रोहित शर्मा ने शिखर धवन के साथ बल्लेबाजी की जबकि विराट कोहली तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरे. इनके बाद ही रहाणे ने बल्लेबाजी की.

 

नेट अभ्यास से हालांकि कोई पुष्टि नहीं की जा सकती क्योंकि भारतीय टीम आम तौर पर अंतिम एकादश की रणनीति को अभ्यास सत्र में लागू नहीं करती.

अब यह देखना होगा कि भारत रविवार को किस क्रम के साथ उतरता है. लेकिन अगर टीम इंडिया इसी क्रम के साथ उतरती है तो सलामी जोड़ी को लेकर जारी अटकलों पर काफी हद तक विराम लग जाएगा.

 

रोहित ने पारी की शुरूआत करते हुए 41 पारियों में 48.24 की औसत से रन बनाए हैं लेकिन इसमें दो दोहरे शतक वाली पारियां भी शामिल हैं और अगर इन दोनों पारियों को हटा दिया जाए तो वह 39 पारियों में 37.48 की औसत से ही रन बना पाए हैं जिसमें सिर्फ एक शतक शामिल है. रोहित को हालांकि निचले क्रम में उतारने की रणनीति हालांकि शायद अधिक सफल नहीं हो. इस बल्लेबाज ने वनडे में चौथे से सातवें स्थान पर खेलते हुए 70 पारियों में सिर्फ 34.20 की औसत से रन बनाए हैं जिसमें दो शतक शामिल हैं.

 

इसके विपरीत रोहित जब चोटिल थे तब रहाणे ने पारी की शुरूआत करते हुए अच्छा प्रदर्शन किया. उन्होंने 11 मैचों में दो शतक और एक अर्धशतक की मदद से 39.54 की औसत से रन बनाए.

 

रहाणे के करियर का औसत 29.28 है और इसे देखते हुए सलामी बल्लेबाज के रूप में उनका प्रदर्शन काफी बेहतर है.

 

रहाणे और रोहित में हालांकि आंकड़ों के हिसाब से काफी अंतर नहीं है और भारतीय कप्तान धोनी भी आंकड़ों पर काफी निर्भर नहीं रहते. लेकिन उन्हें पारी की शुरूआत को लेकर फैसला जल्द करना होगा क्योंकि 2011 विश्व कप के खिताब की रक्षा के अभियान की शुरूआत की उलटी गिनती पहले ही शुरू हो चुकी है.

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