काश मेरे पास भी मुरली और वार्न जैसा कौशल होता: कुंबले

By: | Last Updated: Saturday, 21 February 2015 12:54 PM
anil kumble

मेलबर्न: टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में तीसरा सबसे सफल गेंदबाज होना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है लेकिन पूर्व भारतीय कप्तान अनिल कुंबले ने आज कहा कि काश उनके पास भी अपने समकक्ष दो महान स्पिनरों शेन वार्न और मुथैया मुरलीधरन जैसा कौशल होता.

 

आज यहां एमसीजी में ‘आईसीसी हॉल ऑफ फेम’ में शामिल किए जाने के बाद कुंबले ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘वार्न और मुरली प्रतिस्पर्धा, मुझे नहीं पता कि मैं इसे प्रतिस्पर्धा के रूप में देखता था या नहीं. लेकिन मैं कभी मुरली या वार्न से प्रतिस्पर्धा नहीं करता. काश, मेरे पास भी उनके (वार्न और मुरली) जैसा कौशल होता.’’ कुंबले ने कहा, ‘‘मेरी वार्न के साथ काफी अच्छी दोस्ती थी और मुरली के साथ और ज्यादा क्योंकि हम अधिक खेलते थे. हम एक दूसरे के खिलाफ काफी अधिक खेले. मुरली हमेशा मेरी प्रत्येक उपलब्धि के बाद मुझे फोन करता और बधाई देता. वह हमेशा अगली उपलब्धि से 30 से 40 विकेट दूर होता था. इसलिए मैं भी उसे बधाई देते हुए कहता था कि मुरली तीन टेस्ट के बाद तुम 30 और विकेट हासिल कर लोगे इसलिए बधाई. हमारे बीच स्वस्थ मित्रता थी और यह अब भी जारी है.’’

 

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 18 बरस बिताने वाले कुंबले ने भारतीय टीम के कोर में काफी योगदान दिया जिसमें सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण भी शामिल रहे. कुंबले ने कहा, ‘‘कोर समूह काफी समय तक रहा और हमने यह विश्वास करना शुरू कर दिया था कि हम किसी भी टीम के खिलाफ जीत सकते हैं. इन पांच खिलाड़ियों में आप वीरेंद्र सहवाग, जवागल श्रीनाथ, हरभजन सिंह और जहीर खान को जोड़ सकते हो. हमारे पास शानदार टीम थी. मैं हमेशा खुद को भाग्यशाली समझता था कि मुझे तेंदुलकर, सहवाग या द्रविड़ को सिर्फ नेट पर गेंदबाजी करनी होती थी, अंतरराष्ट्रीय मैचों में नहीं. असल में तेुंदलकर, द्रविड़ या सहवाग बाद में मेरे ‘कोच’ की तरह बन गए थे क्योंकि वे नेट पर मुझे खेलने के बाद बताते थे कि मैं कहां गलती कर रहा हूं.’’ कुंबले ने जिन बल्लेबाजों को गेंदबाजी की उनमे उन्होंने ब्रायन लारा को सबसे महान बताया.

 

उन्होंने कहा, ‘‘ब्रायन लारा एक ही गेंद पर चार या पांच शॉट लगा सकता था. यहां एमसीजी पर ही सुनामी से प्रभावित लोगों की याद में हुए मैच में मैंने लारा को गेंदबाजी की. मैंने गेंद फेंकी और वह आगे बढ़कर खेला जिसके बाद मैंने फ्लाइटेड गेंद फेंकी. जब वह आगे बढ़ गया तो उसने महसूस किया कि उसने गेंद को गलत भांपा है. कोई और खिलाड़ी होता को इसे चूककर आउट हो जाता लेकिन लारा ने इसे बाउंड्री के लिए स्वीप कर दिया और मुझे पता था कि कुछ नहीं किया जा सकता.’’

 

कुंबले ने हरभजन सिंह की भी काफी तारीफ की जिनके साथ उन्होंने लगभग 10 साल तक सफल स्पिन जोड़ी बनाई. उन्होंने कहा, ‘‘शुरूआत में वेंकटापति राजू, राजेश चौहान समूह का हिस्सा थे. हिरवानी बेहद कम समय के लिए, बाद में सुनील जोशी और फिर भज्जी, हम लगभग 10 साल तक एक साथ खेले. कभी कभी हम एक दूसरे के प्रतिस्पर्धी भी होते थे इसलिए यह चुनौती की तरह था. जब भी हम विदेशी दौरे पर जाते तो एक ही स्पिनर को जगह मिल सकती थी इसलिए हमेशा वह या मैं ही खेल पाते थे इसलिए यह मुश्किल समय होता था.’’ कुंबले को इसके अलावा इंग्लैंड में 2007 में ओवल टेस्ट में शतक बनाने का भी गर्व है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘टेस्ट शतक हमेशा विशेष रहेगा क्योंकि मुझे विश्वास था कि मैं टेस्ट शतक बना सकता हूं. अपने बल्लेबाजी कौशल को पहचानने के लिए मुझे 117 टेस्ट लग गए. यहां तक कि उस टेस्ट मैच से पहले टीम बैठक में मैंने स्पष्ट तौर पर कह दिया था कि मैं हमारे बल्लेबाजी क्रम से निराश हूं क्योंकि हमारे पास महान बल्लेबाज थे लेकिन उस दौरे पर एक भी शतक नहीं बना था. मैंने यह महसूस नहीं किया था कि मुझे उन्हें बताना होगा कि शतक कैसे बनाते हैं.’’ कुंबले ने कहा, ,‘‘यह काफी विशेष था. आप मेरे साथियों के चेहरे देख सकते थे. जब मैंने शतक बनाया तो वे कितने खुश थे, मुझसे अधिक.’’

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Web Title: anil kumble
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