‘अपमानित’ महसूस कर रहे मुक्केबाज मनोज, करेंगे खेल मंत्रालय के खिलाफ मुकदमा

By: | Last Updated: Wednesday, 20 August 2014 11:14 AM
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पटियाला: इस साल अर्जुन पुरस्कार की सूची में अपना नाम शामिल नहीं होने से ‘अपमानित’ महसूस कर रहे मुक्केबाज मनोज कुमार ने आज कहा कि वह इस नाइंसाफी को लेकर खेल मंत्रालय के खिलाफ मुकदमा करेंगे .

 

चयन समिति ने अर्जुन पुरस्कार सूची में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया जिससे मुक्केबाज जय भगवान के नाम की विवादित अनुशंसा बरकरार रहेगी.

 

चयन समिति के सदस्य रहे भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक जिजि थामसन ने कहा कि समीक्षा बैठक में पेनल ने सात खिलाड़ियों के नाम पर विचार किया और यह सर्वसम्मति से तय हुआ कि किसी बदलाव की जरूरत नहीं है .

 

इस मामले पर मनोज ने कहा कि खेल मंत्रालय और खुद थामसन ने उन्हें आश्वासन दिया था कि कल की बैठक में उनका नाम जोड़ा जायेगा लेकिन अपनी बात से मुकरकर उन्होंने ‘धोखेबाजी’ की है .

 

इस पूरे मामले पर मनोज ने कहा ,‘‘जब मेरे बड़े भाई ने 13 अगस्त को खेल सचिव से मुलाकात की थी तब उन्होंने स्वीकार किया था कि मंत्रालय ने गलती से यह समझ लिया कि मैं डोप अपराध में शामिल था. श्री अजीत शरण ने मेरे भाई से कहा था कि समीक्षा बैठक में मेरा नाम जोड़ा जायेगा.’’ उन्होंने कहा ,‘‘ साइ महासचिव ने अगले दिन मुझे फोन करके कहा कि मेरे नाम पर विचार किया जायेगा और मेरे साथ कोई अन्याय नहीं होगा. उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि मेरा नाम अर्जुन पुरस्कार सूची में जोड़ा जायेगा. लेकिन यह सब झूठे वायदे साबित हुए और अब सभी अपनी बात से मुकर गए हैं. मुझे अगले सप्ताह एशियाई खेलों के ट्रायल में भाग लेना है और मैं काफी तनाव में हूं.’’

 

दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल 2010 में स्वर्ण पदक जीतने वाले मनोज ने कहा ,‘‘पहले उन्होंने मुझे डोप अपराधी बताकर मेरी छवि खराब की और उसके बाद वायदे से मुकरकर मेरे साथ धोखा किया. यह अपमान और धोखा है.’’ मनोज के बड़े भाई और कोच राजेश कुमार ने कहा कि वह पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में मुकदमा दायर करेंगे.

 

उन्होंने कहा ,‘‘मेरे भाई के साथ नाइंसाफी हुई है. यदि देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ी के साथ ऐसा बर्ताव किया जाता है तो उसे कैसे प्रेरणा मिलेगी. मैं जल्दी ही चंडीगढ हाई कोर्ट में मुकदमा दायर करूंगा .’’ उन्होंने कहा ,‘‘ मैं कल सरकार के पास आरटीआई दायर करूंगा और उसके बाद अदालत में मुकदमा करूंगा . मैं पुछूंगा कि चयन समिति द्वारा इस्तेमाल की गई अंक प्रक्रिया के तहत मनोज को कितने अंक मिले हैं और बाकियों को कितने .’’ राजेश ने यह भी कहा कि थामसन यह दावा कैसे कर सकते हैं कि मनोज के पास अभी समय है और उसे बाद में पुरस्कार मिल सकता है.

 

उन्होंने कहा ,‘‘ मनोज ने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीता लेकिन अगले साल के अर्जुन पुरस्कार के लिये उस पर गौर नहीं किया गया क्योंकि चार साल की उपलब्धियां गिनी जाती है. अगले साल के पुरस्कार के लिये 2011 के बाद की उपलब्धियां गिनी जायेंगी.’’

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