कुश्ती: खत्म होगा 28 साल का इंतजार ?

By: | Last Updated: Saturday, 20 September 2014 2:20 PM

28 साल पहले सियोल में हुए एशियन गेम्स में भारत को कुश्ती में स्वर्ण पदक करतार सिंह ने दिलाया था . लेकिन अफसोस उसके बाद से आज तक इस टूर्नामेंट में भारतीय पहलवानों को स्वर्ण पदक नसीब नहीं हुआ है. हालांकि हाल ही में ग्लास्गो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय पहलवानों ने पांच गोल्ड समेत 13 मेडल जीते थे. इतना ही नहीं 2012 के लंदन ओलंपिक में भी भारतीय पहलवान हीरो रहे थे.ऐसे में अब इंचियोन में भी उनसे शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है. लेकिन पहलवानों की राह इतनी आसान नहीं है . क्योंकि यहां भारत का सामना कुश्ती में मजबूत जापान, ईरान, दक्षिण कोरिया, मंगोलिया, कजाकिस्तान, और उज्बेकिस्तान के पहलवानों से होगा. इसलिए इसमें पदक जीतना ओलंपिक में पदक जीतने से कम नहीं होगा.

 

 

2010 में ग्वांगझू एशियन गेम्स में भारतीय पहलवानों को मात्र तीन कांस्य पदकों से संतोष करना पड़ा था. ओलंपिक में दो व्यक्तिगत पदक जीतने वाले सुशील कुमार के हटने से भारत की मुश्किलें और बढ़ गई है. वैसे भारत के पास योगेश्वर दत्त जैसा ओलंपिक कांस्य पदक विजेता पहलवान मौजूद है. उनके अलावा अमित कुमार, की दावेदारी को भी कमजोर नहीं आंका जा सकता है.योगेश्वर 2006 एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने में सफल हुए थे और इस बार वो अपने पदक का रंग सुनहरा करने को बेताब रहेंगे. ग्लास्गो में स्वर्णिम सफलता हासिल करने में उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं हुई थी, लेकिन इंचियोन में मुकाबला कड़ा रहेगा और ड्रॉ से काफी कुछ तय हो जाएगा. ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स के रजत पदक विजेता बजरंग और सत्यव्रत कादियान भी पदक विजेताओं में अपना नाम दर्ज करवाना चाहेंगे.

 

भारत को ग्रीको रोमन शैली  में भी सफलता मिलती रही है और इस बार भी इस शैली में पहलवान सफलता हासिल करने के लिए पूरा जोर लगाएंगे. वहीं महिला वर्ग में युवा विनेश फोगट ने ग्लास्गो में स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन इस बार 48 किग्रा में उनकी राह आसान नहीं होगी. इसी प्रकार बबीता कुमारी ने भी कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था. लेकिन 55 किग्रा वर्ग में उनकी राह भी आसान नहीं होगी . उन्हें भी अपना पूरा दमखम लगाना होगा. गीतिका जाखड़ के पास पदक हासिल करने का पुराना अनुभव है और वे उसका पूरा इस्तेमाल करेंगी. हालांकि एशियाड में महिला कुश्ती में भारत पिछली बार खाली हाथ लौटा था जबकि उसे सफलता सिर्फ 2006 में मिली थी जब गीतिका जाखड़ ने 63 किग्रा में रजत और अल्का तोमर ने कांस्य पदक जीता था.

 

एशियाई खेलों के इतिहास में कुश्ती की सफलता की बात की जाए तो भारत 8 स्वर्ण,13 रजत और 30 कांस्य समेत कुल 51 पदक जीतकर छठें स्थान पर है . जापान 62 स्वर्ण  समेत कुल 143 पदक जीतकर पहले तथा ईरान 58 स्वर्ण समेत 125 पदक जीतकर दूसरे स्थान पर है. दक्षिण कोरिया (49 स्वर्ण) मंगोलिया (10 स्वर्ण) और कजाकिस्तान (10 स्वर्ण) क्रमश: तीसरे, और पांचवें स्थान पर है.

 

दक्षिण कोरिया से रहेगा खतरा

 

दक्षिण कोरिया को कुश्ती में अव्वल माना जाता है लेकिन पिछले एशियाई खेलों में वह आश्चर्यजनक रूप से एक भी स्वर्ण पदक नहीं जीत पाया था .दक्षिण कोरिया पिछली बार तीन रजत और छह कांस्य पदक ही हासिल कर पाया था.इस बार एशियाई खेल उसके घर में हो रहा है और इसे देखते हुए उसके पहलवान पिछली बार की कसर को पूरी करने के इरादे से मैट पर उतरेंगे.

 

 

कुश्ती में भारतीय दावेदारी पर नजर

 

 

ग्वांगझू एशियन गेम्स (2010) में भारत को तीन कांस्य पदक मिले थे. कुश्ती में 20 गोल्ड (12 फ्री स्टाइल, 8 ग्रीको रोमन) दांव पर हैं. मैच 27 सितंबर से शुरू होंगे. भारत ने 18 पहलवान उतारे हैं. इनमें से आठ अमित, योगेश्वर, बजरंग, सत्यव्रत, पवन, बबिता, विनेश, गीतिका, कॉमनवेल्थ गेम्स से पदक लेकर लौटे हैं. अब तक हुए 16 एशियन गेम्स में भारत ने कुश्ती में 51 पदक जीते हैं, जिसमें से 8 गोल्ड हैं

 

17 वां एशियन गेम्स दक्षिण कोरिया में 19 सितंबर से शुरू हो रहा है. भारत इस टूर्नामेंट में 516 खिलाड़ी उतारा रहा है. कुश्ती, शूटिंग, बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग, बैडमिंटन, एथलेटिक्स और हॉकी में हमारे खिलाड़ी कई पदक जीतने के इरादे से उतरेंगे. टेनिस और बैडमिंटन के स्टार खिलाड़ियों के नाम वापस लिए जाने के बाद भारतीय प्रशंसकों की उम्मीदें पहलवानों पर टिग गई हैं.

 

 

 

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Web Title: asian games
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