एशियाई खेलों के फाइनल में 32 साल बाद भारत-पाक आमने सामने

By: | Last Updated: Wednesday, 1 October 2014 6:47 AM
asian games hockey india pakistan in finals after 32 years

इंचियोन: दक्षिण एशियाई शैली की हॉकी का मनोहर नजारा कल यहां एशियाई खेलों की पुरूष हॉकी स्पर्धा के फाइनल में देखने को मिलेगा जब भारत और पाकिस्तान खिताबी मुकाबले में जीत दर्ज करके 2016 रियो ओलंपिक में सीधे प्रवेश का हक हासिल करने के इरादे से उतरेंगे. दोनों टीमों के बीच हुए लीग मुकाबले की तरह इसमें भी जज्बे और आक्रामकता की कोई कमी नहीं होगी. लीग चरण में हालांकि भारत को 1-2 से शिकस्त का सामना करना पड़ा था.

 

भारत और पाकिस्तान एशियाई खेलों की पुरूष स्पर्धा के फाइनल में पिछली बार 1982 में नयी दिल्ली में ध्यान चंद स्टेडियम में आमने सामने थे और तब पाकिस्तान ने उलटफेर करते हुए 7-1 से दर्ज की थी जिसके बाद गोलकीपर मीर रंजन नेगी और डिफेंस की काफी आलोचना हुई थी. एशियाई हॉकी में इसके बाद दक्षिण कोरिया ने काफी प्रगति की जिससे ये दोनों टीमों अब तक फाइनल में दोबारा कभी नहीं भिड़ सकी.

 

कल होने वाला फाइनल दोनों टीमों के बीच एशियाई खेलों में सातवीं खिताबी भिड़ंत होगी. इससे पहले भारत सिर्फ दो मौकों पर जीतने में सफल रहा है और उसने पिछली जीत 1966 बैंकाक खेलों में दर्ज की थी. फाइनल में दोनों ही टीमों पर काफी दबाव होगा और वही टीम जीतेगी को दबाव से बेहतर तरीके से निपटने में सफल रहेगी. साल 1982 के बाद पाकिस्तान और भारत 1990 में बीजिंग में हुए एशियाई खेलों में भी पहले दो स्थानों पर रहे लेकिन तब प्रतियोगिता राउंड रॉबिन आधार पर खेली गई थी.

 

भारत ने शीर्ष पर रहते हुए स्वर्ण पदक जीता था और पाकिस्तान को 3-2 से हराया था. भारत ने पिछली बार स्वर्ण पदक 1998 बैंकाक खेलों में धनराज पिल्लै की अगुआई में जीता था. भारत ने पिछली बार 2002 में बुसान एशियाई खेलों के फाइनल में जगह बनाई थी लेकिन तब उसे मेजबान दक्षिण कोरिया के हाथों 3-4 से शिकस्त का सामना करना पड़ा था. भारत ने अब 12 साल बाद फाइनल में जगह बनाई है.

 

दूसरी तरफ गत चैम्पियन पाकिस्तान की नजरें अपने नौवें स्वर्ण पदक पर टिकी हैं. पूल चरण में पाकिस्तान की टीम ने बेहतर प्रदर्शन किया था और उसका आक्रमण और डिफेंस दोनों मजबूत नजर आ रहे थे. भारत ने हालांकि कई मौके गंवाए. कल आकाशदीप सिंह ने रचनात्मकता का शानदार नजारा पेश करते हुए कोरिया के खिलाफ मैदानी गोल दागकर भारत को जीत दिलाई थी और टीम को अन्य खिलाड़ियों से भी ऐसे ही प्रदर्शन की उम्मीद है.

 

पाकिस्तान के खिलाफ इस तरह की रचनात्मकता काफी अहम हो सकती है क्योंकि उसके बाद कुछ शानदार खिलाड़ी हैं जिसमें प्ले मेकर शफकत रसूल मुख्य हैं. कल मिडफील्ड में भारतीय कप्तान सरदार सिंह और मनप्रीत सिंह ने शानदार प्रदर्शन किया और टीम को फाइनल में भी उनसे इसी तरह के प्रदर्शन की उम्मीद होगी क्योंकि ये दोनों पाकिस्तान के खिलाफ लीग मैच में प्रभाव छोड़ने में विफल रहे थे.

 

भारतीय स्ट्राइकर हालांकि अब तक टूर्नामेंट में ख्याति के अनुसार प्रदर्शन करने में नाकाम रहे हैं और उन्होंने कई मौके गंवाए हैं. डिफेंस का प्रदर्शन अपेक्षाकृत अच्छा रहा है और वे कोरिया जैसी तेजतर्रार टीम को गोल करने से रोकने में सफल रहे. भरोसेमंद गोलकीपर पीआर श्रीजेश को एक बार फिर भारतीय गोलमुख के सामने दीवार बनकर खड़ा होगा. ड्रैग फ्लिक विशेषज्ञ रूपिंदर पाल सिंह की वापसी भारत के लिए अच्छा संकेत है जिन्हें ओमान के खिलाफ दूसरे मैच में चोट लगने के बाद कल कोरिया के खिलाफ पहली बार मैदान पर उतारा गया.

 

उनकी मौजूदगी में निश्चित तौर पर भारत की गोल करने की संभावनाओं में इजाफा होगा. पाकिस्तान के पास भी अग्रिम पंक्ति में कुछ शानदार खिलाड़ी मौजूद हैं जिसमें कप्तान इमरान मोहम्मद और इरफान मोहम्मद अहम हैं. टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल दागने वाले मोहम्मद उमर भुट्टा भारत के खिलाफ लीग चरण में गोल कर चुके हैं और टीम को उनसे एक बार फिर इस प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद होगा.

 

पाकिस्तान के पास भी इमरान बट के रूप में शानदार गोलकीपर है जिन्होंने कल मलेशिया के खिलाफ सेमीफाइनल में पेनल्टी शूटआट में टीम में की जीत में अहम भूमिका निभाई.

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