बिहार की नहीं हो पाएगी रणजी ट्रॉफी में वापसी?

बिहार की नहीं हो पाएगी रणजी ट्रॉफी में वापसी?

17 साल के लंबे इंतजार के बाद भले ही बिहार को रणजी में खेलने की अनुमति मिल गई हो लेकिन मैदान पर टीम की वापसी अभी भी अंधेरे में है. सोमवार को सौरव गांगुली की अगुवाई वाली बीसीसीआई की तकनीकी समिति ने बिहार को रणजी ट्रॉफी में शामिल करने की सिफारिश पर आपत्ति जताई है.

By: | Updated: 17 Apr 2018 08:09 AM

17 साल के लंबे इंतजार के बाद भले ही बिहार को रणजी में खेलने की अनुमति मिल गई हो लेकिन मैदान पर टीम की वापसी अभी भी अंधेरे में है. सोमवार को सौरव गांगुली की अगुवाई वाली बीसीसीआई की तकनीकी समिति ने बिहार को रणजी ट्रॉफी में शामिल करने की सिफारिश पर आपत्ति जताई है.

कोलकाता में आज बैठक के दौरान नए महाप्रबंधक (क्रिकेट संचालन) सबा करीम ने यह सिफारिश पेश की.

बैठक में उपस्थित बीसीसीआई के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बिहार रणजी टीम को लेकर करीम के सुझाव के बाद पूरी समिति ने सर्वसम्मति ने महसूस किया कि इस संबंध में उचित प्रक्रिया अपनायी जानी चाहिए.

अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर कहा , ‘‘सबा करीम सीओए की चिट्ठी के साथ मीटिंग में आए थे जिसमें उनकी समिति को बिहार के लिए हां करना था. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार हम बिहार को रणजी ट्रॉफी खेलने से नहीं रोक सकते हैं.’’

उन्होंने कहा , ‘‘लेकिन एक अन्य सदस्य ने सबा से कहा कि इसकी क्या गारंटी है कि अगर हम बिहार को रणजी ट्रॉफी में खेलने की अनुमति देते हैं तो नगालैंड, मणिपुर और मेघालय अदालत नहीं जाएंगे. अभी तक बीसीसीआई ने नया संविधान स्वीकार नहीं किया है जिसमें लोढ़ा समिति के सुधार शामिल हैं. इसलिए बिहार अब भी पूर्वोत्तर के राज्यों के तरह एसोसिएट सदस्य ही है. ’’

पूर्वोत्तर के राज्यों ने पिछले साल बीसीसीआई अंडर -19 टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था और बोर्ड उन्हें सीधे रणजी ट्रॉफी में उतारने के बजाय धीरे-धीरे प्रणाली से जोड़ना चाहता है.

अधिकारी ने कहा , ‘‘हर एसोसिएट राज्य की टीम को एक प्रोसेस के साथ आगे बढ़ना होता है और सबा करीम को साफ तौर पर कह दिया गया कि तकनीकी समिति ऐसा नहीं सोचती कि बिहार के संबंध में कोई छूट दे देनी चाहिए. उसे जूनियर क्रिकेट अंडर -16, अंडर -19 और अंडर -22 में खेलना होगा और फिर रणजी ट्रॉफी में वापसी करनी होगी. ’’

करीम ने समिति को समझाने की कोशिश की कि बिहार का मामला पूर्वोत्तर की तुलना में थोड़ा भिन्न है जहां क्रिकेट मुख्य खेल नहीं है और वहां आधारभूत ढांचे की भी कमी है.

तकनीकी समिति ने करीम को दो विकल्प दिए - या तो सीओए के निर्देशों के अनुसार बिहार को सीधे रणजी ट्रॉफी में प्रवेश दिया जाए और अन्य राज्यों से कानूनी कार्रवाई की अपेक्षा करें या फिर उन्हें जूनियर क्रिकेट में लाकर आगे बढ़ाएं.

एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा , ‘‘यह फैसला सीओए को करना है कि उन्हें कौन सा विकल्प व्यावहारिक लगता है. समिति को जो सही लगा उससे उसने सबा करीम को अवगत करा दिया है. ’’

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