बिहार चुनाव स्पेशल: दरभंगा का दंगल कौन जीतेगा?

By: | Last Updated: Sunday, 13 September 2015 10:13 AM
bihar special darbhanga fight

नई दिल्ली: दरभंगा का नाम सुनते ही मन में मिथिला वाली मिठास का एहसास होता है. दरभंगा एक शहर नहीं बल्कि मिथिलांचल की हृदय स्थली है. बात मिथिला की होती है तो इसकी सीमा सिर्फ दरभंगा या मधबुनी तक सीमित नहीं है.

 

भौगोलिक रूप से मिथिला का इलाका सीतामढ़ी से लेकर सीमांचल तक फैला हुआ है. इस पूरे इलाके में बोली से लेकर रहन सहन सब एक जैसा है. सीतामढ़ी के पश्चिमी इलाके में बज्जिका बोली जाती है. लेकिन सीतामढ़ी से पूरब की ओर बढ़ते ही आपको मैथिली की मिठास का अंदाजा होने लगेगा.

 

दरभंगा के दंगल में बात सिर्फ दरभंगा जिले की नहीं होगी. इस प्रमंडल में 4 जिले हैं और विधानसभा की कुल 37 सीटें . 2010 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू को 15, बीजेपी को 14, आरजेडी को 7 और अन्य को 1 सीट पर जीत मिली थी. लोकसभा चुनाव में दरभंगा प्रमंडल की तमाम सीटें एनडीए ने जीत ली थी. लेकिन केंद्र में इस इलाके से किसी को मंत्री नहीं बनाया जाना विरोधियों में मुद्दा बना हुआ है. ब्राह्मण वोटों के अलावा इलाके में मुस्लिम वोट भी अच्छी तादाद में है. 

 

दरभंगा प्रमंडल में औसतन हर जिले में 15 से 16 फीसदी मुस्लिम आबादी है. चारों जिलों में सबसे ज्यादा दरभंगा में 22 फीसदी मुस्लिम आबादी है. 2010 के चुनाव में इस इलाके से 5 मुस्लिम उम्मीदवार जीते थे. इस बार भी महागठबंधन अपने एमवाई समीकरण पर दांव लगाने की तैयारी में है. हालांकि इलाके में यादवों का एक तबका इस वक्त बीजेपी के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ है. इसलिए यादव वोट बैंक में सेंध तय है. इस इलाके में कांग्रेस का भी अपना मजबूत आधार है.

 

इस बार कांग्रेस के महागठबंधन के साथ आने से परंपरागत मैथिल ब्राह्मण वोट को लेकर सस्पेंस अंत तक बना रहेगा. अतीत की बात छोड़ भी दें तो राजनीतिक रूप से ये इलाका बिहार की राजनीति में कितना दखल रखता है इसका अंदाजा इसी बात से लग सकता है कि आरजेडी विधायक दल के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी और विधानसभा में जेडीयू विधायक दल के नेता विजय चौधरी इसी इलाके से आते हैं.

 

बीजेपी-जेडीयू का गठबंधन टूटने के बाद इसी इलाके में सबसे ज्यादा राजनीतिक उथल पुथल देखने को मिली थी. जाले के विधायक रहे विजय मिश्रा बीजेपी छोड़ जेडीयू में चले गए. हायाघाट के बीजेपी विधायक अमरनाथ गामी बागी हैं. समस्तीपुर में मोहद्दीनगर से बीजेपी के टिकट पर जीते राणा गंगेश्वर ने जेडीयू का दामन थाम लिया था. राणा गंगेश्वर पहले समता पार्टी के जमाने में किसान समता के प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे. 2010 के सीट बंटवारे में जेडीयू ने बीजेपी को इस सीट के लिए अपना उम्मीदवार दिया था.

 

झंझारपुर के विधायक नीतीश मिश्रा जेडीयू को छोड़ अब मांझी के साथ हैं. साहेबपुर कमाल से जीतीं परवीन अमानुल्लाह नीतीश का साथ छोड़ चुकी हैं. कुल मिलाकर चारों जिले मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर और बेगूसराय का सियासी समीकरण इस बार पूरी तरह बदल चुका है. दरभंगा शहर की सीट पर अभी बीजेपी के संजय सरावगी का कब्जा है. संजय की उम्मीदवारी तय है. ध्रुवीकरण की राजनीति से बचने के लिए उनके खिलाफ महगठबंधन से अमरनाथ गामी को उतारने की तैयारी पर विचार चल रहा है.

 

ऐसा हुआ तो फिर मुकाबला कड़ा हो सकता है. गामी अभी हायाघाट से बीजेपी के विधायक हैं. जिले की एक और हॉट सीट अली नगर पर भी राज्य की निगाहें टिकी हैं. आरजेडी विधायक दल के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी जीत का सिक्सर मारने की तैयारी में हैं. सिद्दीकी का लड़ना तय है. लेकिन इनके खिलाफ बीजेपी गठबंधन से कौन लड़ेगा इसको लेकर भारी सस्पेंस है. बीजेपी में दावेदार कई हैं लेकिन पार्टी को जिताऊ उम्मीदवार की जरूरत है. माना जा रहा है कि हरी झंडी मिलने पर जेडीयू के पूर्व विधायक प्रभाकर चौधरी को बीजेपी अपना उम्मीदवार बना सकती है. वैसे दिगंबर यादव, अनिल झा सहित कई दावेदार मैदान में हैं.

 

केवटी सीट पर नेता पुत्रों की जंग होने की फिर से उम्मीद है. बीजेपी सांसद हुकुमदेव नारायण यादव के बेटे अशोक यादव विधायक हैं. अशोक के खिलाफ आरजेडी पूर्व मंत्री अली अशरफ फातमी के बेटे को टिकट देगी. हालांकि महागठबंधन में कांग्रेस ने भी कमर कस रखी है. सोशल मीडिया पर फातमी के वंशवाद के खिलाफ मुहिम चल रही है. मधुबनी शहर की सीट भी बीजेपी के कब्जे में है. 2010 के चुनाव में सिर्फ 588 वोटों से जीत हार का फैसला हुआ था.

 

बीजेपी के रामदेव महतो ने आरजेडी के नैयर आजम को हराकर सीट पर कब्जा किया था. उस चुनाव में कांग्रेस को 10 हजार वोट मिले थे. इस गणित के हिसाब से देखें तो रामदेव महतो के लिए इस बार का चुनाव काफी मुश्किल भरा हो सकता है. हालांकि आरजेडी से इस बार नैयर आजम के लड़ने की संभावना न के बराबर है. आरजेडी से मोहम्मद असलम को टिकट मिलने की संभावना है. वैसे कांग्रेस भी इस सीट पर अपना दावा जता रही है. चुनाव सबसे अंतिम फेज में है इसलिए अभी उम्मीदवार का सस्पेंस बना रहेगा.

 

समस्तीपुर से आरजेडी के अख्तरुल इस्लाम शाहीन की उम्मीदवारी तय मानी जा रही है. शाहीन के खिलाफ लड़ने के लिए बीजेपी और एलजेपी से कई दावेदार हैं. शाहीन ने पिछले चुनाव में रामदेव ठाकुर को हराकर सीट पर कब्जा किया था. जिले की सरायरंजन सीट से विजय चौधरी जेडीयू के उम्मीदावर होंगे. सवर्ण बहुल सरायरंजन में विजय के खिलाफ बीजेपी मजबूत उम्मीदवार तलाश रही है.

 

पार्टी के जिला अध्यक्ष सुशील चौधरी, चंद्रकांत चौधरी, राजीव रंजन, रंजीत निर्गुणी सहित एक दर्जन दावेदार क्षेत्र में टिकट के लिए सक्रिय हैं. बेगूसराय की तेघड़ा सीट हॉट सीट हो सकती है. तेघड़ा से जेडीयू के भूमिपाल ताल ठोकने की तैयारी में हैं. यहां से बीजेपी के ललन कुंवर विधायक हैं. छात्र नेता रहे भूमिपाल जेडीयू के विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं.

Sports News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: bihar special darbhanga fight
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
और जाने: Bihar Election 2015 Bihar elections
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017