हार का असरः प्रायर पूरे सीरीज से बाहर, अब कुक को हटाने की मांग ने जोर पकड़ा

By: | Last Updated: Tuesday, 22 July 2014 10:11 AM
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लंदन: भारत के हाथों लॉर्डस टेस्ट में मिली हार की पहली गाज खराब फॉर्म से जूझ रहे विकेटकीपर मैट प्रायर पर गिरी जिन्होंने बाकी मैचों से बाहर रहने का फैसला किया जबकि कप्तान एलेस्टेयर कुक को हटाने की मांग ने आज जोर पकड़ लिया.

 

प्रायर ने खराब फॉर्म और चोटों के कारण श्रृंखला के बाकी मैचों के लिये टीम से हटने का फैसला किय . उन्होंने कहा कि वह अपने काम के साथ इंसाफ नहीं कर पा रहे हैं.

 

कुक पिछली सात पारियों में 115 रन ही बना सके हैं. इसके अलावा कप्तान के तौर पर भी उनके नाकाम रहने से कई पूर्व क्रिकेटरों ने उन्हें हटाने की मांग की है.

 

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वान ने कहा कि कुक में 13000 टेस्ट रन बनाने की क्षमता है लेकिन अगर वह इसी तरह खराब फॉर्म में रहे तो उनका भविष्य अंधकारमय है.

 

उन्होंने डेली टेलीग्राफ में अपने कालम में लिखा ,‘‘मुझे पता है कि इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने कुक को काफी समय दिया है लेकिन कई बार स्वीकार करना पड़ता है कि कुछ तो गड़बड़ है. मुझे लगता है कि कुक चाहते हैं कि चयनकर्ता दखल देकर उन्हें इस अग्निपरीक्षा से बचाये. उनमें 13000 टेस्ट रन बनाने की क्षमता है.’’ उन्होंने कहा ,‘‘ कुक को छह महीने का ब्रेक लेकर परिवार के साथ समय बिताना चाहिये.

 

शेन वार्न 2003 में प्रतिबंध के कारण एक साल बाहर रहे और उसके बाद अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. कुक को आराम देना कठिन फैसला होगा लेकिन उसे दबाव से बचाने के लिये ऐसा करना होगा.’’ इंग्लैंड के पूर्व हरफनमौला और टेस्ट कप्तान इयान बाथम ने कहा कि कप्तानी के बोझ का असर कुक के प्रदर्शन पर पड़ा है. उन्होंने द मिरर में लिखा ,‘‘ मुझे लगता है कि उसे खेल से ब्रेक की जरूरत है. मुझे उसके लिये बुरा लग रहा है. उसने बतौर कप्तान पहले कुछ मैचों में शतक जमाये लेकिन अब अच्छी बल्लेबाजी नहीं कर पा रहा.’’ ब्रिटेन के अखबारों का भी मानना है कि कुक के लिये अच्छा यही होगा कि वह कप्तानी छोड़ दे.

 

गार्डियन ने लिखा ,‘‘ शायद कप्तानी की जिम्मेदारी से फारिग होने के बाद वह अच्छा खेल सके. इयान बेल को यह जिम्मेदारी दे दी जानी चाहिये ताकि अप्रैल में वेस्टइंडीज के खिलाफ कुक तरोताजा होकर खेल सके.’’ डेली टेलीग्राफ ने भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और कुक की तुलना करते हुए कहा कि धोनी की अप्रत्याशित रणनीतियां कारगर साबित हुई है .

 

इसने कहा ,‘‘ धोनी हमेशा ऐसा कुछ करते हैं जो किसी ने सोचा ना हो. आईपीएल देखने वालों को पता होगा कि किस तरह वह गेंदबाजी और बल्लेबाजी में बदलाव करते हैं. विश्व कप 2011 फाइनल में खराब फार्म में होने के बावजूद वह पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिये उतरे और नाबाद 91 रन बनाकर मैच जीता. उन्होंने तत्कालीन भारतीय कोच गैरी कर्स्टन से पूछे बिना ऐसा किया. अब उन्होंने इंग्लैंड पर जीत अपने सीवी में जोड़ ली है.’’

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