श्रीनिवासन को बीसीसीआई का चुनाव लड़ने से रोकने से कोर्ट ने किया इंकार

By: | Last Updated: Monday, 13 October 2014 12:25 PM

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एन श्रीनिवासन को बीसीसीआई की सालाना आम सभा में 20 नवंबर को हिस्सा लेने से रोकने और 30 सितंबर से पहले बोर्ड के चुनाव कराने में असफल रहने के कारण इसके पदाधिकारियों के पद पर बने रहने को गैरकानूनी घोषित करने से आज इंकार कर दिया.

 

शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मसले पर गौर करने से पहले वह जस्टिस मुकुल मुद्गल समिति की जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष का इंतजार करेगी. यह समिति आईपीएल में सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण की जांच कर रही है और उसे 10 नवंबर तक अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल करनी है.

 

जजों ने कहा, ‘‘जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार कीजिये. चुनाव के लिये स्थिति स्पष्ट होने दीजिये. हमने पिछले आदेश (सितंबर 2013) में उन्हें चुनाव में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी लेकिन यह भी कहा था कि वह अगले आदेश तक पद (अध्यक्ष) ग्रहण नहीं करेंगे.’’ न्यायाधीशों ने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार (कैब) से कहा, ‘‘उस समय तक आप खामोश रहिये. इस समय हमारा वाषिर्क आम सभा से कोई सरोकार नहीं है. कृप्या न्यायमूर्ति मुदगल समिति की रिपोर्ट पेश किये जाने का इंतजान कीजिये.’’ यह संगठन चाहता था कि वाषिर्क आम सभा की बैठक को 30 सितंबर के बाद स्थगित किये जाने को गैरकानूनी घोषित किया जाये.

 

कैब की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नलिनी चिदंमबरम ने यह भी कहा कि चूंकि वाषिर्क आमसभा की बैठक 30 सितंबर से पहले नहीं हुयी है, इसलिये किसी भी पदाधिकारी को बीसीसीआई की कार्य समिति में पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है.

 

उन्होंने यह भी कहा कि श्रीनिवासन को कोर्ट ने बीसीसीआई के अध्यक्ष के रूप में काम नहीं करने का निर्देश दिया था तो फिर वह आगामी चुनाव कैसे लड़ सकते हैं. लेकिन कोर्ट ने कहा कि शीर्ष अदालत के पिछले साल के आदेश ने स्पष्ट किया था कि यह व्यवस्था अगले आदेश तक ही है और बीसीसीआई का चुनाव लड़ने के अयोग्य नहीं है. कोर्ट ने न्यायमूर्ति मुद्गल समिति की रिपोर्ट मिलने से पहले ही श्रीनिवासन के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाने के कैब के सचिव आदित्य वर्मा के अनुरोध पर सवाल उठाया.

 

न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘अत: आप यह अर्जी दायर कर रहे हैं कि उन्हें चुनाव नहीं लड़ने दिया जाये जबकि उनके उपर तलवार लटकी हुयी है. कल किसे पता है कि उन्हें आरोप मुक्त भी किया जा सकता है. यदि चुनाव हुये तो उनके अधिकार का क्या होगा.’’ यह महसूस करते ही कि कैब को कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है, चिदंबरम ने कोर्ट से आग्रह किया, ‘उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति देने के बारे में कोई सकारात्मक आदेश नहीं दिया जाये.’ पहले यह मामला दस नवंबर के लिये सूचीबद्ध था लेकिन बीसीसीआई ने कोर्ट को सूचित किया कि सहकारी समिति के रजिस्ट्रार ने वाषिर्क आम सभा की बैठक 20 नवंबर को करने की अनुमति दे दी है.

 

इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही न्यायाधीशों ने कैब से कहा कि उसका सरोकार तो सिर्फ आईपीएल के पिछले संस्करण में स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी से जुड़े मसले तक ही है.

 

कैब ने इस अर्जी में दवा किया था कि श्रीनिवासन ने सात सितंबर को चेन्नई में अनौपचारिक रूप से बीसीसीआई के सदस्यों को इकट्ठा किया था और वह खुद तमिलनाडु क्रिकेट एसेासिएशन के प्रतिनिधि के रूप में इसमे शामिल हुये तथा उन्हें इस बात के लिये राजी किया कि बोर्ड की वाषिर्क आम सभा की बैठक सितंबर, 2014 में नहीं होगी.

 

न्यायमूर्ति मुद्गल समिति इस प्रकरण में श्रीनिवासन और 12 प्रमुख खिलाड़ियों की भूमिका की जांच कर रही है. समिति ने 29 अगस्त को सीलबंद लिफाफे में अपनी अंतरिम रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी थी.

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Web Title: court on bcci election
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