क्रिकेट कथा: तो पहले विश्वकप में यहां अटक गया था भारत...

By: | Last Updated: Saturday, 22 November 2014 9:09 AM

क्रिकेट कथा में आज बात पहले विश्वकप में भारत के तीसरे मैच की. बेहद रोमांचक मौका था. ये मैच भारत के लिए इसलिए जरूरी था कि अगर हम ये मैच जीत जाते तो पहले विश्वकप के सेमीफाइल में पहुंच जाते. इस मैच से पहले भारत इंग्लैंड से हार चुका था लेकिन ईस्ट अफ्रीका से जीत चुका था. ग्रुप ए में ये करो या मरो का मैच था न्यूजीलैंड के खिलाफ.

 

विश्वकप में भारत का पहला रन आउट

टॉस भारत के कप्तान एस वेंकटराघवन ने जीता. भारत ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया. सुनील गावस्कर और फारुख इंजीनियर की सलामी जोड़ी मैदान में उतरी. सुनील गावस्कर ने तेज खेलने की कोशिश की लेकिन 14 गेंदों पर 12 रन बनाकर वापिस लौट गए. फारुख इंजीनियर (24) और अंशुमान गायकवाड(37) ने पारी को संभाला लेकिन गुंडप्पा विश्वनाथ(2), ब्रजेश पटेल(9) के विकटों ने भारत की स्थिति को कमजोर किया. इस मैच में सोलकर (13) मदन लाल(20) मोहिंदर अमरनाथ(1) भी स्कोर बोर्ड में ज्यादा रन नहीं जोड़ सके. भारत के विकेट नियमित अंतराल पर गिरते गए. इस मैच में सबसे बड़े स्कोरर रहे आबिद अली जिन्होंने 70 रन बनाए. इस मैच तक भारत रन चुराने की कला सीख रहा था क्योंकि आखिरी गेंद पर बिशन सिंह बेदी रन आउट उन्होंने 6 रन बनाए थे जबकि सामने थे कप्तान वेंकटराघवन. भारत की पारी 6 ओवरों में 230 रन पर सिमट गई.

 

टर्नर ने रोक दिया रास्ता

उन दिनों 230 का स्कोर छोटा स्कोर नहीं था. ग्रुप ए के इससे पिछले मैच में इंग्लैंड न्यूजीलैंड को 266 रन के स्कोर पर 80 रन से रौंद चुका था. न्यूजीलैंड को 231 हासिल करने से रोकने का जिम्मा था मदन लाल, अमरनाथ , बिशन सिंह बेदी , वेंकटराघवन और ऑलराउंडर आबिद अली के पास. भारत ने न्यूजीलैंड के तीन विकेट 70 रन पर गिरा भी दिए थे. लेकिन फिर ग्लेन टर्नर की जम गए जिन्हें भारतीय गेंदबाज आखिर तक आउट नहीं कर पाए. उन्होंने 177 गेंदों पर 114 रन की पारी खेली. न्यूजीलैंड ने 59वें ओवर में 233 रन बना लिए. भारत विश्वकप की दौड़ से बाहर हो गया.

 

ग्रुप ए से इंग्लैंड और न्यूजीलैंड ने पहले विश्वकप का सफर तय किया तो वहीं ग्रुप बी से ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज सेमीफाइनल में पहुंची. विश्वकप का ये इकलौता सेमीफाइल है जहां भारतीय उपमहाद्वीप की कोई टीम सेमीफाइनल में नहीं पहुंची है. तब से अब तक क्रिकेट और क्रिकेट के पावर सेंटर दोनों बदल चुके हैं अब क्रिकेट टीम इंडिया के बिना पूरा नहीं हो सकता. 1975 के बाद से भारत दो बार विश्वकप कप जीत चुका है और एक बार फिर विश्वकप जीतने के इरादे से उतरेगा.

 

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विश्वकप क्रिकेट में किसने डाली थी पहली गेंद

विश्वकप के पहले मैच में गावस्कर से शर्मा गए थे कछुए  

 

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