टेनिस कोर्ट में पेस ने रचा जीत का नया इतिहास

टेनिस कोर्ट में पेस ने रचा जीत का नया इतिहास

दिग्गज जब इतिहास रचते हैं तो उनकी उम्र नहीं देखी जाती. वो कहते हैं न उम्र सिर्फ एक नंबर है और इसे ही सच साबित कर दिखाया है भारते के टेनिस दिग्गज लिएंडर पेस ने. दो महीने बाद 45 साल के होने वाले पेस ने टेनिस इतिहास में सबसे अधिक डेविस कप डबल्स मुकाबले जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया.

By: | Updated: 07 Apr 2018 01:34 PM
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नई दिल्ली: दिग्गज जब इतिहास रचते हैं तो उनकी उम्र नहीं देखी जाती. वो कहते हैं न उम्र सिर्फ एक नंबर है और इसे ही सच साबित कर दिखाया है भारते के टेनिस दिग्गज लिएंडर पेस ने. दो महीने बाद 45 साल के होने वाले पेस ने टेनिस इतिहास में सबसे अधिक डेविस कप डबल्स मुकाबले जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया.


चीन के खिलाफ चीन में खेले जा रहे एशिया ओसियाना मुकाबले में विवादित पार्टनर रोहन बोपन्ना के साथ खेलते हुए पेस ने माओ जिन गोंग और जी झांग की जोड़ी को 5-7, 7-6 (5), 7-6(3) से हराते हुए अपना नाम रिकॉर्ड बुक में दर्ज करा लिया. पेस की ये रिकॉर्ड 43वीं जीत है.


पेस ने टीम को जीत उस वक्त दिलाई जब भारत चीन 2-0 से पीछे चल रहा था. भारत के सामने पांच साल में पहली बार एशिया-ओसियाना से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है. भारत को अभी डेविस कप में दो रिवर्स सिंग्लस मुकाबले खेलने हैं. रामकुमार रामनाथन और सुमित नागल दोनों के शुक्रवार को अपने सिंग्ल मुकाबले हार चुके हैं.


डेविस कप में पिछले कई वर्षों से भारत के नायक रहे पेस लंबे समय से इटली के निकोला पीटरांजली के साथ 42 जीत की बराबरी पर थे लेकिन आखिर में वह उन्हें पीछे छोड़ने में सफल रहे.


पेस ने 16 साल की उम्र में 1990 में जीशान अली के साथ डेविस कप का पहला मुकाबला खेला था. अब जीशान टीम के कोच हैं. इसके बाद उन्होंने महेश भूपति के साथ सफल जोड़ी बनायी जो अब टीम के कप्तान हैं.


अपने चमकदार करियर में पेस ने भूपति के साथ मिलकर डेविस कप में लगातार सबसे अधिक 24 मैच जीतने का रिकॉर्ड बनाया. इन दोनों खिलाड़ियों ने नब्बे के दशक के आखिरी वर्षों में एटीपी सर्किट पर धूम मचायी थी.


बोपन्ना चीन के खिलाफ इस मुकाबले में पहले पेस के साथ खेलने के लिये तैयार नहीं थे लेकिन आज उन्होंने अच्छा खेल दिखाया. तीसरे सेट में सर्विस गंवाने के अलावा उनका सर्विस गेम बहुत अच्छा रहा. उनकी तीखी सर्विस से पार पाना चीनी खिलाड़ियों के लिये आसान नहीं रहा. दूसरी तरफ पेस ने नेट पर हमेशा की तरह बेहतरीन खेल दिखाया.


पहले सेट में एक दूसरे की सर्विस तोड़ने के बाद दोनों जोड़ियां 5-5 से बराबरी पर थी. तब 11वें गेम में पेस ने सर्विस गंवायी. गोंग ने इसके बाद अगले गेम में अपनी सर्विस पर टीम को आगे कर दिया.


भारतीय खिलाड़ियों को ब्रेक प्वाइंट हासिल करने के अधिक मौके मिले लेकिन वे इसका फायदा नहीं उठा पाए. बोपन्ना की सर्विस हालांकि काफी तीखी थी जिन पर चीनी खिलाड़ी रिटर्न करने में असफल दिखे. दूसरे सेट में कोई भी टीम ब्रेक प्वाइंट नहीं ले पायी.


गोंग ने 5-6 के स्कोर पर दबाव में सर्विस की. भारतीयों के पास एक सेट प्वाइंट भी था लेकिन वे इसका फायदा नहीं उठा पाये और सेट टाईब्रेकर तक खिंच गया. टाईब्रेकर भी काफी कड़ा रहा. इसमें पहले स्कोर 3-3 और फिर 5-5 रहा. बोपन्ना ने वॉली विनर से सेट प्वाइंट हासिल किया और पेस ने आसानी से अगला अंक बनाकर स्कोर बराबरी पर ला दिया.


तीसरे और निर्णायक सेट में भारतीय जोड़ी शुरू में 3-1 से आगे थी लेकिन इसके बाद उसने लगातार तीन गेम गंवाये जिससे स्कोर 3-4 हो गया. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अब तक प्रभावशाली सर्विस करने वाले बोपन्ना छठे गेम में अपनी सर्विस नहीं बचा पाये थे.


पेस 5-6 के स्कोर पर सर्विस के लिये आए और एक समय स्कोर 0-30 था लेकिन वह आखिर में इस सेट को टाईब्रेकर तक खींचने में सफल रहे. भारतीयों ने अपने अनुभव का फायदा उठाकर यादगार जीत दर्ज की.

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