चमकते चमकते कहीं खो गया एक तारा

चमकते चमकते कहीं खो गया एक तारा

फुटबॉलर नितिशा अब केवल यादों में है. पंद्रह साल की होते होते उसका खेल सबको प्रभावित कर रहा था. उसकी उपलब्धियां और उसे खेलते देख यही लगता था कि भारतीय फुटबॉल का यह नया चमकता सितारा है.

By: | Updated: 16 Dec 2017 08:09 PM
delhi-15-year-old-footballer-died-in-australia

नई दिल्ली: फुटबॉलर नितिशा अब केवल यादों में है. पंद्रह साल की होते होते उसका खेल सबको प्रभावित कर रहा था. उसकी उपलब्धियां और उसे खेलते देख यही लगता था कि भारतीय फुटबॉल का यह नया चमकता सितारा है. मगर नियति कुछ और चाहती थी. ऑस्ट्रलिया से आई यह खबर कि ऑस्ट्रेलिया पैसेफिक स्कूल गेम्स में भाग लेने गई भारतीय फुटबॉलर नितिशा नेगी समुद्र में डूब गई, आंखों को नम कर गई.


उत्तराखंड की राजधानी दून कभी फुटबॉल का एक केंद्र रहा है. उत्तराखंड से फुटबॉल के कई जाने-माने सितारे निकले. मोहन बगान ईस्ट बंगाल जैसे क्लब में यहां के खिलाडी खेलते रहे. एसएसबी यंगमैन में यहां के फुटबॉलरों ने अपने खेल हुनर का परचम फहराया. दून में फुटबॉल को अगर सुनियोजित रूप से बढावा दिया जाता तो आज यह कोलकत्ता या गोवा की तरह फुटबॉल का एक गढ होता. धीरे-धीरे फुटबॉल का इतिहास तो रह गया लेकिन खेल धुंधला होता चला गया. उसकी जगह क्रिकेट और पर्वतारोहण ने ले ली. और आज अलग अलग प्रदेशों में रणजी में इस राज्य के पांच खिलाडी खेल रहे हैं जिनमें तीन नियमित ओपनिंग करते हैं. लेकिन जहां तक बात फुटबॉल की है इस खेल को प्रोत्साहन नहीं मिल सका. ऐसे में फुटबॉल की परंपरा को आगे बढाने और महिला फुटबॉल के प्रति आकर्षण जगाने के लिए नितिशा प्रतीक बन रही थी. सोशल मीडिया में भी उसके बारे में काफी कुछ लिखा जाता रहा. उसकी तस्वीरें प्रकाशित होती रही. खासकर ऑस्ट्रेलिया जाने से पहले उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई थी.


नितिशा 2दो दशक पहले की बात है. अखबार के खेल पेज या पत्र पत्रिकाओं में छोटी सी लडकी मार्टिना की फोटो देखने को मिलती थी. यह लडकी पोनटेल बालों में किसी गुडिया की तरह लगती थी लेकिन टेनिस के कोर्ट पर वह घंटो मेहनत करती थी. उसको खेलते हुए देखने के लिए लोग खास तौर पर टेनिस कोर्ट पहुंचते थे. उसका बचपन बता रहा था कि वह आने वाले दिनो की मार्टिना नवरातिलोवा है. आखिर कोई विश्वास था कि उसके माता-पिता ने उसे मार्टिना ही नाम दिया था. और उसने अपने हुनर प्रतिभा और अथक मेहनत से मार्टिना हिंगिस के नाम से शोहरत पाई और टेनिस की दुनिया में छा गई.ऐसे ही नितिशा को फुटबॉल खेलते देख लगता था कि एक दिन यह फुटबॉलर अपनी प्रतिभा से खेल प्रेमियों को मुग्ध करेगी. वह जी भर कर खेल रही थी. ट्रॉफी और शील्ड से उसका घर सजा था. लेकिन उसे और बडी शोहरत पाना था. केवल शोहरत ही नहीं पाना था बल्कि लडकियों को फुटबॉल के मैदान में भी लाना था. वह स्कूल फेडरेशन ऑफ इंडिया की तरफ से ऑस्ट्रेलिया में गई थी. वहां पांच लड़कियां समुद्र में गई चार को बचा लिया गया लेकिन नितिशा का जीवन इतना ही था.


एक तरफ जहां गुजरात में चुनाव हो रहे हो और दूर इटली में विराट कोहली अनुष्का की शादी की रोमांचित खबरें आ रही हो तब इस छोटी और किसी हद तक अनजान प्रतिभा की यह दास्तान दब कर रह गई. जब मीडिया में यह प्रचारित हो रहा था कि जहां विराट और अनुष्का शादी रचा रहे हैं वो जगह कैसी है. दादा-दादी या नाना-नानी को बुलाया या नही. उस चकाचौंध में मीडिया खेल की ही इस विराट प्रतिभा को लगभग नजरअंदाज कर गई. जबकि इसका संज्ञान कई तरह से लिया जाना चाहिए था. आखिर कैसे स्कूली बच्चियों को लेकर इतनी असुरक्षा बरती गई. एक स्कूली टीम अगर घूमने के लिए भी विदेश जाती है तो सुरक्षा के आवश्यक प्रबंध होने चाहिए. हर स्थिति के लिए तत्परता जरूरी है. यहां तो एक उभरती फुटबॉल खिलाडी का निधन हुआ था. उसके गृह राज्य उत्तराखंड में भी खेल विभाग या किसी स्तर पर कोई संवेदना का स्वर नहीं दिखा. यह कोई सामान्य घटना नहीं है. देश और उत्तराखंड ने अपनी एक विभूति को खोया है. खेल जगत ने उभरती प्रतिभावान फुटबॉलर को खोया है. दिल्ली का एक परिवार जिसे गौरव मिल रहा था बिलखता रह गया.


नितिशा फुटबॉल खेलने इस दुनिया में आई. स्कूल के मैदानों में वह खेलती तो दर्शक दीर्घा नितिशा नितिशा की गूंज होती. उसे खेलते हए देखने का अलग रोमांच था. परिवार के लोग कहते थे, अगर रात में भी उसके लिए अवसर होता तो वह फुटबॉल खेलने निकल सकती थी. फुटबॉल उसके लिए किसी जुनून की तरह था. यह परिवार उस वक्त का इंतजार कर रहा था जब नितिशा भारतीय टीम में शामिल होती. खेल जगत में उसकी पहचान बन रही थी. दिन दूर नहीं था लेकिन ऑस्ट्रेलिया का समुद्र का पानी उसके लिए दैत्य की तरह खडा था. नियति में ऐसा ही था. जो फूल खिल रहा था उसे हवा के एक झौंके ने उडा दिया.


nitishaसंगीत की दुनिया में मास्टर मदन को याद किया जाता है. जब देश में शास्त्रीय संगीत में बहुत बडे बडे संगीत के नाम थे, गुणी पारखियों की जमात थी, तब पंजाब से निकला एक छोटा सा बच्चा शास्त्रीय संगीत की धमक दिखा रहा था. एक दम सधा हुआ मानों जन्म के साथ ही संगीत की प्रतिभा अपने साथ लाया हो. बचपन ही उसे मास्टर होने का खिताब दे रहा था. वह शास्त्रीय संगीत के पक्के रागों को गाता, भजन गाता. जिस जगह भी तानपुरे को लेकर बैठता लोग वाह वाह करने लगते. शास्त्रीय संगीत की बडी महफिलों में उसे किसी सिद्ध की तरह ही आमंत्रित किया जाने लगा था. शास्त्रीय संगीत का वह सितारा था और उसे आगे सितारों में धुव की तरह चमकना था. न जाने आगे जीवन में वो क्या क्या दे जाता. अफसोस नियति को शायद यह भी मंजूर न था. उका जीवन भी बहुत छोटा था.


शस्त्रीय संगीत के लिए एक काली रात आई और उस बच्चे को इस दुनिया से ले गई. शायद किसी और लोक में जहा उसके स्वर गूंजते होंगे. रह गए हमारे पास उसके रिकॉर्ड किए केवल आठ या नौ गीत भजन. जब भी सुनते हैं कसक सी होती है. इतना छोटा जीवन और इतना कुछ समाया था उसमें. लेकिन तब भी मास्टर मदन को ख्याति मिली आज भी रह रह कर उन्हें याद किया जाता है. लोग वक्त में उन गीतों को सुन लेते हैं. उनकी चर्चा कर लेते हैं. उनकी पुण्यतिथि पर लेख भी पढने को मिल जाते हैं. लेकिन नितिशा को अपने क्षेत्र में अब सोने की तरह चमकना था. उसकी उपलब्धियां आगे के लिए उम्मीद की तरह थी. बेशक महिला फुटबॉल यहां क्रिकेट, हॉकी, बाक्सिंग की तरह लोकप्रिय नहीं. उसके सितारे खिलाडी उस तरह की चर्चा नहीं पाते. लेकिन आज सोशल मीडिया और धीरे-धीरे दूसरे खेलों को भी समझ देख रहे लोगों के रुझान में यह लग रहा था कि नितिशा आने वाले समय की एक शानदार सेलिब्रिटी होंगी. वक्त उसके पास था. मेहनत करना वो जानती थी. फुटबॉल लेकर चपलता से आगे बढना, पास देना, शानदार किक लगाना, हेड करना हर तरह से पारंगत हो रही थी. उसके कॉर्नर शॉट पर साथी खिलाडी गोल मारा करते थे. अफसोस अब यह एक इतिहास है. हां नितिशा का जीवन व्यर्थ नहीं गया. वह खेल जगत में फुटबॉल में हमेशा लोगों के मन में रहेगी. नई लडकियों के लिए वह प्रेरणा बनेगी. जरूर कल कोई दूसरी नितिशा आएगी इस नितिशा को सलामी देने के लिए.

फटाफट ख़बरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर और डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App
Web Title: delhi-15-year-old-footballer-died-in-australia
Read all latest Sports News headlines in Hindi. Also don’t miss today’s Hindi News.

First Published:
Next Story टेस्ट क्रिकेट से दूर हुए एलेक्स हेल्स