नाकामी से सीख लेकर निखरे हैं लोकेश राहुल

By: | Last Updated: Thursday, 30 October 2014 2:01 PM

नई दिल्लीः फिरोजशाह कोटला मैदान पर मध्य क्षेत्र के खिलाफ दिलीप ट्रॉफी फाइनल मुकाबले के दूसरे दिन गुरुवार को शानदार सैकड़ा लगाकर दक्षिण क्षेत्र को पहली पारी की तुलना में बढ़त दिलाने वाले कर्नाटक के बल्लेबाज लोकेश राहुल नाकामी से सीख लेते हुए एक निखरे हुए खिलाड़ी के तौर पर सामने आए हैं. बैंगलुरू में 1992 में जन्मे इस विकेटकीपर बल्लेबाज को कर्नाटक रणजी टीम में पर्दापण के एक साल बाद 2011-12 सत्र में ही बाहर का रास्ता दिखाया गया था लेकिन आसान बैकफुट के साथ सधे हुए स्टोक्स खेलने वाले राहुल ने नाकामी से हार नहीं मानी और खुद को साबित करते हुए फिर से रणजी टीम में वापसी की.

 

बीते रणजी सत्र में राहुल ने 1000 से अधिक रन बनाए और गुरुवार की उनकी नाबाद 168 रनों की पारी यह साबित करती है कि उन्होंने वे हजार रन यूंही नहीं बना लिए. अपने करियर का पांचवां शतक लगाने वाले लोकेश ने बीते साल रणजी मुकाबले में मुम्बई के खिलाफ उस समय टीम के लिए 133 रनों की नायाब पारी खेली थी, जब उनकी टीम ने एक समय 84 रनों पर 4 विकेट गंवा दिए थे.

 

लोकेश ने दिन का खेल समाप्त होने के बाद पत्रकारों से कहा, “द्रविड़ से तुलना किए जाने से मैं खुश हूं. मैंने द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर की बल्लेबाजी बहुत ध्यान से और खूब देखी है. लेकिन बड़ी बात तब होगी जब मैं उतने रन बना सकूं जितने द्रविड़ ने बनाए हैं.”

 

यही नहीं, लोकेश ने महाराष्ट्र के खिलाफ फाइनल में पहली पारी में 131 रन बनाते हुए अपनी टीम को मजबूत आधार दिया था. लम्बी पारियां खेलने की इच्छा रखने वाले राहुल के दोस्त उनकी तुलना राहुल द्रविड़ से करते हैं. लोकेश हालांकि इससे इत्तेफाक नहीं रखते. लोकेश को तुलना पसंद नहीं. वह निश्चित तौर पर भारत के लिए खेलना चाहते हैं लेकिन वह नहीं चाहते कि उनकी तुलना द्रविड़ या फिर किसी और के साथ की जाए.

 

लोकेश के लिए सबसे सकारात्मक बात यह है कि उनकी उम्र महज 22 साल है और भारतीय टीम को आने वाले वक्त में एक अच्छे विकेटकीपर बल्लेबाज की जरूरत है क्योंकि कप्तान महेंद्र सिंह धौनी के अलावा इस समय भारत को बारी-बारी से सेवाएं दे रहे दिनेश कार्तिक और रिद्धिमान साह 30 साल से अधिक उम्र के हो चुके हैं.

 

लोकेश को हालांकि टीम इंडिया तक पहुंचने के लिए खुद को अभी और साबित करना है लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि वह अपनी 168 रनों की नाबाद पारी की मदद से फिरोजशाह कोटला में मौजूद राष्ट्रीय चयनकर्ता-सबा करीम और विक्रम राठौर को प्रभावित करने में सफल रहे.

 

लोकेश ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद कहा, “भारतीय टीम तक की प्रतिस्पर्धा कठिन होती जा रही है. इस कारण मैं लगातार सुधार चाहता हूं. इसका कारण यह है कि जब भी मुझे राष्ट्रीय टीम में चुना जाए, मैं उसके लिए पूरी तरह तैयार रहूं.”

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Web Title: duleep trophy
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