द्रविड़ ने कहा था उसे सब पता है लेकिन ग्रेग को नियंत्रित नहीं कर सकता: गांगुली

By: | Last Updated: Monday, 3 November 2014 4:21 PM
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फोटो-(पीटीआई)

नई दिल्ली: सौरव गांगुली ने आज खुलासा किया कि राहुल द्रविड़ को पता था कि भारतीय कोच के कार्यकाल के दौरान ग्रेग चैपल क्या कर रहे थे लेकिन वह इस ऑस्ट्रेलियाई को नियंत्रित नहीं कर सकते थे.

 

गांगुली की यह प्रतिक्रिया सचिन तेंदुलकर की आत्मकथा के अंशों में हुए इस खुलासे के बाद आई है कि चैपल ने तेंदुलकर को स्तब्ध करने वाला सुझाव दिया था कि वह वेस्टइंडीज में 2007 में होने वाले विश्व कप से कुछ महीने पहले द्रविड़ से भारत की कप्तान अपने हाथ में ले लें.

 

गांगुली ने कहा, ‘‘मैं उस समय में वापस नहीं जाना चाहता. आप नतीजों में देख सकते हो. यह भारतीय क्रिकेट के सबसे बुरे दौर में से एक था और बदतर दौर जिससे क्रिकेट गुजर सकता है विशेषकर मेरे जैसा कोई खिलाड़ी. एक के बाद एक झूठ बोला जा रहा था और छह महीने बाद वह राहुल को हटाकर सचिन को कप्तान बनाना चाहता था. यह दिखाता है कि वह व्यक्ति अपना काम कैसे करता था.’’ इस पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा, ‘‘मुझे भारत के अगले दौर (2007 विश्व कप के) के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाने की हैरानी नहीं थी. मैं जब टीम में वापस आया तो मैंने काफी समय बाद द्रविड़ से इस बारे में बात की और उसे बताया कि इस तरह की चीजें हो रही हैं. उसने कहा कि उसे पता है लेकिन वह ग्रेग को नियंत्रित नहीं कर सकता.’’

 

तेंदुलकर ने अपनी किताब में खुलासा किया है कि चैपल ने एक बार कहा था कि मुझे सौरव के कारण कोच का पद मिला लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह पूरे जीवन सौरव का पक्ष लेते रहेंगे. इस बारे में पूछने पर गांगुली ने कहा, ‘‘क्या ऐसा था.’’ इस खुलासे पर हैरानी जताते हुए गांगुली ने ‘हेडलाइंस टुडे’ से कहा, ‘‘मैंने इससे पहले इसके बारे में नहीं सुना. यह निश्चित तौर पर चैपल और सचिन के बीच बंद दरवाजे के पीछे बात हुई होगी. लेकिन मैं मानता हूं कि यह सच था और मुझे लगता है कि यह बिलकुल बेवकूफाना था.’’ गांगुली ने कहा कि चैपल पर विश्वास नहीं किया जा सकता था.

 

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने 2005 नवंबर दिसंबर में अपनी कप्तानी गंवाई और विश्व कप 2007 की शुरूआत में था. राहुल कप्तान बना. और आठ महीने बाद उसे एक और कप्तान (सचिन के रूप में) की जरूरत थी. यह उसके विचारों को दर्शाता है. दर्शाता है कि भारतीय क्रिकेट को उसने कितना नुकसान पहुंचाया. यह व्यक्ति के चरित्र को दर्शाता है. वह ऐसा व्यक्ति था जिस पर विश्वास नहीं किया जा सकता था फिर चाहे वह गांगुली हो, द्रविड़ हो या तंेदुलकर.’’ गांगुली ने उम्मीद जताई कि एक दिन वह भी कहानी का अपना पक्ष बता पाएंगे.

 

उन्होंने कहा, ‘‘काफी चीजें लिखी गई (मेरे बारे में) और मैंने अपनी कप्तानी गंवा दी. बाद में मैंने टीम में वापसी की और भारत के लिए खेला लेकिन यह काफी अच्छा नहीं था.’’ गांगुली ने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि सचिन जैसी विश्वसनीयता के व्यक्ति ने यह बात की. उम्मीद करता हूं कि एक दिन मैं भी कहानी का अपना पक्ष रख पाउंगा. जिंबाब्वे दौर से लेकर अगले एक से डेढ़ साल का समय. मैंने खुद को ऐसा करने से रोके रखा लेकिन मुझे खुशी है कि सचिन ने ऐसा किया.’’

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