इस गोल्ड के मायने

By: | Last Updated: Thursday, 2 October 2014 4:24 PM

नई दिल्लीः 16 साल बाद आपको कोई चीज हासिल हो और वो भी अपने चिर प्रतिद्वंदी को हराकर…ऐसी जीत के मायने ही अलग होते हैं. दक्षिण कोरिया में चल रहे एशियन खेलों में भारत के हाथ ऐसी ही जीत लगी. भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान को हराकर न सिर्फ गोल्ड मेडल अपने नाम किया बल्कि 2016 में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए भी क्वालिफाय किया.

 

ग्रुप मैच में पाकिस्तान के हाथों 2-1 से मात खाने वाली भारतीय टीम ने इस मैच में शुरुआत थोड़ी धीमी रखी लेकिन जैसे-जैसे समय बढ़ता गया, मैन इन ब्लू फॉर्म में लौटते गए और पाकिस्तान को कड़ी टक्कर दी. और पेनेल्टी शूटआउट तक खींचे मुकाबले में भारत को 4-2 से जीत मिली.

 

भारत की ये जीत कई मायनों में खास है. 1998 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने आखिरी बार एशियन खेलों में गोल्ड जीता था, और आज 16 साल बाद हॉकी में भारत से सुनहरा तमगा हासिल किया. इसका मतलब ये कि मौजूदा टीम के हर खिलाड़ी के लिए ये जीत किसी सपने के पूरे होने जैसी है. मेडल सेरेमनी के दौरान टीम के युवा खिलाड़ी जिस खुशी से अपने पदक को निहार रहे थे उससे ये बात बिल्कुल साफ है कि उनके लिए इस मेडल के क्या मायने हैं. यही नहीं भारत ने 2016 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए भी क्वालिफाय कर लिया. साथ ही भारत ने पाकिस्तान को पटखनी देकर पहला स्थान हासिल किया. पाकिस्तान अब तक एशियन गेम्स में 8 बार गोल्ड मेडल जीत चुका है, इस वजह से लोगों का दांव पाकिस्तान पर था, लेकिन सरदार सिंह की अगुवाई में टीम ने इतिहास रच दिया. इस जीत में एक बड़ा योगदान रहा टीम के चीफ कोच टैरी वॉल्श और कोच ज्यूड फीलिक्स का, जिन्होंने नए नियमों के साथ टीम को ढालने में कोई कोताही नहीं बरती.

 

2008 में भारतीय टीम बीजिंग ओलंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाई थी, वहीं 2012 लंदन ओलंपिक तक पहुंचने के लिए भी भारत को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी, लेकिन इस बार भारत पूरे सम्मान के साथ खेलों के महाकुंभ में अपनी जगह पक्की कर ली. इस जीत का फायदा भारतीय टीम को दिसंबर में होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी में दिखने की भी उम्मीद है.

 

 

विश्व रैंकिंग में भारत की टीम 9वें नंबर पर है जबकि पाकिस्तान 11वें, इसलिए दोनों टीमों के बीच तगड़ी टक्कर देखने को मिली. सोने पर सुहागा रहा शूटआउट. एशियन गेम्स में आम पेनेल्टी शूटआउट की बजाय शूटआउट दिखा जिसमें खिलाड़ी गेंद को ले जाकर गोलकीपर को छकाते हुए गोलपोस्ट में गेंद डालने की कोशिश करनी होती है. भारत के खिलाड़ियों ने 4 मौकों पर पाकिस्तान के गोलकीपर इमरान बट को छकाया और गेंद गोल पोस्ट में डाल दी. भारत के गोलकीपर पी श्रीजेश ने भी कमाल का प्रदर्शन किया और पाकिस्तान की 4 कोशिशों में से 2 को नाकाम कर दिया. जैसे ही धरमवीर सिंह ने विजयी शॉट लगाया भारत के खिलाड़ी झूमते दिखे, वहीं पाकिस्तान के गोलकीपर इमरान बट के आंसू बता रहे थे कि उन्होंने कितना बड़ा मौका गंवा दिया.

 

सरदार सिंह की अगुवाई वाली भारतीय टीम में ज्यादातर खिलाड़ियों की उम्र 25 साल से कम है. टीम के कप्तान सरदार सिंह 28 साल की उम्र में टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी हैं. मतलब ये कि ये पोडियम फिनिश इन युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन को और बेहतर करने में मदद करेगी. 20 साल के आकाशदीप सिंह औऱ 21 साल के रमनदीप सिंह के लिए तो ये टूर्नामेंट करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि बन गया है. श्रीजेश, बीरेंद्र लाकड़ा, गुरबाज, गुरिंदर चांडी जैसे खिलाड़ियों का खेल एशियाड के बाद और निखरा है.

 

एशिया में तो हमने झंडा गाड़ दिया, अब बारी है दुनिया के दूसरे देशों के सामने मजबूत चुनौती पेश करने की. दिसंबर में होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम को काफी जोर आजमाइश करनी होगी क्योंकि अब भिड़ंत होगी ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूरोप की बाकी टीमों से.

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Web Title: hockey gold
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