वेटेल ने जीती हंगरी ग्रां प्री, फोर्स इंडिया को नहीं मिले अंक

By: | Last Updated: Sunday, 26 July 2015 4:31 PM
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बुडापेस्ट: फेरारी के जर्मन ड्राइवर सेबेस्टियन वेटेल ने आज यहां पहली बार हंगरी ग्रां प्री फार्मूला वन रेस जीतकर आर्यटन सेन्ना के 41 ग्रां प्री खिताब की भी बराबरी की. चार बार के विश्व चैंपियन ने सत्र की अपनी दूसरी रेस जीती.

 

उन्होंने जीत दर्ज करने के तुरंत बाद फ्रांसीसी ड्राइवर जूल्स बियांची को याद किया जिनकी पिछले साल जापान ग्रां प्री के दौरान चोटिल होने के बाद इस साल 17 जुलाई को निधन हो गया था. रेड बुल्स के दोनों ड्राइवर 21 वर्षीय रूसी डेनिल कवयाट दूसरे और ऑस्ट्रेलिया के डेनियल रिकाडरें तीसरे स्थान पर रहे.

 

रिकाडरें ने पिछले साल यह रेस जीती थी. टोर रोसों के मैक्स वर्सटैप्पन ने चौथा स्थान हासिल किया. उनके पिता जोस ने 1994 में यहां जीत दर्ज की थी. मैकलारेन के फर्नांडो अलोंसो को पांचवें और मर्सीडीज के लुईस हैमिल्टन को छठे स्थान से संतोष करना पड़ा.

 

लोटस के रोमने ग्रोजियां सातवें, मर्सीडीज के निको रोसबर्ग आठवें, मैकलारेन के जेनसन बटन नौवें और सौबर के मार्कस एरिक्सन दसवें स्थान पर रहे.

 

 

भारतीय टीम फोर्स इंडिया दोनों कारें रिटायर होकर बिना अंक लिए लौट आईं. निको हल्केनबर्ग की कार 41वें लैप में दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसका उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ा. वहीं सर्जियो पेरेज से भी 54वें लैप में टीम ने रिटायर होने के लिए कह दिया.

 

हल्केनबर्ग ने शुरुआत तो अच्छी की थी और वह रेस से अंक हासिल करते भी लग रहे थे, लेकिन तभी उनके कारण का फ्रंट विंग टूट गया और उनकी कार टायर बैरियर में जा टकराई.

 

बाद में पेरेज से भी ऐसी ही परिस्थिति में दुर्घटना से बचने के लिए रिटायर होने के लिए कह दिया गया.

 

फोर्स इंडिया ने ट्वीट किया, “निको की कार दुर्घटनाग्रस्त, रेस से बाहर हुए. शुक्र है कि वह ठीक हैं. निको के लिए रेस से इस तरह हटना वास्तव में शर्मनाक है, जबकि सातवें लैप तक शानदार गति में थे.”

 

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