गायब हो गई भारतीय हॉकी के ओलंपिक इतिहास की नायाब धरोहरें

By: | Last Updated: Thursday, 6 August 2015 10:31 AM
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चंडीगढ: भारतीय खेल प्राधिकरण के अधिकारियों के उदासीन रवैये के कारण भारतीय हॉकी के स्वर्णिम इतिहास की नायाब धरोहर गायब हो चुकी है. इतना ही नहीं साइ को महान ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर द्वारा 1985 में दान में दी गई यादगार धरोहरों के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

 

ये चीजें प्रस्तावित संग्रहालय बनाने के लिये दी गई थी जिनमें ओलंपिक ब्लेजर, पदक और दुर्लभ तस्वीरें शामिल थी लेकिन यह संग्रहालय कभी नहीं बना.

 

ओलंपिक तिहरे स्वर्ण पदक विजेता 91 बरस के बलबीर सिंह सीनियर ने 1985 में अपने पदक और धरोहरें तत्कालीन साइ सचिव को दी थी और तब उनसे कहा गया था कि इनकी नुमाइश राष्ट्रीय खेल संग्रहालय में की जायेगी. बलबीर सीनियर ने कहा कि उन्हें बाद में बताया गया कि संग्रहालय दिल्ली में बनाया जायेगा.

 

लंदन ओलंपिक 2012 से पहले जब इसके बारे में पूछा गया तो साइ अधिकारियों को इसकी कोई जानकारी नहीं थी. एक साल पहले खेलमंत्री सर्वानंद सोनोवाल और साइ अधिकारियों ने चंडीगढ में बलबीर सीनियर से उनके घर पर मुलाकात की तब मामले की जांच का वादा किया था.

 

इस बीच पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के वकीलों के एक समूह ने दिल्ली स्थित साइ कार्यालय और पटियाला के राष्ट्रीय खेल संस्थान से आरटीआई से जानकारी मांगी तो आश्चर्यजनक तथ्य सामने आये हैं. बलबीर सीनियर ने कहा था कि ओलंपिक पदकों और पद्मश्री को छोड़कर उनका सारा सामान उन्होंने दान कर दिया था जिसमें मेलबर्न ओलंपिक का कप्तान का ब्लेजर, तोक्यो एशियाड (1958) में जीते रजत समेत 36 पदक और सौ दुर्लभ तस्वीरें शामिल थी. बलबीर के नाती कबीर भोमिया ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के ओलंपिक संग्रहालय के लिये मेलबर्न खेलों का ब्लेजर चाहिये था जो लंदन ओलंपिक में नुमाइश में रखा जाना था. वह एकमात्र भारतीय और अकेले हाकी खिलाड़ी थे जिन्हें आधुनिक ओलंपिक के 116 साल के इतिहास के महानतम 16 खिलाड़ियों में चुना गया था.

 

कबीर ने कहा ,‘‘ मैने तभी साइ से उनका ब्लेजर लेने के लिये संपर्क किया. नानाजी (बलबीर सीनियर) के पास ओलंपिक पदकों के अलावा कुछ नहीं था लेकिन साइ अधिकारियों ने कहा कि उन्हें कोई जानकारी नहीं है .’’ खेल सोश्यलोजिस्ट और बलबीर के करीबी प्रोफेसर सुदेश गुप्ता ने कहा ,‘‘ यह शर्मनाक है . ये सामान हमारी राष्ट्रीय खेल धरोहरें थी . यदि यह भारत के महानतम खिलाड़ियों में शुमार बलबीर सिंह सीनियर के साथ हो सकता है तो मुझे लगता है कि यह सिर्फ उदासीन रवैये की बात नहीं है . इसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिये .’’ कबीर ने बताया कि इस मामले में पहली आरटीआई नौ दिसंबर 2014 को डाली गई थी जिसमें साधारण सवाल थे मसलन दिल्ली में जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में राष्ट्रीय खेल संग्रहालय बनाने के प्रस्ताव का क्या हुआ . बलबीर सीनियर के सामान संबंधी सवाल भी पूछे गए थे .

 

संबंधित अधिकारियों ने पांच जनवरी 2015 को भेजे जवाब में कहा कि दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में राष्ट्रीय खेल संग्रहालय बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं था और बलबीर सीनियर से सामान भी नहीं मिला था . दूसरी आरटीआई एनआईएस पटियाला में 19 दिसंबर 2014 को डाली गई जिसका जवाब दो जनवरी 2015 को मिला . इसमें कहा गया है कि उसे दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम से सामान मिला था जो एनआईएस पटियाला में नुमाइश के लिये रखा जाना था .

 

उन्होंने कहा ,‘‘ आगे पूछने पर एनआईएस पटियाला ने अगली आरटीआई पर जवाब में सामान की 74 पन्ने की सूची सौंपी . इसमें बलबीर सिंह सीनियर के सामान का जिक्र नहीं है .’’ पहली आरटीआई पर साइ के जवाब से नाखुश वकीलों ने साइ के अपीली प्राधिकरण में आरटीआई दाखिल की जो साइ ने दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम को भेज दी .

 

कबीर ने बताया ,‘‘ इस आरटीआई का जवाब 19 मार्च 2015 को मिला जिससे हम स्तब्ध रह गए . इसमें जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम द्वारा 1998 में एनआईएस पटियाला को भेजे गए सामान का ब्यौरा था . इसमें 23वें नंबर का सामान 1956 ओलंपिक का ब्लेजर था जो बलबीर सिंह सीनियर से मिला था . यह वही ब्लेजर है जो उन्हें दो बार भारतीय ओलंपिक दल का ध्वजवाहक होने की वजह से मिला था .

 

जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में एक और आरटीआई डालकर खास तौर पर पूछा गया था कि उन्हें बलबीर सिंह सीनियर से कोई सामान मिला था या नहीं . कबीर ने बताया ,‘‘ इसका जवाब आठ जून 2015 को मिला जिसमें पिछले जवाब में भेजी गई सूची थी . इसमें भी 23 नंबर पर ओलंपिक ब्लेजर का जिक्र था जो बलबीर सीनियर से मिला था .’’ उन्होंने कहा ,‘‘ इस लापता ब्लेजर के अलावा बाकी सामान का कोई जिक्र नहीं है . इनमें उनके 36 पदक और 100 ऐतिहासिक तस्वीरें शामिल हैं . उन्होंने ओलंपिक (1948, 1952 और 1956) पदकों के अलावा बाकी सब साइ के प्रस्तावित संग्रहालय के लिये दान कर दिया था .’’ बलबीर की बेटी सुशबीर ने कहा ,‘‘ हम सभी स्तब्ध हैं . हम पिछले साल से साइ के जवाब का इंतजार कर रहे हैं जब तत्कालीन महानिदेशक जिजि थामसन ने हमसे मामले की पूरी जांच का आश्वासन दिया था . अब हम नये विकल्पों पर विचार करेंगे .’’

 

 

 

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