क्या महंगा पड़ा कोटला ?

By: | Last Updated: Thursday, 17 December 2015 7:51 PM
inside story of feroz shah kotla

नई दिल्लीः दिल्ली में फिरोजशाह कोटला स्टेडियम विवादों में है. DDCA के इस स्टेडियम की लागत को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं. केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली भी इस स्टेडियम पर हुए खर्च को लेकर सुर्खियों में है. आज खुद अरुण जेटली को सफाई देने सामने आना पड़ा. आइए आपको दिखाते हैं क्या महंगा पड़ा कोटला?

फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में दर्शकों की क्षमता करीब 41 हजार है और बवाल मचा है खर्चे को लेकर.

आम आदमी पार्टी का आरोप है कि जिस स्टेडियम का बजट सिर्फ 24 करोड़ था उस पर 114 करोड़ खर्च कर दिए. आम आदमी पार्टी सवाल पूछ रही है कि बाकी 57 करोड़ कहां गए.

फिरोजशाह कोटला स्टेडियम दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन के अंतर्गत आता है. डीडीसीए के चेतन चौहान ने मंगलवार 16 दिसंबर को सामने आकर कहा था कि कुल खर्च 141 करोड़ है.

वहीं केंद्रीय वित्त मंत्री और करीब 13 साल DDCA अध्यक्ष रहे अरुण जेटली आज सफाई देने सामने आए और कहा कि घोटाले के आरोप बेबुनियाद हैं और 114 करोड़ में स्टेडियम का पुनर्निमाण बड़ी बात है.

साल 1999 में अरुण जेटली DDCA के अध्यक्ष बने. साल 2000 में फिरोजशाह कोटला स्टेडियम का पुनर्निमाण शुरू हुआ. इसे दोबारा बनकर खड़े होने में 7 साल लगे. इस दौरान कोटला स्टेडियम की क्षमता 26 हजार से दोगुनी होकर पचास हजार हो गई.

DDCA और अरुण जेटली का दावा है उन्होंने बेहद कम कीमत में इतना शानदार स्टेडियम तैयार करवाया है. अरुण जेटली इस खर्च की तुलना दिल्ली के ध्यानचंद और नेहरू स्टेडियम से करके इसे बेहद सस्ता बता रहे हैं.
बाइट अरुण जेटली, केंद्रीय वित्त मंत्री

अरुण जेटली जिस ध्यानचंद स्टेडियम की बात कर रहे हैं वो हॉकी स्टेडियम है. 2010 कॉमनवेल्थ खेलों के लिए इस स्टेडियम का पुनर्निमाण किया गया. बजट बनाया गया 113 करोड़ लेकिन कुल खर्च हुआ 262 करोड़, कन्सलटेन्सी सर्विसेज के लिए 42 करोड़ अलग से खर्च हुआ

इसी तरह जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कई तरह के खेल होते हैं. कॉमनवेल्थ खेलों के दौरान स्टेडियम के पुनर्निर्माण पर 455 करोड़ खर्च होने थे जबकि खर्च हुए 961 करोड़. इसकी मुख्य वजह काम में हुई देरी थी.

ये तो हुए दूसरे स्टेडियमों से तुलना लेकिन अगर देश के कुछ अहम स्टेडियमों से तुलना करें तो कोलकाता का ईडन गार्डन्स देश का बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है.

ईडन गार्डन्स भारत का नंबर वन स्टेडियम है. 2010 में कोलकाता के इस स्टेडियम का दोबारा निर्माण शुरू हुआ. खर्च आया करीब 100 करोड़ रुपये. यहां करीब 66 हजार लोग बैठकर मैच देख सकते हैं.

अब इसे दिल्ली से तुलना करें तो –

दिल्ली के स्टेडियम में करीब 50 हजार लोग बैठ सकते हैं जबकि ईडन गार्डन्स में 66 हजार. दिल्ली का स्टेडियम 114 करोड़ में तैयार हुआ जबकि ईडन गार्डन्स 100 करोड़ में.

अब बात मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम की. मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के अंतर्गत आता है वानखेड़े स्टेडियम. वानखेड़े स्टेडियम में ही हुआ था 2011 वन डे क्रिकेट विश्वकप जिसमें धोनी की सेना ने जीत कर इतिहास बनाया था.

वैसे तो स्टेडियम साल 1974 में बना था पर पुनर्निमाण किया गया साल 2011 विश्वकप से पहले. पुनर्निमाण के लिए 70 करोड़ का बजट दिया गया था पर बढ़ते-बढ़ते ये बजट 300 करोड़ पार कर गया. दिलचस्प ये है कि पुनर्निमाण से पहले वानखेड़े स्टेडियम की क्षमता थी चालीस हजार से ज्यादा जो घटकर 33 हजार रह गई.

अब बात राजकोट स्टेडियम की

30 एकड़ में फैले राजकोट स्टेडियम की क्षमता 28 हजार दर्शकों की है. हाल ही में दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच यहां एकदिवसीय मैच खेला गया. ये इस स्टेडियम पर खेला गया दूसरा मैच था.

धर्मशाला स्टेडियम –

साल 2006 में स्टेडियम का निर्माण शुरू हुआ था और करीब 75 करोड़ की लागत से ये स्टेडियम तैयार हुआ. ये स्टेडियम साल 2009 में बनकर तैयार हुआ था. इस स्टेडियम को बनाने का खर्चा आया था 35 करोड़. इस मैदान पर पहला वन डे साल 2013 में खेल गया. दक्षिण अफ्रीका के भारत दौरे के दौरान भी यहां एक टी 20 मैच खेला गया. इस स्टेडियम की खासियत है कि ये समुद्र तल से करीब 4700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और इसकी पृष्ठभूमि में पहा़ड और हरियाली खूब नजर आते हैं.

मोहाली क्रिकेट स्टेडियम
मोहाली में है पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम. ये स्टेडियम बाकियों की तुलना में काफी सस्ता है. करीब 25 करोड़ की लागत से बना है मोहाली स्टेडियम और यहां करीब 27 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था है. यहां फ्लडलाइट्स काफी नीचे लगी हैं और करीब 16 फ्लडलाइट्स स्टेडियम में हैं.

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दिल्ली में क्रिकेट का दूसरा नाम है कोटला स्टेडियम. और कोटला स्टेडियम के साथ दिल्ली के क्रिकेट को संभालने की जिम्मेदारी है दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन यानी डीडीसीए के पास. लेकिन साल दर साल क्रिकेट को चलाने वाली ये संस्था विवादों में खुद हिट विकेट होती रही है.

डीडीसीए के विवाद तो बरसों पुराने है लेकिन सबसे ताजा विवाद है कोटला स्टेडियम में टेस्ट खेला जा सकता है या नहीं. इस विवाद में केजरीवाल सरकार भी पार्टी बन चुकी है. केजरीवाल के सामने खड़ा है डीडीसीए को चलाने वाला धड़ा जिसमें बड़ा चेहरा हैं चेतन चौहान.

दिल्ली सरकार के बाउंसर अब डीडीसीए पर पड़ रहे हैं. दिल्ली सरकार के पैनल ने ये भी प्रस्ताव किया है कि डीडीसीए को निलंबित कर नई संस्था को कामकाज सौंपा जाए. वजह बताई गई है वित्तीय अनियमितताएं और टैक्स ना भरना.
दिलचस्प ये है कि डीडीसीए सीधे तौर पर दिल्ली सरकार के अधीन नहीं आती. पर मनोरंजन कर के मुद्दे को लेकर केजरीवाल खुद इस राजनीति में कूद पड़े हैं.

दिल्ली सरकार ने डीडीसीए से 26.46 करोड़ बकाए के भुगतान की मांग की है. हालांकि खुद डीडीसीए का कहना है कि वो नियम के मुताबिक 3 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है इसलिए उस पर कोई बकाया नहीं है.

बकाए मनोरंजन कर को लेकर दिल्ली सरकार दबाव बना रही है. कुछ दिन पहले ही दिल्ली की रणजी टीम के कप्तान गौतम गंभीर से मुलाकात कर चुके हैं. पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी बिशन सिंह बेदी जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी केजरीवाल के साथ खड़े हैं.

बीजेपी सांसद कीर्ति आजाद भी बिशन सिंह बेदी गुट के साथ हैं. वहीं उनके मुकाबले में हैं पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान जो खुद एक बीजेपी नेता हैं.

डीडीसीए के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने फ्रॉड के दो केस दर्ज किए हुए हैं. सीबीआई अनियमितताओं को लेकर जांच कर रही है. केंद्र सरकार की तरफ से भी एक केस ऑडिटर के खिलाफ दर्ज है कि उसने सही ढंग से बहीखाते नहीं बनाए. ये सब इशारा कर रहे हैं कि डीडीसीए में सब ठीक नहीं हैं.

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