आईपीएल प्रकरण में मयप्पन की भूमिका से क्या श्रीनिवासन को बीसीसीआई से अलग रखा जा सकता है? कोर्ट

By: | Last Updated: Monday, 10 November 2014 2:01 PM

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज सवाल किया कि आईपीएल-6 में सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग कांड में क्या श्रीनिवासन को बीसीसीआई के प्रमुख के पद पर काम करने की अनुमति दी जा सकती है यदि उनके दामाद गुरूनाथ मयप्पन की इस सारे कांड में संलिप्तता का पता लगता है. कोर्ट के इस सवाल के बीच क्रिकेट प्रशासक एन श्रीनिवासन का भाग्य अभी भी अधर में लटका है.

 

जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि वह मुकुल मुद्गल समिति की रिपोर्ट 14 नवंबर को खोलेगी. कोर्ट ने कहा कि इसमें ‘कोई परेशानी नहीं’ होगी यदि रिपोर्ट में श्रीनिवासन और उनके रिश्तेदार के खिलाफ कुछ नहीं मिला लेकिन उस स्थिति में क्या होगा यदि उनके रिश्तेदार के खिलाफ तथ्य मिले.

 

इस सवाल के जवाब में श्रीनिवासन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि उनके खिलाफ कुछ नहीं मिलता है तो उन्हें बीसीसीआई के अध्यक्ष के रूप में वापस आने की अनुमति दी जानी चाहिए और उनके रिश्तेदार के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए यदि रिपोर्ट में उसके बारे में प्रतिकूल निष्कर्ष मिलता है.

 

सिब्बल ने कहा, ‘‘मैं (श्रीनिवासन) रिपोर्ट को जस का तस स्वीकार करूंगा और इसके निष्कर्ष पर सवाल नहीं करूंगा.’’ क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने कहा कि बीसीसीआई प्रमुख ने अपने दामाद की भूमिका पर पर्दा डालने का प्रयास किया था और इसलिए उन्हें बोर्ड के अध्यक्ष पद का चुनाव लडने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

 

इसी संगठन की याचिका पर शीर्ष अदालत ने इस प्रकरण में श्रीनिवासन और 12 अन्य खिलाड़ियों के खिलाफ जांच का आदेश दिया था. साल्वे ने कहा कि समिति की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए लेकिन सिब्बल ने इसका विरोध करते हुये कहा कि खेल के हित में पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए.मुद्गल समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने कहा कि 35 पेज की रिपोर्ट में किसी खिलाड़ी के नाम का जिक्र नहीं है और उन्हें संख्या दी गयी है जिसके बारे में अन्य रिपोर्ट में उल्लेख है.

 

कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद इसकी सुनवाई 14 नवंबर के लिये स्थगित कर दी.

 

कोर्ट ने बंबई उच्च न्यायालय में लंबित बीसीसीआई के अध्यक्ष पद का चुनाव लडने के लिये बीसीसीआई के नियमों के संशोधन की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर रोक लगाने का निर्देश देने से इंकार कर दिया.

 

शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय से कहा कि वह अपनी सुनवाई सिर्फ नियमों की वैधानिकता तक ही सीमित रखे.

 

कोर्ट ने एक सितंबर को श्रीनिवासन को बीसीसीआई के अध्यक्ष पद पर बहाल करने का अनुरोध यह कहते हुये ठुकरा दिया था कि समिति से क्लीन चिट मिलने तक उन्हें पदभार ग्रहण करने की अनुमति नहीं मिल सकती है.

 

न्यायालय ने कहा था कि जांच जारी है और श्रीनिवासन को बीसीसीआई के अध्यक्ष के रूप में काम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है.

 

न्यायमूर्ति मुद्गल समिति ने इस प्रकरण में श्रीनिवासन और 12 प्रमुख खिलाड़ियों की भूमिका की जांच करके 29 अगस्त को सीलबंद लिफाफे में अपनी अंतरिम रिपोर्ट दाखिल की थी.

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