IPL Verdict: 'क्रिकेट के कलंक' बने कुंद्रा और मयप्पन, CSK, RR पर दो साल का बैन

By: | Last Updated: Tuesday, 14 July 2015 1:19 PM
IPL Verdict: life time ban on kundra and mayppan

नई दिल्ली: दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों से सजी और आईपीएल की दो बार की चैंपियन टीम चेन्नई सुपरकिंग्स (सीएसके) और पहले सीजन की विजेता राजस्थान रॉयल्स को अपने प्रमुख अधिकारियों गुरूनाथ मयप्पन और राज कुंद्रा के 2013 सीजन के दौरान सट्टेबाजी गतिविधियों में शामिल रहने के कारण इस क्रिकेट लीग से दो साल के निलंबित कर दिया गया.

 

मयप्पन और कुंद्रा पर आजीवन प्रतिबंध-

 

सीएसके के पूर्व टीम प्रिंसिपल मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के सह मालिक कुंद्रा को भी सट्टेबाजी में लिप्त रहने तथा आईपीएल और खेल को बदनाम करने के लिये आजीवन निलंबित कर दिया गया. यह सजा सुप्रीम कोर्ट से नियुक्त तीन सदस्यीय समिति ने सुनाया जिसके प्रमुख पूर्व चीफ जस्टिस आर एम लोढ़ा थे. इससे 2008 में शुरू हुई इस टी20 लीग को करारा झटका लगा है. जस्टिस लोढ़ा ने यहां खचाखच भरे संवाददाता सम्मेलन में फैसला सुनाते हुए कहा, ‘‘भ्रष्टाचार निरोधक संहिता के अनुच्छेद 2.2.1 के तहत मयप्पन को अधिकतम पांच साल के लिये क्रिकेट के खेल में भागीदारी के अयोग्य घोषित किया जाता है. दो – अनुच्छेद 7.5 के लेवल चार के तहत उसे गतिविधियों से आजीवन निलंबित किया गया है. और तीन – अनुच्छेद छह, नियम 4.2 के तहत उसे किसी भी तरह के क्रिकेट मैचों में शामिल होने से आजीवन निलंबित किया गया है. ये सभी सजाएं इस आदेश की तारीख से लागू होंगे. ’’

 

 

पूर्व चीफ जस्टिस ने इसके बाद बालीवुड स्टार शिल्पा शेट्टी के पति कुंद्रा के लिये भी इसी तरह की सजा पढ़कर सुनायी. जस्टिस लोढ़ा ने कहा, ‘‘इंडिया सीमेंट ने तर्क दिया कि उसने क्रिकेट के खेल के विकास के लिये बहुत कुछ किया है. लेकिन इससे सजा कम नहीं की जा सकती है क्योंकि फ्रेंचाइजी मालिक होने के नाते उन्होंने गुरूनाथ को सट्टेबाजी का दोषी पाये जाने के बाद सजा नहीं दी जिसकी स्पष्ट रूप से टीम अधिकारी के रूप में पहचान थी. वह बीसीसीआई था जिसने गुरूनाथ को क्रिकेट में भागीदारी से निलंबित किया था.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘जयपुर आईपीएल ने दावा किया कि उसकी पहचान खिलाड़ियों की नर्सरी के रूप में है लेकिन उसके तीन खिलाड़ियों पर कथित स्पॉट फिक्सिंग का आरोप लगा था. इससे पता चलता है कि उनके कामकाज में सब कुछ सही नहीं चल रहा है. राजस्थान रॉयल्स में राज कुंद्रा की स्थिति सह मालिक और टीम अधिकारी के रूप में थी जिसका मतलब है कि उनकी कारगुजारियों से खेल, बीसीसीआई और आईपीएल बदनाम हुए. ’’ आरोपियों के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां करते हुए न्यायमूर्ति लोढ़ा ने कहा कि इससे खेल की विश्वसनीयता काफी आहत हुई है. उन्होंने कहा, ‘‘क्रिकेट, बीसीसीआई और आईपीएल की इस कदर बदनामी हुई कि लोगों में यह आशंका बन गयी कि यह खेल साफ सुथरा है या नहीं. ’’

 

मयप्पन पर समिति का फैसला सुनाते हुए जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि यह साबित हो गया कि सीएसके का अधिकारी अपनी टीम पर सट्टा लगाने में लिप्त था. उन्होंने कहा, ‘‘ गुरूनाथ की नियमित रूप से आईपीएल मैचों पर सट्टा लगाने की आदत थी. उसने सट्टे में 60 लाख रूपये गंवाये जिससे पता चलता है कि वह सट्टे में बड़ी रकम लगाता था. यह उसका दुर्भाग्य था कि वह इस सट्टे से मोटी धनराशि नहीं बना पाया. ’’

 

 

क्या होगा सीओओ सुंदर रमन का –

 

जस्टिस लोढ़ा के अलावा समिति में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज अशोक भान और आर रवींद्रन भी शामिल थे. उन्होंने कुंद्रा पर इसी तरह का फैसला देने के बाद उन्होंने मीडिया के सवालों के जवाब भी दिये. उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने आईपीएल सीओओ सुंदर रमन के खिलाफ कार्रवाई पर विचार किया था जिन पर गलत काम करने का आरोप लगा था. न्यायमूर्ति लोढ़ा ने कहा कि उनके भाग्य का फैसला करने में अभी कुछ समय लगेगा. उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक सुंदर रमन की बात है तो हमने उनसे संबंधित सामग्री की जांच की और हमारा मानना है कि इसमें आगे जांच करने की जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गौर करने के लिये विवेक प्रियदर्शी को नियुक्त किया है और वह इसकी जांच कर रहे हैं. हम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं. इसके बाद ही हम फैसला करेंगे कि क्या कार्रवाई करनी है. ’’

 

समिति ने बीसीसीआई में हितों के टकराव के बहुचर्चित मसले पर कहा कि इस पर फैसला खेल से जुड़े विभिन्न हितधारकों से बात करने के बाद दिया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘‘हितों के टकराव का मसला उठा था. एक बार सभी हितधारकों से बातचीत की प्रक्रिया पूरी करने के बाद हम इस पर अपने विचार रखेंगे. यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है. यह आदेश दो व्यक्तियों और फ्रेंचाइजी की सजा की मात्रा तय करने तक सीमित है. ’’

 

जस्टिस लोढ़ा ने कहा, ‘‘हमने 40-45 लोगों से बात की. हमें अभी कुछ अन्य से मिलना है. एक बार जब इसे पूरा कर लेंगे तब हम फैसला करेंगे कि क्या दिशानिर्देश दिये जाने चाहिए. हमारा विचार सभी हितधारकों से इनपुट लेना है. यह केवल क्रिकेट प्रशासकों और राजनीतिज्ञों तक ही सीमित नहीं है.’’

 

 

बीसीसीआई के पास क्या है विकल्प –

 

जस्टिस लोढ़ा से पूछा गया कि यदि इन दोनों फ्रेंचाइजी के मालिक बदल जाते हैं तो क्या उन्हें ऐसे में आईपीएल में खेलने की अनुमति दी जाएगी, उन्होंने कहा कि इस पर बीसीसीआई को फैसला करना है. उन्होंने कहा, ‘‘हमारे सामने सवाल उठाया गया लेकिन बीसीसीआई को यह फैसला करना है और क्या इसके लिये कोई कानूनी प्रावधान है. आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि हम मामले से जुड़े प्रत्येक पहलू पर गौर नहीं कर सकते हैं. ’’ जस्टिस लोढ़ा से पूछा गया कि क्या समिति ने इस पहलू पर विचार किया कि इस फैसले से दोनों निलंबित फ्रेंचाइजी टीमों से जुड़े खिलाड़ियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, उन्होंने कहा कि खेल व्यक्तियों से बड़ा होता है. उन्होंने कहा, ‘‘खिलाड़ी उस फ्रेंचाइजी से नहीं जुड़ेंगे जिसे निलंबित किया गया है. हमारा मानना था कि यदि क्रिकेट व्यक्तियों से बड़ा है तो फिर खिलाड़ियों और फ्रेंचाइजी को वित्तीय नुकसान महत्वपूर्ण नहीं है. ’’

 

क्या है पूरा मामला –

 

आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग का मामला पहली बार 2013 में प्रकाश में आया जब दिल्ली पुलिस ने राजस्थान रॉयल्स के क्रिकेटरों एस श्रीसंत, अंकित चव्हाण और अजित चंदीला को उस सत्र में सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग में कथित भागीदारी के लिये गिरफ्तार किया था. इसके बाद यह भी खुलासा हुआ कि मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के सह मालिक राज कुंद्रा भी इसमें शामिल थे. मयप्पन को 24 मई को धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप गिरफ्तार कर दिया गया. आईपीएल संचालन परिषद ने मयप्पन और कुंद्रा के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिये तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की जिसमें हाई कोर्ट के दो पूर्व न्यायाधीश भी शामिल थे. इस पैनल ने हालांकि इन दोनों को क्लीन चिट दे दी जबकि पुलिस पर बात पर अडिग थी कि वे दोनों इसमें शामिल थे.

 

बोर्ड ने बंबई उच्च न्यायलय के फैसले के खिलाफ अपील की तो उच्चतम न्यायालय ने इसके बाद श्रीनिवासन, बीसीसीआई, इंडिया सीमेंट और राजस्थान रॉयल्स को नोटिस जारी कर दिये. उस वर्ष सितंबर में बीसीसीआई ने श्रीसंत और चव्हाण पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया जबकि बोर्ड की अनुशासन समिति ने चंदीला पर फैसला सुरक्षित रखा. अक्तूबर में उच्चतम न्यायालय ने नये सिरे से जांच के लिये तीन सदस्यीय समिति गठित की जिसे जांच पूरी करने के लिये चार महीने का समय दिया गया. इस पैनल में उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधीश मुकुल मुदगल, सीनियर एडवोकेट और अतिरिक्त सालिसिटर जनरल एल नागेश्वर राव और असम क्रिकेट संघ के सदस्य निलय दत्ता शामिल थे.

 

मुदगल समिति ने यह निष्कर्ष निकाला कि मयप्पन और कुंद्रा के खिलाफ गलत कामों में शामिल रहने के सबूत हैं. इसने उच्चतम न्यायालय को एक मुहरबंद लिफाफा दिया जिसमें भ्रष्टाचार में लिप्त क्रिकेटरों और प्रशासकों के नाम थे. समिति ने हालांकि कहा कि श्रीनिवासन स्पॉट फिक्सिंग या सट्टेबाजी में लिप्त नहीं थे लेकिन साफ किया कि उन्हें आईपीएल के खिलाड़ियों की भागीदारी के बारे में पता था लेकिन उन्होंने इससे आंख मूंद ली थी. उच्चतम न्यायालय ने इसके बाद मयप्पन और कुंद्रा और उनकी संबंधित फ्रेंचाइजी के खिलाफ सजा तय करने के लिये न्यायमूर्ति लोढ़ा की अगुवाई में एक अन्य तीन सदस्यीय पैनल गठित किया और घोषणा की कि उसका फैसला ‘‘अंतिम होगा और वह बीसीसीआई और अन्य सबंधित पक्षों के लिये बाध्यकारी होगा. ’’

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