फुटबाल को लोगों का सपना बनाना होगा

By: | Last Updated: Sunday, 19 October 2014 5:17 AM

नई दिल्ली: इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) फुटबाल लीग टूर्नामेंट के पहले संस्करण का आगाज हुए एक सप्ताह पूरे हो चुके हैं तथा इस दौरान प्रतिभागी आठों टीमें कम से कम एक-एक मैच खेल चुकी हैं. हालांकि अब तक के मैचों में भारतीय फुटबाल खिलाड़ी उल्लेखनीय प्रदर्शन नहीं कर सके हैं.

 

खिताब की प्रबल दावेदार मानी जाने वाली टीम नॉर्थईस्ट युनाइटेड एफसी के सह-मालिक जॉन अब्राहम को जल्द ही समझ आ गया कि टीम का अपने घरेलू क्षेत्र में प्रचार जल्द से जल्द शुरू कर देना चाहिए.

 

फुटबाल की विश्व नियामक संस्था फीफा के महासचिव जेरोम वाल्के ने हाल ही में अपनी भारत यात्रा के दौरान कहा कि भारत को अभी जमीनी स्तर पर फुटबाल के विकास पर ध्यान लगाना चाहिए तथा आईएसएल जैसे टूर्नामेंट को खेल के विकास के लिए मंच के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए.

 

वाल्के ने कहा कि 2017 में भारत की मेजबानी में होने वाले अंडर-17 विश्व कप देश में फुटबाल के विकास की दिशा में अहम साबित होगा.

 

वास्तविकता यह है कि भारत में होने वाले किसी भी टूर्नामेंट को पूरी तरह वाणिज्यिक दृष्टि से नहीं देखा जा सकता, भले उसमें बाजार की कितनी भी पूंजी लगी हो. आईएसएल की सभी फ्रेंचाइजी क्लबों को सबसे पहले जमीनी स्तर पर फुटबाल प्रतिभा की तलाश करने और उसे विकसित करने के लिए अपनी-अपनी अकादमी शुरू करनी चाहिए.

 

भारत में जीवन के अन्य सभी क्षेत्रों की भांति खेलों के विकास के लिए भी तथाकथित मध्य आयवर्ग की अहम भूमिका होगी, लेकिन फुटबाल के मामले में समाज के सबसे निचले तबके तक जाना होगा.

 

आईएसएल की सबसे बड़ी सफलता यह है कि इसने फुटबाल प्रेमियों को स्टेडियम तक लाने का काम किया है. अब तक हुए मैचों में दर्शकों की अच्छी भीड़ देखने को मिली है.

 

देश में फुटबाल के सबसे दीवाने शहर कोलकाता में यदि 60,000 दर्शकों की भीड़ को भले सामान्य कहा जाए, लेकिन दिल्ली में 25,000 दर्शकों का जुटना वास्तव में बहुत बड़ी सफलता कही जा सकती है.

 

लेकिन फुटबाल इतने तक ही सीमित नहीं है. जॉन देश के पूर्वोत्तर राज्यों में विभिन्न जगहों पर अपनी टीम को प्रचारित-प्रसारित करने का मन बना चुके हैं और यदि एक क्लब ऐसा कर सकता है तो दूसरे क्लब भी इस दिशा में जा सकते हैं.

 

आईपीएल की भांति आईएसएल को लोकप्रिय बनाने के लिए इसमें चीयरलीडर्स और बॉलिवुड की हस्तियों को शामिल किया जा सकता है.

 

देश में खेलों के प्रचार-प्रसार में फिल्मी सितारों की भूमिका अहम साबित हुई है. हाल ही में कबड्डी जैसे बेहद कम लोकप्रिय खेल के लीग टूर्नामेंट ‘प्रो कबड्डी लीग’ को मिली सफलता इसका सबूत है.

 

वास्तव में फुटबाल को देश में लोगों के सपने से जोड़ना होगा, ताकि वे इटली के एलेक्सांद्रो डेल पिएरो और मार्को मातेराज्जी, स्पेन के जोआन कैपडेविला और लुइस गार्सिया और फ्रांस के डेविड ट्रेजेग्वेट और रॉबर्ट पायरेस की तुलना सुनील छेत्री, सैयद रहीम नबीस, गौरमांगी सिंह, सुब्रता पाल्स और महताब हुसैन से कर सकें.

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