दस साल बाद बीसीसीआई के अध्यक्ष बने डालमिया

By: | Last Updated: Sunday, 1 March 2015 3:31 AM

चेन्नई/नई दिल्लीः दस साल बाद एक बार फिर जगमोहन डालमिया की बीसीसीआई में एंट्री हुई है. आपको जानकर हैरानी होगी कि डालमिया श्रीनिवासन के समर्थन से ही बीसीसीआई के अध्यक्ष बने हैं. जाहिर है ऐसे में ये कहना सही नहीं होगा कि श्रीनिवासन का बीसीसीआई पर दबदबा खत्म हो जाएगा. इतना ही नहीं श्रीनिवासन कैंप के कई लोग अब भी बीसीसीआई चुनाव में मैदान में हैं.

बीसीसीआई के चुनाव में सचिव पद के लिए संजय पटेल और कोषाध्यक्ष पद के लिए अनिरुद्ध चौधरी मैदान में हैं. ये दोनों श्रीनिवासन कैंप के हैं. संजय पटेल को शरद पवार गुट के बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर से टक्कर मिल रही है तो अनिरुद्ध चौधरी को पवार गुट के कांग्रेस नेता राजीव शुक्ल से टक्कर मिल रही है.

 

 

कैसे चुने गए डालमिया?

बीसीसीआई के नियमों के मुताबिक इस बार अध्यक्ष पूर्वी जोन के 6 सदस्यों को नॉमिनेट करना था. चुनाव में खड़े होने के लिए इन सदस्यों में से दो का समर्थन जरूरी था. डालमिया को सभी 6 सदस्यों का समर्थन मिला और वो बिना किसी विरोध के चुने गए.

 

श्रीनिवासन के अलावा दूसरा गुट एनसीपी नेता शरद पवार का था. लेकिन ईस्ट जोन से किसी का समर्थन नहीं मिलने से पवार गुट का कोई उम्मीदवार अध्यक्ष के चुनाव में खड़ा नहीं हुआ. हालांकि पवार गुट का दावा है कि उन्होंने भी डालमिया का समर्थन किया है.

 

कौन हैं जगमोहन डालमिया?

दस साल पहले जगमोहन डालमिया को बीसीसीआई ने बाहर का रास्ता दिखाया था. तब उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. बतौर विकेटकीपर क्रिकेट की दुनिया में कदम रखने वाले डालमिया क्रिकेट की सबसे ब़ड़ी कुर्सी पर भी बैठ चुके हैं.

 

1979 में पहली बार बीसीसीआई में एंट्री मिली और 1983 में बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष बन गए. इसी साल भारत ने पहला विश्व कप जीता था.  1997 में तीन साल के लिए उन्हें आईसीसी का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया था.

 

क्रिकेट की दुनिया में ये वो दौर था जब डालमिया का सितारा बुलंदी पर था. 2001 में डालमिया बीसीसीआई के अध्यक्ष चुने गए. 2004 तक वो इस पद पर रहे.

 

दो दशक तक क्रिकेट की दुनिया के किंग रहे डालमिया ही वो शख्स थो जिन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में 1996 का विश्व कप आयोजित कराया था. बीसीसीआई को दुनिया का सबसे अमीर बोर्ड बनाने में डालमिया की ही भूमिका रही. क्रिकेट प्रसारण बेचना और विज्ञापनों से कमाई की शुरुआत डालमिया के राज में ही शुरू हुई.

 

अप्रैल 2006 में डालमिया को बीसीसीआई में बैन कर दिया गया. बैठकों में शामिल होने से रोक दिया गया. आरोप लगे कि 1996 के विश्व कप में निजी फायदे के लिए पैसे की हेराफेरी की गई. भारत-पाकिस्तान-श्रीलंका में संयुक्त रूप से विश्वकप का आयोजन हुआ था.  करीब 3 करोड़ की हेराफेरी के आरोप में 2008 में मुंबई पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था. हालांकि कुछ देर बाद ही जमानत भी मिल गई थी.

 

डालमिया हार मानने वालों में से नहीं थे. सो उन्होंने बोर्ड के इस फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट भी गए. कोर्ट में बीसीसीआई डालमिया के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाई और उन्हें बरी कर दिया गय़ा.

 

 

मैदान पर बड़े-बड़े खिलाड़ियों की वापसी की बात तो आम है लेकिन मैदान से बाहर क्रिकेट की दुनिया में जगमोहन डालमिया की जबरदस्त वापसी हुई है.

 

अब कल सचिव, संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष के लिए चुनाव होगा. इन पदों के लिए दो-दो उम्मीदवार मैदान में हैं. सचिव पद पर अनुराग ठाकुर और संजय पटेल का मुकाबला है तो ज्वाइंट सेक्रेटरी यानी संयुक्त सचिव के पद पर अमिताभ चौधरी और चेतन देसाई,

 

वहीं कोषाध्यक्ष पद पर अनिरुद्ध चौधरी और राजीव शुक्ल के बीच टक्कर है.

 

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Web Title: Jagmohan Dalmiya
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