क्रिकेट कथा: जब विश्वकप से जीरो होकर लौटे हम

By: | Last Updated: Monday, 1 December 2014 7:37 AM

नई दिल्ली: लंबा चौड़ा गुलीवर जब लिलिपुट के समुद्र तट पहुंचा तो उसे छोटे छोटे इंसानों ने सिर्फ घेर ही नहीं लिया बल्कि बंदी बना लिया. कुछ ऐसा ही हुआ भारत की टीम के साथ. दुनिया के 6 टेस्ट प्लेइंग नेशन में शामिल इंडिया टॉप फोर में तो नहीं थी पर इतनी सक्षम जरूर थी कि नई टीमों को हरा सके.

 

पर विश्वकप का पहला मैच खेलने वाली, विश्वकप में पहली गेंद डालने वाली, विश्वकप में पहले उलटफेर का शिकार बनी.

 

16 जून 1979

भारत बनाम श्रीलंका

मैनचेस्टर का ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान

 

श्रीलंका ऐसी टीम थी जिसे विश्वकप का लिलीपुट कहें तो गलत नहीं होगा. टेस्ट प्लेइंग नेशन का दर्जा भी नहीं मिला था. श्रीलंका ने विश्वकप में जो दो मैच खेले थे उनमें एक में न्यूजीलैंड ने 9 विकेट से रौंदा था और वेस्टइंडीज के साथ मैच बारिश की वजह से हो ही नहीं पाया था. दूसरे विश्वकप में बारिश के डर से एक दिन रिजर्व रखा जाता था. अगर पहले दिन खेल ना हो पाए या बीच में रूक जाए तो अगले दिन वहीं से खेल शुरू हो सकता था.

 

वेस्टइंडीज के खिलाफ दोनों दिन मैच नहीं हो पाया. विश्वकप में अपना आखिरी लीग मैच खेलने भारत की टीम उतरी.

 

किस्मत भारत के साथ थी

 

पहले और दूसरे विश्वकप का अघोषित नियम यही था कि टॉस जीतने वाली टीम पहले फिल्डिंग चुनती थी. भारत ने विश्वकप के अपने पिछले पांच में से चार मैचों में टॉस हारा था. पहले बैटिंग करनी पड़ी. सिर्फ एक जीत मिली थी ईस्ट अफ्रीका के खिलाफ जिसमें टॉस भारत ने जीता था. छठे मैच में टॉस भारत के पक्ष में था. भारत ने श्रीलंका को पहले बैटिंग ही कराई. इस नाते देखें तो ये मैच भारत की मुट्ठी में था लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

 

श्रीलंका का नए तरीके का खेल

 

साठ ओवर के मैच में उन दिनों 300 रन बनना बड़ी बात थी. 250 तक स्कोर पहुंचा तो जीत लगभग पक्की मान ली जाती थी. 200 से ऊपर का स्कोर चुनौतीपूर्ण कहा जाता था. श्रीलंका ने पहला विकेट सिर्फ 31 रन पर  खो दिया. वर्नापुरा 18 रन पर आउट हो गए. इसके बाद सुनील विट्टुमुनी ने 67, रॉय डियास ने 50 लुइस रोहन दिलीप मेंडिस ने 64 रन की पारी खेली. श्रीलंका ने साठ ओवरों में 238 रन का स्कोर खड़ा किया. लेकिन मेंडिस की 64 रन की पारी में खास था कि उन्होंने ये पारी 57 गेंदों में खेली थी. 112 का स्कवायर रेट एक चौका और तीन छक्के. इसके अलावा सौदत पास्कुल ने नॉटआउट 23 रन बनाए 26 गेंदों पर. वनडे क्रिकेट के लिए ये नया अंदाज था.

 

दिलचस्प ये है कि पास्कुल उस विश्वकप के सबसे कमउम्र के खिलाड़ी थे. 17 साल के स्कूली छात्र ने तेज रनों से अमरनाथ, कपिलदेव, करसन घावरी, बिशन सिंह बेदी और वेंकटराघवन को छका दिया था. उससे भी दिलचस्प ये है कि सौदत पास्कुल ने पूरे क्रिकेट जीवन में सिर्फ दो अंतर्राष्ट्रीय वनडे मैच खेले थे और 24 रन बनाए थे जिसमें से 23 भारत के खिलाफ थे और वो भी नॉटआउट.

 

भारतीय गेंदबाजी में बड़े-बड़े नाम काम नहीं आए. करसन घावरी, बिशन सिंह बेदी और वेंकटराघवन को पूरे विश्वकप में एक भी विकेट नहीं मिला. भारत ने इस मैच में कुल पांच विकेट चटकाए जिसमें से एक रनआउट था. तीन मोहिंदर अमरनाथ को और एक विकेट कपिल देव को मिला. मायने ये कि कपिल देव ने पूरी सीरीज में दो विकेट लिए और मोहिंदर अमरनाथ ने चार.

 

रेस्ट डे पड़ गया भारी

 

श्रीलंका ने 239 का लक्ष्य दिया. लेकिन बारिश की वजह से खेल बीच में रूक गया. 17 जून को रविवार का रेस्ट डे और फिर खेल शुरू हुआ 18 जून को. भारत की तरफ से सुनील गावस्कर(26) और अंशुमान गायकवाड(33) ने अच्छी शुरूआत दी. गुंडप्पा विश्वनाथ और वेंगरसरकर मिल कर पारी को आगे बढ़ा रहे थे भारत का स्कोर 119 रन. भारत को करीब 25 ओवरों में इतने ही रन चाहिए थे और विकेट हाथ में थे आठ. लेकिन इसी स्कोर पर विश्वनाथ(22) रन आउट हो गए. इसके बाद कहानी पलट गई. ब्रजेश पटेल(10) 132 पर आउट हुए और वेंगसरकर(36) के आउट होने पर भारतीय पारी ढह गई.

 

कपिल देव(16), मोहिंदर अमरनाथ(7), करसन घावरी(3) सुरिंदर खन्ना (10) एक के बाद एक चलते बने.आखिरी बल्लेबाज बिशन सिंह(5) के आउट होने तक भारत सिर्फ 191 रन बना पाया और श्रीलंका ने 47 रन से मैच जीत गया. ये श्रीलंका की पहली विश्वकप जीत थी. भारत को पूरे विश्वकप में एक भी जीत नहीं मिली थी.

 

टॉनी उपाता और सोमचंद्र डीसिल्वा को 3-3 विकेट मिले. जबकि और स्टेन्ली डिसिल्वा को 2. दिलचस्प ये भी है कि स्टेन्ली को पूरे वन डे करियर में यही दो विकेट मिले हैं.

 

दूसरे विश्वकप में भारत का सफर खत्म हो गया लेकिन क्रिकेट कथा में इस बात का जिक्र होना बाकी है कि भारत की तरफ से विश्वकप में पहला शतक कौन मारेगा. पहला छक्का किसने मारा था ये कहानी भी अगली क्रिकेट कथा में.

 

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Web Title: Manish Sharma’s cricket kath
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