क्रिकेट कथा: जब भारत ने विश्वविजेता वेस्टइंडीज को घुटने टेकने को मजबूर किया

By: | Last Updated: Wednesday, 17 December 2014 6:03 AM

नई दिल्ली: 1983 विश्वकप में वेस्टइंडीज से पहली भिड़ंत क्रिकेट कथा में आज वो कहानी जब भारत के होनहारों ने विश्वविजेता को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. पहले दो विश्वकप में पहला मैच भारत को खेलने का मौका मिला था और दोनों में भारत हारा था. तीसरे विश्वकप में 9 जून को चार मैच एक साथ हो रहे थे. भारत की रोमांचक जीत की कहानी से पहले बाकी तीन मैचों का हाल.

 

ग्रुप ए में पहला मैच इंग्लैंड और न्यू जीलैंड का था. लंदन के केनिंगटन ओवल के मैदान में इंग्लैंड ने 322 रन बनाए और न्यू जीलैंड को 216 पर समेट दिया. एलेन लैंब की 105 गेंदों में 102 की पारी इंग्लैंड के काम आई.

 

ग्रुप ए के दूसरे मैच में पाकिस्तान और श्रीलंका की टीम आमने-सामने थीं. पाकिस्तान ने 338 का विशालकाय स्कोर खड़ा किया. वेल्स में स्वोनज़ी मैदान पर श्रीलंका जवाब में सिर्फ 228 रन बना पाई और पाकिस्तान 50 रन से जीता.

 

ग्रुप बी ने कर दिया दुनिया को हैरान

ग्रुप ए में पहले दिन के मुकाबलों के नतीजे जहां उम्मीदों के मुताबिक आए वहीं ग्रुप बी में 9 तारीख का दिन सनसनी वाला साबित हुआ. इस दिन पहले मुकाबले में जिम्बाब्वे और ऑस्ट्रेलिया की टीमें आमने-सामने थीं. टूर्नामेंट का ये तीसरा मैच ट्रैंटब्रिज, नॉटिंघम में था.

 

जब डंकन फ्लैचर बने थे मैन ऑफ द मैच

जिम्बाब्वे ने पहले खेलते हुए 239 रन बनाए. 2015 विश्वकप के लिए भारत के कोच डंकन फ्लैचर ने इस मैच में जिम्बाब्वे की ओर से सर्वाधिक 69 रन बनाए. जवाब में ऑस्ट्रेलिया अच्छी शुरूआत के बाद भी हार गई. वजह बने डंकन फ्लैचर जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया के टॉप ऑर्डर को ध्वस्त कर दिया. ऑस्ट्रेलिया 60 ओवर पूरे खेलने के बाद भी 7 विकेट पर सिर्फ 226 रन बना सकी. डंकन फ्लैचर ने 11 ओवरों में 42 रन देकर चार विकेट लिए. मैन ऑफ द मैच भी डंकन फ्लैचर ही बने.

 

विश्वविजेता के सामने भारत

ग्रुप बी के दूसरे और टूर्नामेंट के चौथे मुकाबले में विश्वविजेता वेस्टइंडीज और भारत की टीम आमने-सामने थी. टॉस वेस्टइंडीज ने जीता और भारत को बल्लेबाजी के लिए बुलाया. मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड के मैदान पर भारत के बल्लेबाजों को सामना करना था उस वक्त की दुनिया की सबसे घातक गेंदबाजी का. माइकल होल्डिंग, एंडी रॉबर्ट्स, मेलकल मार्शल, और जोएल गार्नर.

 

कपिल देव अपनी किताब ‘स्ट्रेट फ्राम द हार्ट’ में लिखते है कि ओल्ड ट्रैफर्ड की पिच तेज थी और गेंद को मूवमेंट मिल रहा था. मौसम भी कम रोशनी वाला था. पहला विकेट होल्डिंग को मिला. श्रीकांत 14 रन बनाकर विकेटकीपर ज्फै डूजां के हाथों विकेट के पीछे लपके गए. उस वक्त भारत का स्कोर सिर्फ 21 रन था. गावस्कर 19 रन पर होल्डिंग का शिकार हुए. अभीतक भारत का स्कोर सिर्फ 46 रन था.

 

मोहिंदर अमरनाथ 21 रन पर गार्नर का शिकार हुए. भारत का स्कोर तीन विकेट के नुकसान पर 76 रन हो गया. संदीप पाटिल को गोम्स ने बोल्ड कर दिया. उन्होंनें 36 रन बनाए थे. भारत ने चौथा विकेट सिर्फ 125 पर खो दिया. कपिल देव खुद 6 रन पर गोम्स का शिकार हुए. भारत की आधी टीम सिर्फ 141 रन पर पवैलियन में थी.

 

इसके बाद यशपाल शर्मा और रोजर बिन्नी ने दमदार पारियां खेलीं. रोजर बिन्नी ने 38 गेंदों में 27 रन की पारी खेली. 214 के स्कोर पर बिन्नी को मार्शल ने उन्हें LBW आउट किया. दूसरे छोर पर यशपाल शर्मा ताबड़तोड़ खेल रहे थे. उन्होंने ऑन साइड पर शानदार पुल और ड्राइव खेलते हुए 9 चौकों की मदद से 120 गेंदों में 89 रन बनाए.

 

यशपाल शर्मा जब आउट हुए तो भारत 243 रन पर पहुंच चुका था. किरमानी रन चुराने के चक्कर में सिर्फ एक रन बनाकर रनआउट हो गए. लेकिन मदन लाल ने 22 गेंदों पर 21 रन बनाकर और रवि शास्त्री 3 गेदों में पांच रन बनाकर नॉट आउट रहे. भारत का स्कोर साठ ओवरों में 8 विकेट के नुकसान पर 262 रन हो गया.

 

वेस्टइंडीज के लिए मामूली थी 263 की चुनौती

ग्रुप ए के स्कोर को देखते हुए ये स्कोर बिल्कुल जीतने लायक नहीं था. खासकर तब जब वेस्टइंडीज की तरफ से गोर्डन ग्रीनिच, हेंस, विव रिचर्डस, क्लाइव लॉयड बल्लेबाजी के लिए तैयार खड़े थे. हेंस और ग्रीनिच ने भारतीय गेंदबाजों को धोना शुरू किया लेकिन रन चुराने के चक्कर में हेंस 24 रन पर रनआउट हो गए. तब वेस्टइंडीज का स्कोर 49 रन था.

 

जल्द ही बलविंदर संधु ने भारत को 24 पर ग्रीनिच से छुटकारा दिला दिया. स्कोर हुआ 56 पर दो विकेट. 67 रन पर जब मैच बारिश की वजह से रूका तो विव रिचर्डस् 12 और फैसल बेकस 3 रन पर खेल रहे थे. 22 ओवर में 67 का स्कोर बुरा नहीं था. अगले दिन 10 जून को बाकी का मैच खेला गया. ये रोजर बिन्नी का दिन था. बिन्नी ने विव रिचर्ड्स को किरमानी के हाथों आउट करवाया. रिचर्ड्स अपने स्कोर में सिर्फ 5 रन जोड़ पाए. जब चौथा विकेट गिरा तब स्कोर था 96 रन. मदन लाल के शानदार इनकटर से गिल्लायां हवा में उछल गईं.  विकेटकीपर बल्लेबाज जैफ डूजां हुए सिर्फ 7 रन बनाकर बिन्नी की गेंद पर आउट हो गए. अब वेस्टइंडीज का स्कोर था 107 रनों पर पांच विकेट.

 

गावस्कर की गुगली काम आई

क्रीज पर थे कप्तान क्लाइव लॉयड जो ऐसी परिस्थिति संभालने के लिए जाने जाते थे और उनक साथ दे रहे थे लैरी गोम्स. गोम्स रन चुराने के चक्कर में 8 रन पर आउट हो गए. स्कोर हुआ छठा विकेट 124 रन. अब वेस्टइंडीज की टीम मुश्किल में थी. उसपर भारत जैसी हल्की टीम से हार का खतरा मंडरा रहा था. लेकिन तब वेस्टइंडीज चढ़कर खेलने के लिए जानी जाती थी.

 

जब मेलकम मार्शल ने स्पिनर रवि शास्त्री की गेंद आगे बढ़कर मारने की कोशिश की तो किरमानी ने गिल्लियां उड़ा दीं. सातवां विकेट 126 रन पर गिर गया. कप्तान क्लाइव लॉयड बिन्नी का तीसरा शिकार बने. स्कोर था सिर्फ 130 रन. वेस्टइंडीज 8 विकेट गंवा चुका था.

 

होल्डिंग को रवि शास्त्री ने सिर्फ 8 रन पर चलता किया. नौ विकेट सिर्फ 157 रन पर गिर गए. जीत बेहद नजदीक लग रही थी. पर रॉबर्ट्स और गार्नर ने इस जीत को टाले रखा. ना सिर्फ टाला बल्कि भारतीय टीम की सांसे तक रोक दी.

 

कपिल देव ने अपनी किताब में लिखा है कि नौ बल्लेबाज सिर्फ 160 रन पर जा चुके थे. लेकिन दसवें विकेट के रूप में रॉबर्ट्स और गार्नर जैसे खतरनाक खिलाड़ी मौजूद थे. जिस तरह दोनों बल्लेबाजी कर रहे थे लग रहा था कि ये जोड़ी टूटने वाली नहीं है. दोनों ने 37 रन बनाए और अपनी टीम के टॉप स्कोरर थे. ऐसे में गावस्कर ने रवि शास्त्री को दोबारा लाने की सलाह दी और  ये तरीका काम कर गया.

 

आखिरकार गार्नर को रवि शास्त्री की गेंद पर किरमानी ने स्टंप किया. 228 रन पर वेस्टइंडीज की टीम सिमट गई. भारत ने 34 रन से मैच जीत लिया. विश्वकप के इतिहास में एक बहुत बड़ा उलटफेर हो चुका था.

 

भारत की पहली विजय का संदेश

10 जून 1983 को भारत ने दो बार की विश्वविजेता टीम वेस्टइंडीज को हरा दिया था. ये करिश्मा इससे पहले कोई नहीं कर पाया था. विश्वकप में वेस्टइंडीज की ये पहली हार थी. यशपाल शर्मा मैन ऑफ द मैच बने. भारत ने इस मैच से विश्वकप में अपने को कम आंकने वालों को करारा जवाब दिया था.

 

अगला मैच जिम्बाब्वे के साथ था जिसने ऑस्ट्रेलिया को हरा कर दुनिया को हैरान कर दिया था. 1983 विश्वकप अब तक का सबसे रोमांचक विश्वकप साबित हो रहा था और क्रिकेट के चाहने वाले हर मैच का बेसब्री से इतंजार कर रहे थे.

 

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