विश्व कप में पहली बार दिखेंगे ये बदलाव

By: | Last Updated: Tuesday, 27 January 2015 11:29 AM
new changes in world cup

नई दिल्लीः क्रिकेट के महाकूंभ में अब 16 दिन शेष रह गए हैं. ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में होने वाले इस विश्व कप के लिए हर टीम तैयार है. तैयार तो आप भी होंगे इस मुकाबले के रोमांच के लिए. लेकिन क्या आपको पता है कि इस विश्व कप में कई ऐसे बदलाव हैं जो आपने पिछले विश्व कप में नहीं देखे थे. विगत कुछ सालों में आईसीसी ने वनडे क्रिकेट में कई बदलाव किए हैं जो पहली बार इस विश्व कप में देखने को मिलेंगे.

 

फील्डिंग में बदलाव

 

आईसीसी ने 2012 में वनडे क्रिकेट में एक ऐसा बदलाव किया जिसके बाद से वनडे क्रिकेट में जबरदस्त बदलाव देखने को मिला है. मुकाबले ज्यादा रोमांचक होने लगे. और ये बदलाव है फील्डिंग का. पिछले विश्व कप तक पांच खिलाड़ी पावरप्ले के बाद 30 यार्ड से बाहर रहते थे लेकिन अब 4 खिलाड़ी ही बाहर रहेंगे. इससे गेंदबाजों को और बेहतर ढंग से गेंद फेंकने की जरूरत होगी. लेकिन दूसरी तरफ यही वजह है कि वनडे में अब ज्यादा रन बनने लगे हैं और बल्लेबाज ज्यादा अटैकिंग खेलने लगे हैं.

 

पावरप्ले में बदलाव

2011 विश्व कप में 3 पावरप्ले देखने को मिले थे. जिसमें पारी के पहले 10 ओवर नियमित थे और इसके बाद दो पावरप्ले लिए जाते थे जिसमें एक बल्लेबाजों के लिए और एक गेंदबाजों के लिए. लेकिन इस बार दो ही पावरप्ले होंगे. जिसमें पहले 10 ओवर तक अनिवार्य और उसके बाद बल्लेबाजों के लिए 40 ओवर से पहले. बल्लेबाजी पावरप्ले के दौरान तीन खिलाड़ी 30 यार्ड से बाहर रह सकते हैं.   

 

दो नई गेंद –

वनडे क्रिकेट में दो नई गेंद से गेंदबाजी करने का नियम आईसीसी ने 2011 विश्व कप के ठीक बाद किया था. कहा जाता था कि वनडे क्रिकेट में गेंदबाजों के लिए कुछ नहीं होता और ये बल्लेबाजों का खेल होता है. इसी को देखते हुए दो नई गेंद वाला बदलाव आया. हालांकि इसके असर पर राय अभी भी बंटी हुई है. स्पिन और रिवर्स स्विंग को लेकर कई गेंदबाजों ने इस बदलाव पर सवाल भी उठाए, लेकिन ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में ये नियम गेंदबाजों को मदद कर सकती है.

पार्ट टाइम गेंदबाजी पर सवाल

ऊपर के तीन बदलाव इस बार पार्ट टाइम गेंदबाजों की उपयोगिता को साबित करेंगे. टीम इंडिया के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ ने भी इस पर बात करते हुए कहा था कि अब पार्ट टाइम गेंदबाजों की भूमिका कम देखने को मिलेगी क्योंकि फील्डिंग में हुए बदलाव कप्तान को सोचने पर मजबूर कर देंगे. ऐसे में टीम के अंतिम 11 को लेकर भी कई परेशानियां कप्तानों को होंगी. पिछले विश्व कप में भारत की जीत में पार्ट टाइम गेंदबाज युवराज सिंह ने अहम भूमिका निभाई थी. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या विश्व कप में पार्ट टाइम गेंदबाजी किस तरह की होती है.

 

स्पिन या तेज –

पिछले विश्व कप में स्पिनरों का जलवा रहा था चाहे वो शाहिद अफरीदी हों या फिर भारत के युवराज सिंह. लेकिन इस बार क्या होगा ये मैच के दिन ही पता चलेगा क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में की गर्मी का मौसम धीरे-धीरे खत्म होने वाला है. पिच गर्म है लेकिन अभी तक टूटा नहीं है. साथ ही मैदान भी काफी बड़ा है ऐसे में स्पिन गेंदबाजी मैच में टर्निंग प्वाइंट ला सकती है लेकिन न्यूजीलैंड में तो तेज गेंदबाजों का ही बोलबाला रहा है. समूद्र के किनारे होने वाले अधिकतर मैच में तेज गेंदबाज कमाल दिखा सकते हैं.

 

टीम होगी मालामाल-

टूर्नामेंट जीतने के लिए प्राइज मनी भी हमेशा से एक मजबूत पक्ष रही है. इस बार के विश्व कप में पिछले विश्व कप की तूलना में 25 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. अगर कोई टीम फाइनल बिना हारे टूर्नामेंट को जीत ले तो उस टीम को 4 मिलियन डॉलर से अधिक का प्राइज मनी मिलेगा. इतना ही नहीं वो 6 टीमें जो पहले राउंड(ग्रुप मैच) में ही बाहर हो जाएंगी उन्हें भी इस बार उन्हें 35,000 डॉलर मिलेगा.   

 

नहीं होगा सुपर ओवर –

आईसीसी ने 2011 विश्व कप में नॉक आउट स्टेज में मैच टाई होने के बाद विजेता को तय करने के लिए वन ओवर का सुपर ओवर रखा था. ये नियम इस बार के विश्व कप में नहीं होंगे. सिर्फ नॉकआउट ही नहीं फाइनल मुकाबले में भी अगर मैच टाई होता है तो ट्रॉफी शेयर की जाएगी.

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