बिहार चुनाव: नीतीश के गुस्से का नुकसान किसको?

By: | Last Updated: Thursday, 3 September 2015 8:46 AM

नई दिल्ली: नीतीश कुमार को वैसे तो बहुत शांत रहने वाला नेता माना जाता है. लेकिन कई मौकों पर मुख्यमंत्री अपना आपा खो देते हैं. समस्तीपुर में कल कुछ ऐसा ही हुआ. मंच से ही सैकड़ों की भीड़ के बीच मुख्यमंत्री ने सांख्यिकी सेवकों को सड़क पर लाने की धमकी दे दी.

 

समस्तीपुर में पोलिटेक्निक कॉलेज के उदघाटन के बाद नीतीश सभा को संबोधित करने पहुंचे थे. भाषण शुरू होते ही सभा में पहले से झंडा बैनर लेकर पहुंचे सांख्यिकी संविदा सेवकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. इन कर्मचारियों को शांत करने के बजाए नीतीश ने सड़क पर लाने की धमकी दे डाली.

 

नीतीश ने कर्मचारियों से कहा कि “नारेबाजी बंद करके चुपचाप भाषण सुनो. तुमलोगों की व्यवस्था खत्म करने की सिफारिश आई थी लेकिन हमने रोक रखा है. ज्यादा हल्ला किए तो सड़क पर ला दूंगा.”

 

चाहते तो नीतीश मामले को आसानी से ठंडा कर सकते थे. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. सांख्यिकी सेवक अविनाश ने फोन पर बताया है कि सरकार लंबे समय से हमलोगों को आश्वासन दे रही है. पिछले दिनों सरकार ने भरोसा देकर हमलोगों का अनशन खत्म करा दिया. लेकिन मांग पूरी नहीं की. अविनाश का कहना है कि अपनी मांग मुख्यमंत्री के सामने नहीं रखेंगे तो किसके सामने रखेंगे ?

 

बिहार में सांख्यिकी सेवकों की संख्या करीब 72 हजार है. साल 2012 में बिहार सरकार ने ठेके पर इनकी बहाली की थी. राज्य में वोटर आई कार्ड बनाने, आधार कार्ड बनाने, जनगणना जैसे गिनती के कामों के लिए इनका इस्तेमाल होता है. ये लोग सरकारी कर्मचारियों की मदद के लिए ठेके पर रखे गये थे. अब इनकी मांग है कि इन्हें स्थायी किया जाए और उचित वेतन दिया जाए. लेकिन बार बार भरोसा मिलने के बाद भी इनका भविष्य अंधकार में ही दिख रहा है.

 

कर्मचारियों के मुताबिक ऐसा भी नहीं है कि इन्हें काम के बदले कोई ज्यादा पैसे मिलते हैं. काम के दिनों में रोज के काम के हिसाब से इनका बिल बनता है. पिछले छे महीने से किसे के पास कोई काम नहीं है. आधे से ज्यादा लोगों के पास साल भर से काम नहीं आया है.

 

हजारों लोगों का साल 2014 का पैसा बकाया है. इस काम से जुड़े लोग बेहद कम आय वाले परिवार से ताल्लुक रखते हैं. नतीजा ये है कि जिंदगी मझधार में फंसी है. न तो इस नौकरी से कोई आमदनी हो रही है और ना ही सरकार कोई दूसरा इंतजाम कर रही है.

 

इन लोगों के आंदोलन को शायद उतना बल इसलिए भी नहीं मिल पा रहा है क्योंकि बारह करोड़ की आबादी वाले राज्य में इनकी संख्या महज 72 हजार है.

 

चुनावी माहौल में नीतीश की धमकी को विरोधियों ने मुद्दा बना दिया है. इससे पहले जब नीतीश बिहार में सेवा यात्रा कर रहे थे तब जगह जगह शिक्षा मित्रों के विरोध का उन्हें सामना करना पड़ा था. तब भी उनका गुस्सा ऐसे ही सामने आया था. चुनावी माहौल में इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किसी राजनेता के लिए ठीक नहीं माना जाता. नीतीश कुमार ने ऐसे मौके पर अपना गुस्सा दिखाया है जिससे उनकी छवि को नुकसान हो सकता है.

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Web Title: nitish kumar
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