बिहार चुनाव: तो अब साइकिल की सवारी करेंगे रघुनाथ झा

By: | Last Updated: Thursday, 3 September 2015 8:54 AM

नई दिल्ली: एक जमाने में रघुनाथ झा बिहार के चुनिंदा बड़े नेताओं में से एक थे. कांग्रेस से राजनीतिक पारी शुरू करने वाले रघुनाथ झा का लालू की पार्टी से इस्तीफा इस वक्त कोई बड़ी राजनीतिक घटना नहीं है. क्योंकि रघुनाथ झा को पार्टी छोड़ना ही था.

 

27 साल तक जिस शिवहर से रघुनाथ झा विधानसभा का चुनाव लगातार जीतते रहे उस शिवहर से अपने बेटे को टिकट दिलवा पाने में नाकाम रहने की आशंका ने उन्हें पार्टी छोड़ने पर मजबूर कर दिया. माना जा रहा है कि रघुनाथ झा समाजवादी पार्टी मं शामिल होंगे.

 

एक जमाने में रघुनाथ झा को शेर-ए-बिहार कहा जाता था. जगन्नाथ मिश्रा जब बिहार की राजनीति में मजबूत थे तब नारा था जगन्नाथ के तीन हाथ- राजो, रघुनाथ और प्रभुनाथ. 1990 में जब जनता दल में मुख्यमंत्री चुनने की बारी आई तो रघुनाथ झा ने अपनी दावेदारी पेश करके लालू की राह आसान कर दी. रघुनाथ झा अगर उस दिन विधायक दल की बैठक में उम्मीदवार नहीं बने होते को रामसुंदर दास बिहार के मुख्यमंत्री होते और लालू इतने बड़े नेता नहीं बन पाते.

 

लेकिन उन रघुनाथ झा को राजनीतिक जीवन के आखिरी पड़ाव में अपने बेटे के टिकट के लिए लालू-नीतीश का मुंह देखना पड़ रहा है. रघुनाथ झा अपने बेटे अजीत झा के लिए शिवहर से आरजेडी की उम्मीदवारी चाह रहे थे. लेकिन सूत्रों के मुताबिक इस सीट पर जेडीयू के शर्फुद्दीन का टिकट तय हो चका है.

 

शर्फुद्दीन ने उन दिनों में नीतीश से वफादारी दिखाई थी जब मांझी ने विद्रोह कर दिया था. शर्फुद्दीन ही मीडिया में खरीद फरोख्त वाला टेप लेकर आये थे. कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार ने अजीत झा को बुलाकर कह दिया था कि आप इस बार मत लड़िए. आपको चुनाव बाद विधान परिषद भेज देंगे. लेकिन रघुनाथ झा इसके लिए राजी नहीं हुए.

 

27 साल तक शिवहर से विधायक रहे रघुनाथ झा लालू और राबड़ी की सरकार में ताकतवर मंत्री हुआ करते थे. चारा घोटाले में लालू जब जेल जा रहे थे तब रघुनाथ झा ने ही कहा था कि लालू को छूने की कोशिश की तो बिहार में खून की नदियां बहा देंगे. रघुनाथ झा के इस बयान के बाद ही लालू की गिरफ्तारी से पहले बिहार में सेना की तैनाती की गई थी.

 

1998 में नीतीश की समता पार्टी में शामिल होने के बाद रघुनाथ झा विधानसभा का उपचुनाव शिवहर से हार गए. इसके बाद 1999 में गोपालगंज से समता पार्टी के टिकट पर सांसद का चुनाव जीते. 2004 में रघुनाथ झा आरजेडी में आ गए. और बेतिया से लालू की पार्टी के टिकट पर जीतकर सांसद बन गए. यूपीए वन में रघुनाथ झा केंद्र में मंत्री भी बने. रघुनाथ झा का इतिहास दल बदल का रहा है. बिहार की राजनीति में उन्हें सबसे बड़ा दलबदलू कहा जाता है.

 

कांग्रेस, जनता दल, समाजवादी जनता दल, समता पार्टी, आरजेडी के बाद अब रघुनाथ झा मुलायम की पार्टी का रुख करने की तैयारी में हैं. पहले जब भी उन्होंने दल बदला तो राजनीतिक रूप से फायदा हुआ. लेकिन इस बार हालात बदल गये हैं. रघुनाथ झा बेटे को समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधानसभा लड़ाने की कोशिश करेंगे तो जीत का रास्ता आसान नहीं होगा. क्योंकि शिवहर का समीकरण इस बार उनके पक्ष में जाता नहीं दिख रहा है.

 

शिवहर के संग्राम में न केवल लालू-नीतीश साथ में हैं बल्कि बीजेपी भी चार पार्टियों के साथ मैदान में होगी. अब देखना ये होगा कि रघुनाथ झा का व्यक्तिगत रिश्ता पार्टियों पर भारी पड़ता है या फिर राजनीतिक जीवन के आखिरी दौर में बेटे को विरासत सौंपने का सपना सपना बनकर रह जाता है.

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Web Title: raghunath jha
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