एक विकलांग सिपाही जिनसे द्रविड़ को मिली प्रेरणा

By: | Last Updated: Friday, 12 September 2014 2:15 PM

मुंबई: पूर्व टेस्ट क्रिकेटर राहुल द्रविड़ न जाने कितने क्रिकेट खिलाड़ी और कितने लोगों के लिए एक रोल मॉडल होंगे लेकिन राहुल द्रविड़ का रोल मॉडल कौन है ये कम ही लोग जानते हैं. राहुल द्रविड़ को प्रेरणा मिली एक ऐसे भारतीय सिपाही से जिसने पहले तो जंग के मैदान में गोली खाई और फिर खेल के मैदान में पदक जीता.

 

खार जिमखाना क्लब में विकलांगता और विपरीत परिस्थतियों से उबरते हुए चैम्पियन बनने वाले टॉप भारतीय खिलाड़ियों पर लिखी प्रेरणादायी किताब लॉन्च करते हुए भारतीय टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज रहे द्रविड़ ने बताया कि वो मुरलीकांत पटकर की कहानी से काफी प्रेरित हुए पाकिस्तान के खिलाफ 1965 युद्ध के दौरान वो विकलांग हो गये थे. उन्हें गोली लगने से कई जख्म हुए थे, लेकिन उन्होंने जर्मनी में 1972 परालंपिक में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता था.

 

इस किताब के सह लेखक पूर्व अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी संजय शर्मा हैं.किताब में शर्मा और उनकी बेटी मेदिनी ने विकलांग भारतीय खिलाड़ियों की दास्तान लिखी है जिन्होंने मैदान में बड़ी-बड़ी चीजें हासिल कीं.

 

41 वर्षीय द्रविड़ ने कहा, ‘‘बतौर खिलाड़ी जब आप क्रिकेट खेलते हो तो आप पत्रकारों द्वारा साहस और बहादुर जैसे शब्द सुनते हो जो खेल की उपलब्धियों के लिये इनका इस्तेमाल करते हैं. जब मैंने यह किताब पढ़ी तो मैंने महसूस किया कि साहस वह नहीं है जो हम क्रिकेट के मैदान पर करते हैं. इनके साहस के आगे यह कुछ भी नहीं है. ’’

 

‘द वाल’ के नाम से मशहूर द्रविड़ ने पूर्व टेस्ट कप्तान मंसूर अली खान पटौदी से पहली बार हुई मुलाकात के अनुभव को याद करते हुए कहा कि वह इस बात से काफी प्रभावित हुए थे कि इस दिवंगत क्रिकेटर को इंग्लैंड में हुई कार दुर्घटना का कोई मलाल नहीं था जिसमें वह एक आंख की रौशनी गंवा बैठे थे. उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं भारतीय टीम में आया था तो जैसे कि ज्यादातर युवा बच्चे होते हैं, मैं भी मसूंर अली खान पटौदी का बहुत बड़ा प्रशंसक था. मैंने उन्हें खेलते हुए नहीं देखा था लेकिन मैंने उन्हें देखा था.

 

मैंने विशी (गुंडप्पा विश्वनाथ) और ईरापल्ली प्रसन्ना को उनके बारे में काफी बात करते हुए सुना है. इसलिये 1997 में जब मैं टीम में आया और मैं ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक टेस्ट मैच खेलने के लिये दिल्ली में था. मैंने सोचा कि यह उनसे (पटौदी) से मिलने और बात करने का अच्छा मौका है. ’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरे अंदर उनसे पूछने या फोन करने का साहस नहीं था. मैंने अपने मित्र के जरिये उनसे मुलाकात का इंतजाम करवा लिया. हमने क्रिकेट के बारे में काफी बातें कीं और मैंने उसने कप्तानी तथा बल्लेबाजी के बारे में विभिन्न चीजों के बारे में काफी सवालात किये. ’’

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Web Title: rahul dravid
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